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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान • प्रामाणिक 120 शब्दवाणी डिजिटल अभिलेखागार (C9.2.1)

शब्दवाणी — 120 Sacred Shabds

सत्य, धर्म, करुणा, जीव-दया एवं पर्यावरण संरक्षण के पावन अमर उपदेश। मूल शब्दवाणी अपरिवर्तनीय सुरक्षित, हिन्दी भावार्थ एवं English translation सहित।

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आज का पावन शबद (Daily Wisdom)

शब्द 72: शब्द 72: वेद कुराण कुमाया जालूं

मूल वाणी:

ओ३म्-वेद कुराण कुमाया जालूं, भूला जीव कुजीव कुजाणी। बसंदर नहीं नख हीरूं, धर्म पुरूष सिरजीवै पूरूं। कलि का माया जाल फिटाकर प्राणी, गुरू की कलम कुरांण पिछांणी। दींन गुमान करैलो ठाली, यूं कण घातै घुण हांणी। साच सिदक शैतान च...

हिन्दी भावार्थ:

शबद संख्या 72 में गुरु जम्भेश्वर जी धार्मिक पाखंड, बाह्य कर्मकांड और मूक प्राणियों पर होने वाली क्रूरता का कड़ा विरोध करते हैं। वे स्पष्ट उपदेश देते हैं कि परमात्मा के दरबार में दया, सत्य, पवित्र आचरण और ईमानदारी ही सच्च...

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86 Raag Bhairav

शब्द 86 — शब्द 86: जुग जागो जुग जाग पिरांणी,

ओ३म्-जुग जागो जुग जाग पिरांणी, कांय जागंता सोवो। भलकै बीर बिगोवो होयसी, दुसमन कांय लकोवो। ले कूंची दरबान बुलाओ, दिल ताला दिल खोवो। जंपो रे जिण जं यो जणीयर, जपसी सो जिण हारी। लह-लह दाव पड़ंता खेलो, सुर तेतींसा सारी। पवन बंधान काया गढ काची, नीर छलै यूं पारी। पारी बिनसै नीर ढुलैलो, ओपिंड काम न कारी। काची काया दृढ कर सींचो, यूं माली सींचै बाड़ी। ले काया बासंदर होमो, यूं ईंधन की भारी। शील स्नाने संजमे चालो, पाणी देह पखाली। गुरू के बचने निंव खिंव चालो, हाथ जपो जपमाली। वस्तु पियारी खरचो यूं नाहीं, किहिं गुण राखो टाली। खरचे लाहो राखे टोटो, बिबरस जोय निहाली। घर आगी इत गोवल बासो, कूड़ी आधो चारी। आज मूवा कल दूसर दिन है, जो सरै तो सारी। पीछै कलीयर कागा रोलो, रहसी कूक पुकारी। ताण थकै यूं हारयो नाहीं, मुरखा अवसर जौले हारी।
शबद संख्या 86 में गुरु जम्भेश्वर जी सृष्टि के मूल तत्वों—जल, वायु, पृथ्वी, वनस्पति और मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण का पावन संदेश देते हैं। प्रकृति परमात्मा का ही स्वरूप है, अतः उसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का सर्वोपरि धर्म है।
In Shabad #86, Sri Guru Jambheshwar Bhagwan imparts timeless spiritual wisdom. He emphasizes the sacred sanctity of nature, water, air, trees, and voiceless creatures, teaching that preserving the environment is living worship of the omnipresent Creator.
✦ मुख्य संदेश:

धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।

प्रमाणित शबद पढ़ें
98 Raag Bhairav

शब्द 98 — शब्द 98: जिहि गुरू कै खिणही ताऊं,

ओ३म्-जिहि गुरू कै खिणही ताऊं, खिणही सीऊ, खिणही पवणा, खिणही पाणी, खिणही मेघ मण्डाणो। कृष्ण करंता बार न होई, थल सिर नीर निवाणो। भूला प्राणी विष्णु जंपो रे, यूं मौत टलै जिरवाणो। भीगा है पण भेद्या नाहीं, पांणी मांहि पखाणो। जीवत मरो रे जीवत मरो, जिन जीवन की बिध जांणी। जे कोई आवै हो हो कर, तो आप जै हुईये पांणी। जाकै बहुती नवणी, बहुती खवणीं बहुती क्रिया समांणी। जांकी तो निज निर्मल काया जोय जोय देखो, ले चढ़ियो अस्मानी। यह मढ देवल मूल न जोयबा, निज कर जपो पिराणी। अनन्त रूप जोवो अभ्यागत, जिहिंका खोज लहो सुर बाणी। सेतम सेतूं, जेरज जेरू, इंडस इंडू, अइयालो उरध जे खैणी।
शबद संख्या 98 में गुरु जम्भेश्वर जी सृष्टि के मूल तत्वों—जल, वायु, पृथ्वी, वनस्पति और मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण का पावन संदेश देते हैं। प्रकृति परमात्मा का ही स्वरूप है, अतः उसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का सर्वोपरि धर्म है।
In Shabad #98, Sri Guru Jambheshwar Bhagwan imparts timeless spiritual wisdom. He emphasizes the sacred sanctity of nature, water, air, trees, and voiceless creatures, teaching that preserving the environment is living worship of the omnipresent Creator.
✦ मुख्य संदेश:

धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।

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