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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #63 • राग: Raag Asavari

शब्द 63 — शब्द 63: आतर पातर राही रूक्मण

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्-आतर पातर राही रूक्मण मेल्हा मंदिर भोयो, गढ़ सोवन तेपण मेल्हा रहा छड़ा सी जोयों। रात पडंता पाला भी जाग्या, दिवस तपंता सूरू। ऊन्हा ठाढा पवना भी जाग्या, घन बरसंता नीरूं। दुनीतणा औचाट भी जाग्या, के के नुगरा देता गाल गहीरूं। जिहिं तन ऊना ओढण ओंढां, तिहिं ओढंता चीरूं। जां हाथे जप माली जपां, तहां जपंता हीरूं। बारा काजै पड्यो बिछोहो, संभल संभल झूरूं। राघो सीता हनुवंत पाखों, कौन बंधावत धीरूं। मागर मणिया कांच कथीरूं, हीरस हीरा हीरूं। विखा पटंतर पड़ता आया, पूरस पूरा पूरूं। जे रिण राहे सूर गहीजै, तो सूरज सूरा सूरूं। दुखिया है जे सुखिया होयसैं, करसै राज गहीरूं। माह अंगीठी बिरखा ओल्हो, जेठ न ठंडा नीरूं। पलंग न पोढण, सेज न सोवण कंठ रूलंता हीरूं। इतना मोह न मानै शिंभु, तहीं तहीं सुसीरू। घोड़ा चौली बाल गुदाई, श्री राम का भाई। गुरू की बाचा बहियों, राघों सीता हनुवंत पाखो। दुख सुख कांसू कहियों।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
शबद संख्या 63 में गुरु जम्भेश्वर जी सृष्टि के मूल तत्वों—जल, वायु, पृथ्वी, वनस्पति और मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण का पावन संदेश देते हैं। प्रकृति परमात्मा का ही स्वरूप है, अतः उसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का सर्वोपरि धर्म है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
In Shabad #63, Sri Guru Jambheshwar Bhagwan imparts timeless spiritual wisdom. He emphasizes the sacred sanctity of nature, water, air, trees, and voiceless creatures, teaching that preserving the environment is living worship of the omnipresent Creator.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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