खेजड़ली पावन ओरण एवं स्मृति वन संवर्धन
खेजड़ली में 1730 ई. के 363 शहीदों के पावन स्थल पर स्थित खेजड़ी वृक्षों के पवित्र ओरण का सतत संरक्षण। इसके अंतर्गत पारंपरिक बिश्नोई नियमों के...
Bishnoi Conservation & Environmental Legacy Atlas
बिश्नोई समुदाय द्वारा संरक्षित पावन ओरणों, खेजड़ी वृक्ष क्षेत्रों, चिंकारा-काला हिरण आश्रय स्थलों एवं शिकार-रोधी गश्ती केंद्रों का आधिकारिक भू-स्थानिक मानचित्र। वन्यजीव सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संवेदनशील निर्देशांक सुरक्षित रूप से संक्षेपित हैं।
गुरु जाम्भोजी के 29 नियमों (नियम 29) के तहत संरक्षित पावन ओरण जहां हरे वृक्ष काटना वर्जित है।
काला हिरण, चिंकारा एवं गोडावण पर्यावासों को समर्पित समुदाय-संरक्षित अभयारण्य।
शिकार-रोधी चौकियां, वन्यजीव एम्बुलेंस एवं त्वरित न्यायिक रक्षा तंत्र।
भारत सरकार 2011 जनगणना एमडीडीएस कोड युक्त ग्राम जहां सक्रिय संरक्षण कार्य जारी है।
राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा के वे जिले जहां प्रमाणित संरक्षण पहल मौजूद हैं।
विगत 180 दिनों में चतुर्-सूत्रीय साक्ष्य मानकों पर पुनः सत्यापित पहलें।
स्क्रीन रीडर एवं सुलभ नेविगेशन के लिए संरचित सूची
खेजड़ली में 1730 ई. के 363 शहीदों के पावन स्थल पर स्थित खेजड़ी वृक्षों के पवित्र ओरण का सतत संरक्षण। इसके अंतर्गत पारंपरिक बिश्नोई नियमों के...
रोटू गांव के पारंपरिक ओरण क्षेत्र में कृष्णमृग एवं चिंकारा के प्राकृतिक आवास का संरक्षण। बिश्नोई समाज के अथक प्रयासों से इसे राजस्थान सरकार...
अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा द्वारा संचालित अंतरराज्यीय वन्यजीव रेस्क्यू एंबुलेंस एवं शिकार विरोधी स्वयंसेवक नेटवर्क। घायल हिरणों, चिंक...
राजस्थान वन विभाग द्वारा गुड़ा विश्नोई झील एवं आसपास के क्षेत्र में अधिसूचित वैधानिक कंजर्वेशन रिज़र्व। यह सैकड़ों स्वच्छंद विचरण करने वाले...
पंजाब के फाजिल्का जिले में १३ बिश्नोई गांवों के १८,६५० हेक्टेयर निजी कृषि क्षेत्रों में फैला अनूठा खुला वन्यजीव अभयारण्य। यहां ३,५०० से अधिक...
जोधपुर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित पारंपरिक आखेट निषिद्ध क्षेत्र एवं सामुदायिक ओरण। यह क्षेत्र भारतीय चिंकारा, कृष्णमृग और मरुस्थलीय लोमड़ी क...
मुकाम मुक्तिधाम में गुरु जाम्भोजी के समाधि स्थल के चारों ओर विस्तृत सदियों पुराना पावन ओरण। यहां खेजड़ी, जाल और रोहिड़ा के प्राचीन वृक्ष पूर...
समराथल धोरा का पावन बालूका स्तूप एवं पारिस्थितिकी तंत्र, जहां १४८५ ई. में गुरु जाम्भोजी ने बिश्नोई पंथ की स्थापना कर २९ नियमों का उपदेश दिया...
थार मरुस्थल के हृदय में स्थित ऐतिहासिक पावन सरोवर एवं जल संचयन ओएसिस। यह वन्यजीवों और शीतकालीन प्रवासी जलपक्षियों के लिए जीवनदायी जलस्रोत है...
हरियाणा के फतेहाबाद जिले में कृष्णमृगों का प्रमुख प्राकृतिक आवास। बिश्नोई समाज के सजग आंदोलन और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के न्यायिक आद...
लोहावट साथरी धाम से संलग्न ऐतिहासिक पावन ओरण, जहां घायल चिंकारों व अनाथ शावकों के लिए प्राथमिक उपचार व देखभाल केंद्र संचालित है। उपचारोपरांत...
बिश्नोई समाज संरक्षण एटलस में संकटग्रस्त वन्यजीवों (काला हिरण, चिंकारा, गोडावण) एवं शिकार-रोधी गश्ती चौकियों के वास्तविक जीपीएस निर्देशांक सार्वजनिक रूप से कभी प्रदर्शित नहीं किए जाते हैं। सभी बिंदु भारत सरकार की 2011 जनगणना एमडीडीएस ग्राम सीमा या पावन ओरण केंद्रक (Centroid) द्वारा सामान्यीकृत किए गए हैं ताकि शिकारियों द्वारा किसी भी दुरुपयोग की संभावना को पूर्णतः समाप्त किया जा सके।
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