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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
पर्यावरण-धर्म के प्रवर्तक एवं गुरु (1451–1536 ईस्वी)

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान — जाम्भोजी

आधुनिक पर्यावरण विज्ञान से पाँच शताब्दी पूर्व, गुरु जम्भेश्वर जी ने 1485 ईस्वी में समराथल धोरे पर जैव-विविधता संरक्षण, सभी जीवों के प्रति अहिंसा और मरुस्थलीय जीवन-पद्धति पर आधारित आध्यात्मिक नियमों की स्थापना की।

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का पारंपरिक कलात्मक चित्रांकन
🎨 पारंपरिक कलाकृति (CC0)

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान — पावन स्वरूप

पारंपरिक चित्रांकन • स्रोत: विकिमीडिया कॉमन्स

पावन कालक्रम

सत्यापित ऐतिहासिक विवरण

1451 ई.

दिव्य प्राकट्य (पीपासर)

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, पीपासर (नागौर)

1485 ई.

पंथ स्थापना (समराथल धोरा)

कार्तिक शुक्ल अष्टमी; 29 नियमों का उपदेश

1536 ई.

मुकाम समाधि महातीर्थ

लालासर निर्वाण, मुकाम में पावन समाधि

पावन दर्शन

बिश्नोई धर्म के चार आधार

करुणा, स्वच्छता, नैतिक दृढ़ता और पारिस्थितिक संतुलन पर आधारित।

जीव दया एवं अहिंसा

सभी जीवों के प्रति अटूट करुणा। शिकार और पशु-क्रूरता का निषेध तथा काले हिरण, चिंकारा और मरुस्थलीय जीवों की रक्षा।

वृक्ष रक्षा

हरे वृक्षों, विशेषकर थार की जीवनदायिनी खेजड़ी (Prosopis cineraria), को काटने का सख्त निषेध।

शुद्ध आचरण

प्रातः स्नान, आध्यात्मिक स्मरण, पानी छानकर पीना, ईंधन को जीवों से जाँचकर उपयोग करना तथा नशे और मांस से परहेज।

सामाजिक समता

जातिगत भेदभाव का निषेध, श्रम का सम्मान, भाईचारा, क्षमा और सूखे में सामुदायिक अन्न-साझेदारी।

29 नियम 1485 ई.

बिश्नोई धर्म के 29 नियम

पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक आचरण, व्यक्तिगत स्वच्छता और आध्यात्मिक भक्ति से जुड़े सभी 29 नियमों को उनके शास्त्रीय संदर्भ सहित पढ़ें।

363 बलिदानी 1730 ई.

खेजड़ली वृक्ष बलिदान (1730 ईस्वी)

अमृता देवी बिश्नोई और 362 ग्रामीणों का वह बलिदान, जिन्होंने जोधपुर के सैनिकों से खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए।

पावन वाणी 120 Shabads

शब्द वाणी एवं पावन मुकाम

श्री गुरु जम्भेश्वर जी की राजस्थानी-देवनागरी वाणी पढ़ें और मुकाम तालवा, समराथल धोरा तथा पीपासर जैसे तीर्थों का परिचय देखें।

शोध-समीक्षित एवं अभिलेखीय स्रोत

ऐतिहासिक विवरणों का मिलान राजस्थानी ऐतिहासिक अभिलेखों, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर से किया गया है।

गु.ज.वि. एवं प्रौ.वि. अभिलेखागार, हिसार अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा बीकानेर अभिलेखागार (1730 ई.)
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