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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
प्रामाणिक ज्ञान एवं सत्यापन मार्गदर्शिका

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बिश्नोई पंथ, पर्यावरण संरक्षण, ग्राम एटलस सत्यापन पद्धति और सांस्कृतिक धरोहर से संबंधित प्रामाणिक मार्गदर्शन।

Q1 बिश्नोई एटलस (Bishnoi Atlas) क्या है?

बिश्नोई एटलस एक आधिकारिक, साक्ष्य-आधारित डिजिटल संस्थान, भौगोलिक बसावट निर्देशिका एवं आध्यात्मिक ग्रंथागार है। यह 179 जनगणना-सत्यापित गाँवों, 57 पवित्र तीर्थ स्थलों, 371 प्रामाणिक गोत्रों और गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 पावन शब्दों का संपूर्ण दस्तावेजीकरण करता है।

Q2 गुरु जम्भेश्वर भगवान के 29 नियम क्या हैं?

विक्रम संवत 1542 (1485 ई.) की कार्तिक बदी अष्टमी को समराथल धोरा पर गुरु जम्भेश्वर भगवान द्वारा प्रवर्तित 29 नियम पर्यावरण संरक्षण, व्यक्तिगत शुचिता, अहिंसा, जीव दया और आध्यात्मिक अनुशासन की आचार संहिता हैं। इनमें हरे वृक्ष काटने और जीवों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, शाकाहार और करुणा अनिवार्य हैं।

Q3 अष्टधाम (आठ प्रमुख तीर्थ) कौन-से हैं?

अष्टधाम गुरु जम्भेश्वर भगवान की पावन चरण-रज से पवित्र हुए आठ प्रमुख तीर्थ हैं: मुक्ति धाम मुकाम (समाधि मंदिर), समराथल धोरा (29 नियमों का उपदेश स्थल), पीपासर (जन्म स्थल), जाम्भोलाव धाम (पवित्र तालाब), रोतू धाम, जांगलू धाम, लोदीपुर धाम (उत्तर प्रदेश) तथा लालासर साथरी (निर्वाण स्थल)।

Q4 बिश्नोई एटलस में गाँवों का सत्यापन कैसे होता है?

प्रत्येक प्रकाशित गाँव को अनिवार्य रूप से फोर-लिंक एविडेंस गेट (Four-Link Evidence Gate) पार करना होता है: 1) आधिकारिक 2011 भारत जनगणना MDDS कोड, 2) सर्वे ऑफ इंडिया जीपीएस निर्देशांक, 3) बिश्नोई समाज से संबंधित प्राथमिक दस्तावेजी प्रमाण, और 4) स्वतंत्र क्षेत्रीय एवं संस्थागत सत्यापन। 47,453 अप्रमाणित रिकॉर्ड्स को पूरी तरह संगरोध (Quarantine) में रखा गया है।

Q5 1730 ई. का खेजड़ली बलिदान क्या है?

सितंबर 1730 ई. (वि.सं. 1787 भाद्रपद शुक्ला दशमी) को खेजड़ली गाँव (जोधपुर) में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोई नर-नारियों ने हरे खेजड़ी वृक्षों की रक्षा हेतु अपने शीश न्योछावर कर दिए थे। "सिर साठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण" इस सर्वोच्च पर्यावरण बलिदान का अमर संदेश है।

Q6 चार गोत्र टालने का वैवाहिक नियम क्या है?

आनुवंशिक शुद्धता एवं पारिवारिक मर्यादा के संरक्षण हेतु बिश्नोई समाज में विवाह संबंध तय करते समय चार गोत्र टाले जाते हैं: 1) स्वयं का (पिता का) गोत्र, 2) माता का गोत्र, 3) दादी का गोत्र, और 4) नानी का गोत्र। इन चारों कुल-गोत्रों में विवाह पूर्णतः वर्जित है।

Q7 श्री शब्द वाणी क्या है?

श्री शब्द वाणी बिश्नोई पंथ का मूल प्रामाणिक धर्मग्रंथ है, जिसमें गुरु जम्भेश्वर भगवान द्वारा उच्चारित 120 पावन शब्द संकलित हैं। ये शब्द डिंगल (प्राचीन राजस्थानी) व भाषा में रचित हैं और इनमें एकेश्वरवाद, पर्यावरण संरक्षण, सदाचार और मानवीय चेतना का दिव्य संदेश सन्निहित है।

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