श्री गुरु जाम्भोजी महाराज के 29 पावन नियम
उनतीस नियम (विश्नोई धर्म की आचार संहिता)
कार्तिक सुदी अष्टमी संवत् 1542 (ई. 1485) को गुरु जाम्भोजी महाराज ने समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की और ये उनतीस नियम दिए। इनमें पर्यावरण सुरक्षा, जीव दया, व्यक्तिगत शुद्धि और ईश्वर भक्ति का दिव्य समन्वय है।
तीस दिन सूतक पाळना
प्रसूति के समय माता और शिशु के स्वास्थ्य व स्वच्छता हेतु 30 दिन का सूतक नियम पालन करना।
पाँच दिन ऋतुवंती स्त्री को कार्य मुक्त रखना
ऋतुमती स्त्री को पाँच दिन तक गृह व कृषि कार्यों से पूर्ण विश्राम देना।
प्रातःकाल स्नान करना
प्रातः सूर्योदय से पूर्व शुद्ध जल से स्नान कर शरीर व चित्त को निर्मल करना।
शील, संतोष और शुचिता का पालन
सदाचार, सात्विक संतोष और बाह्य व आंतरिक पवित्रता धारण करना।
प्रतिदिन प्रातः एवं सायं संध्या करना
प्रातः व सायंकाल दोनों समय शांत भाव से ईश्वर का ध्यान व स्मरण करना।
सायंकाल आरती और गुणगान करना
संध्या समय दीप प्रज्वलित कर प्रभु की आरती व गुणगान करना।
प्रातःकाल हवन करना
गौ-घृत व सूखी लकड़ियों से प्रतिदिन प्रातः यज्ञ करना जिससे वातावरण शुद्ध रहे।
पानी छानकर पीना और वाणी शुद्ध बोलना
सूक्ष्म जीवों की रक्षा हेतु जल छानकर पीना और दूसरों के कल्याण हेतु मधुर व सत्य वाणी बोलना।
लकड़ी बीनकर और झाड़कर जलाना
ईंधन की लकड़ी को झाड़-पोंछकर देखना ताकि उसमें छिपे कीट-पतंगे अग्नि में न जलें।
क्षमा भाव धारण करना
क्रोध त्यागकर हृदय में क्षमा व सहनशीलता का वास रखना।
दया का भाव रखना
प्रत्येक प्राणी के प्रति दया, करुणा और आत्मीयता का व्यवहार करना।
अमावस्या का व्रत रखना
अमावस्या के दिन उपवास रखकर आत्म-चिंतन करना और बैलों व भूमि को विश्राम देना।
विष्णु भगवान का स्मरण व नाम जप करना
सृष्टि के पालनहार सर्वव्यापी परमात्मा विष्णु का अनवरत नाम जप करना।
जीवों पर दया करना और उनकी रक्षा करना
मूक प्राणियों को शरण देना और शिकारियों से उनकी रक्षा हेतु तत्पर रहना।
हरा वृक्ष कभी नहीं काटना
हरे-भरे वृक्षों को काटना महापाप है। केवल गिरी हुई सूखी लकड़ियों का ही उपयोग करना।
काम, क्रोध, मद, लोभ व मोह का शमन
इंद्रियों पर संयम रखकर काम, क्रोध, अहंकार और लोभ से मुक्त होना।
शुद्ध हाथों से सात्विक भोजन बनाना
अपने हाथों से पवित्रतापूर्वक शुद्ध व सात्विक भोजन तैयार करना।
बैल व पशुओं को शरण देना
वृद्ध, असहाय पशुओं को कसाईयों से बचाकर गौशालाओं में आजीवन संरक्षण देना।
बैलों का बधियाकरण न करना
पशुओं को क्रूर यातना देकर उनका बधियाकरण न करना।
अफीम (अमल) का सेवन न करना
अफीम, डोडा, पोस्त जैसे घातक मादक पदार्थों का पूर्ण त्याग।
मांसाहार का पूर्ण त्याग
सभी जीवों को अपना बंधु मानकर मांसाहार का सर्वथा परित्याग करना।
नीले रंग के वस्त्र न पहनना
नीले वस्त्रों का त्याग, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से नील के निर्माण में अनगिनत हरे वृक्ष व जल नष्ट होता था।