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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
Verified Institutional Record • संवत् 1542 (ई.स. 1485) — समराथल धोरा

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज के 29 पावन नियम
उनतीस नियम (विश्नोई धर्म की आचार संहिता)

कार्तिक सुदी अष्टमी संवत् 1542 (ई. 1485) को गुरु जाम्भोजी महाराज ने समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की और ये उनतीस नियम दिए। इनमें पर्यावरण सुरक्षा, जीव दया, व्यक्तिगत शुद्धि और ईश्वर भक्ति का दिव्य समन्वय है।

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Spiritual

प्रतिदिन प्रातः एवं सायं संध्या करना

प्रातः व सायंकाल दोनों समय शांत भाव से ईश्वर का ध्यान व स्मरण करना।

🌿 पर्यावरण एवं जीव दया महत्व: Mental tranquility and disciplined spiritual connection with nature.
नियम संख्या: 5/29
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Spiritual

सायंकाल आरती और गुणगान करना

संध्या समय दीप प्रज्वलित कर प्रभु की आरती व गुणगान करना।

🌿 पर्यावरण एवं जीव दया महत्व: Community cohesion and cultivating reverence for life.
नियम संख्या: 6/29
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Spiritual

प्रातःकाल हवन करना

गौ-घृत व सूखी लकड़ियों से प्रतिदिन प्रातः यज्ञ करना जिससे वातावरण शुद्ध रहे।

🌿 पर्यावरण एवं जीव दया महत्व: Atmospheric purification and air sanitation through medicinal herbal combustion.
📜 प्रमाणित शब्द वाणी आधार:
नियम संख्या: 7/29 Shri Jambha Vani, Shabad 1 & Shabad 3 (हवन एवं पाहल विधान)
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Spiritual

अमावस्या का व्रत रखना

अमावस्या के दिन उपवास रखकर आत्म-चिंतन करना और बैलों व भूमि को विश्राम देना।

🌿 पर्यावरण एवं जीव दया महत्व: Mandatory monthly rest for draught animals, agriculture soil, and human digestive system.
📜 प्रमाणित शब्द वाणी आधार:
नियम संख्या: 16/29 Shri Jambha Vani, Shabad 45 (अमावस्या व्रत एवं ध्यान)
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Spiritual

विष्णु भगवान का स्मरण व नाम जप करना

सृष्टि के पालनहार सर्वव्यापी परमात्मा विष्णु का अनवरत नाम जप करना।

नियम संख्या: 17/29
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