श्री गुरु जाम्भोजी महाराज के 29 पावन नियम
उनतीस नियम (विश्नोई धर्म की आचार संहिता)
कार्तिक सुदी अष्टमी संवत् 1542 (ई. 1485) को गुरु जाम्भोजी महाराज ने समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की और ये उनतीस नियम दिए। इनमें पर्यावरण सुरक्षा, जीव दया, व्यक्तिगत शुद्धि और ईश्वर भक्ति का दिव्य समन्वय है।
प्रतिदिन प्रातः एवं सायं संध्या करना
प्रातः व सायंकाल दोनों समय शांत भाव से ईश्वर का ध्यान व स्मरण करना।
सायंकाल आरती और गुणगान करना
संध्या समय दीप प्रज्वलित कर प्रभु की आरती व गुणगान करना।
प्रातःकाल हवन करना
गौ-घृत व सूखी लकड़ियों से प्रतिदिन प्रातः यज्ञ करना जिससे वातावरण शुद्ध रहे।
अमावस्या का व्रत रखना
अमावस्या के दिन उपवास रखकर आत्म-चिंतन करना और बैलों व भूमि को विश्राम देना।