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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
Verified Institutional Record • संवत् 1542 (ई.स. 1485) — समराथल धोरा

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज के 29 पावन नियम
उनतीस नियम (विश्नोई धर्म की आचार संहिता)

कार्तिक सुदी अष्टमी संवत् 1542 (ई. 1485) को गुरु जाम्भोजी महाराज ने समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की और ये उनतीस नियम दिए। इनमें पर्यावरण सुरक्षा, जीव दया, व्यक्तिगत शुद्धि और ईश्वर भक्ति का दिव्य समन्वय है।

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Social

क्षमा भाव धारण करना

क्रोध त्यागकर हृदय में क्षमा व सहनशीलता का वास रखना।

🌿 पर्यावरण एवं जीव दया महत्व: Social peace and harmony within arid community settlements.
📜 प्रमाणित शब्द वाणी आधार:
नियम संख्या: 10/29 Shri Jambha Vani, Shabad 8 (क्षमा दया मन धरणी)
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Social

चोरी नहीं करना

किसी की वस्तु का हरण न करना, ईमानदारी से जीविकोपार्जन करना।

नियम संख्या: 12/29
13
Social

निंदा नहीं करना

पीठ पीछे किसी की चुगली या निंदा न करना।

नियम संख्या: 13/29
14
Social

झूठ नहीं बोलना

सदा सत्य पर अडिग रहना, असत्य भाषण का सर्वथा त्याग करना।

नियम संख्या: 14/29
15
Social

व्यर्थ वाद-विवाद से बचना

अहंकारवश किसी से व्यर्थ शास्त्रार्थ या झगड़ा न करना।

नियम संख्या: 15/29
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