दीन मठ एवं पावन कांकड़ वृक्ष (समराथल धोरा)
Samrathal Deen Math & Sacred Kankad Tree
Samrathal Dhora, Bikaner (Rajasthan)
बिश्नोई पंथ की स्थापना (कार्तिक शुक्ल अष्टमी 1485 ई.), अमृतमय पाहुल संस्कार एवं 29 नियमों का उद्घोष
थार मरुस्थल से गंगा के उपजाऊ मैदानों तक—श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान के प्राकट्य, कठोर साधना, पाहुल संस्कार, 29 नियमों के उद्घोष, अमृतमयी शब्दवाणी एवं अमर पर्यावरण बलिदानों से अभिमंत्रित 47 पावन धाम, साथरियां, जलतीर्थ एवं पूज्य ओरण।
अष्टधाम बिश्नोई समाज के सर्वाधिक वंदनीय आठ तीर्थ स्थल हैं, जो गुरु जम्भेश्वर जी के प्राकट्य, पंथ स्थापना, साधना, निर्वाण एवं धर्मप्रचार यात्राओं के अमिट साक्षी हैं।
Samrathal Deen Math & Sacred Kankad Tree
Samrathal Dhora, Bikaner (Rajasthan)
बिश्नोई पंथ की स्थापना (कार्तिक शुक्ल अष्टमी 1485 ई.), अमृतमय पाहुल संस्कार एवं 29 नियमों का उद्घोष
Mukti Dham Mukam (Nij Mandir)
Mukam (Talwa), Bikaner (Rajasthan)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का परम पावन समाधि स्थल; बिश्नोई समाज का सर्वोच्च महातीर्थ
Guru Jambheshwar Bhagwan Avtaran Mandir
Peepasar, Nagaur (Rajasthan)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का प्राकट्य स्थल (जन्मभूमि भाद्रपद कृष्णा अष्टमी 1451 ई.)
Janglu Dham & Sacred Sarovar
Janglu, Bikaner (Rajasthan)
गुरु जम्भेश्वर जी का पावन साधना स्थल, उपदेश पीठ एवं ऐतिहासिक जल सरोवर
Guru Jambheshwar Mandir Rotu Sathri
Rotu, Nagaur (Rajasthan)
खेजड़ी वृक्ष रक्षा का ऐतिहासिक स्थल; प्राचीन ओरण एवं वन्यजीव अभयारण्य धाम
Lalasar Nirvana Sathri
Lalasar, Bikaner (Rajasthan)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का परम पावन देवलोक गमन (निर्वाण स्थल 1536 ई.)
Jambholav Sacred Sarovar
Jambha (Jambholav Dham), Phalodi (Rajasthan)
गुरु जम्भेश्वर जी के निर्देश पर निर्मित पावन जलतीर्थ सरोवर; पुष्कर तुल्य पवित्र जल
Lodipur Dham (Moradabad, UP)
Lodipur, Moradabad (Uttar Pradesh)
गुरु जम्भेश्वर जी के उत्तर भारत प्रवास के दौरान स्थापित पावन धाम; उत्तर प्रदेश का मुख्य तीर्थ
अकादमिक साहित्य (डॉ. हीरालाल महेश्वरी 1972, डॉ. कृष्ण लाल बिश्नोई 1999) एवं अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के प्रामाणिक अभिलेखों में मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) स्थित लोदीपुर धाम को आठवां धाम माना गया है, जो उत्तर भारत में गुरु जम्भेश्वर जी के देशाटन एवं अहिंसा संदेश का ऐतिहासिक केंद्र है।
पश्चिमी राजस्थान की स्थानीय जनश्रुति में कई श्रद्धालु लोहावट साथरी (फलोदी) को आठवें धाम के रूप में वंदना करते हैं। इसे परियोजना में ऐतिहासिक पावन साथरी व क्षेत्रीय अष्टधाम विकल्प के रूप में ससम्मान प्रलेखित किया गया है।
लोहावट साथरी विवरण देखें →साठिका (बीकानेर) को भीषण अकाल के समय पशुपालकों के लिए गुरु महाराज के आरंभिक सत्संग स्थल के रूप में माना जाता है। पूर्ण अभिलेखीय सत्यापन हेतु इसे शोध अनुसंधान श्रेणी में रखा गया है।
साथरी वह पवित्र स्थल है जहां श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान ने पधारकर धर्मोपदेश दिया, अमृतमयी शब्दवाणी का उच्चारण किया और प्रथम शिष्यों को पाहुल दीक्षा प्रदान की।
Lohawat, Phalodi (Rajasthan)
गुरु जम्भेश्वर भगवान की पावन साथरी व तपस्थली।
Hansadesh, Phalodi (Rajasthan)
पवित्र जांभाणी साथरी एवं मंदिर जहाँ वर्ष पर्यन्त धार्मिक अनुष्ठान, हवन एवं भजन संध्याएं होती हैं।
बिश्नोई समाज के केंद्रीय महातीर्थ, जहां वर्ष में दो बार विशाल मेले भरते हैं और समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक निर्णय लिए जाते हैं।
Jambha (Jambholav Dham), Phalodi (Rajasthan)
विश्नोई पंथ का पावन तीर्थ धाम जो पवित्र सरोवर के तट पर स्थित है।
बिश्नोई पंथ में प्रकृति संरक्षण साक्षात आराधना है। जांभोलाव का पावन जल, रोटू का ऐतिहासिक ओरण, और खेजड़ली का अमर बलिदान स्थल इस आध्यात्मिक-पर्यावरणीय संविदा के जीवंत प्रमाण हैं।
Keriya, Sanchore
घायल व अनाथ वन्यजीवों के उपचार एवं संरक्षण हेतु समर्पित सेवा आश्रम।
Lathi, Jaisalmer
गोडावण एवं हरिणों की सुरक्षा व पेयजल आपूर्ति हेतु समुदाय द्वारा संचालित सेवा केंद्र।
Ramdeora, Jaisalmer
तीर्थयात्रियों के लिए विशाल आश्रय, अन्नक्षेत्र एवं सेवा केंद्र।
Mohni, Surat
पश्चिमी भारत के विश्नोई प्रवासियों का मुख्य मंदिर व धर्मशाला संकुल।
Khejarli Kalan, Jodhpur
1730 ई. में खेजड़ी वृक्षों की रक्षा में आत्मोत्सर्ग करने वाले 363 विश्नोई शहीदों का राष्ट्रीय पावन स्मारक।
Khejarli Kalan, Jodhpur
वह पावन ओरण जहाँ अमृता देवी व वीरांगनाओं ने वृक्षों से लिपटकर प्राणोत्सर्ग किया।
Rotu, Nagaur
काले हिरणों के संरक्षण हेतु अधिसूचित ऐतिहासिक सामुदायिक अभयारण्य।
Chitalwana, Sanchore
सैकड़ों चिंकारा मृगों एवं मोरों का सुरक्षित प्राकृतिक आवास व पावन ओरण।
Jambha (Jambholav Dham), Phalodi
गुरु जम्भेश्वर जी के निर्देश पर निर्मित पावन जलतीर्थ सरोवर; पुष्कर तुल्य पवित्र जल
Guda Bishnoiyan, Jodhpur
पवित्र प्राकृतिक जलाशय जहाँ कुरजां पक्षी एवं काले हिरण निर्भय विचरते हैं।
Nemawar, Dewas
नर्मदा नदी का पावन नाभि स्थल घाट जहाँ विश्नोई श्रद्धालु पवित्र स्नान व पूजा करते हैं।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं मध्य प्रदेश में स्थित बिश्नोई पंथ के सभी प्रमाणित तीर्थों का अन्वेषण करें।
Ramdeora, Jaisalmer (Rajasthan)
तीर्थयात्रियों के लिए विशाल आश्रय, अन्नक्षेत्र एवं सेवा केंद्र।
Badopal, Fatehabad (Haryana)
काले हिरणों के संरक्षण हेतु समर्पित मंदिर परिसर व सामुदायिक अभयारण्य।
Sito Guno, Fazilka (Punjab)
धार्मिक सम्मेलनों एवं कथा आयोजनों हेतु सामुदायिक भवन व मंदिर परिसर।
Kanth, Moradabad (Uttar Pradesh)
मुरादाबाद के ऐतिहासिक विश्नोई चौधरियों द्वारा स्थापित प्राचीन मोहल्ला व मंदिर।
Peepasar, Nagaur (Rajasthan)
गुरुदेव की पावन चरण पादुका एवं ऐतिहासिक जन्म कक्ष।
Chitalwana, Sanchore (Rajasthan)
सैकड़ों चिंकारा मृगों एवं मोरों का सुरक्षित प्राकृतिक आवास व पावन ओरण।
Guda Bishnoiyan, Jodhpur (Rajasthan)
पवित्र प्राकृतिक जलाशय जहाँ कुरजां पक्षी एवं काले हिरण निर्भय विचरते हैं।
Peepasar, Nagaur (Rajasthan)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का प्राकट्य स्थल (जन्मभूमि भाद्रपद कृष्णा अष्टमी 1451 ई.)
Mohni, Surat (Gujarat)
पश्चिमी भारत के विश्नोई प्रवासियों का मुख्य मंदिर व धर्मशाला संकुल।
Abubshahr, Sirsa (Haryana)
वार्ड 12 में स्थित मंदिर जहाँ नियमित सत्संग व हवन संपन्न होते हैं।
Balsamand, Hisar (Haryana)
हरियाणा विश्नोई समाज का सर्वप्रमुख मंदिर व महासम्मेलन स्थल।
Bhaniyana, Jaisalmer (Rajasthan)
पूर्वी जैसलमेर का प्रमुख विश्नोई मंदिर जहाँ पावन पाहल व हवन संपन्न होता है।
Dholipal, Hanumangarh (Rajasthan)
हनुमानगढ़ ग्रामीण क्षेत्र का प्रमुख विश्नोई मंदिर व सामाजिक सम्मेलन केंद्र।
Dhorimanna, Barmer (Rajasthan)
धोरीमन्ना का प्रमुख विश्नोई मंदिर व पावन हवन स्थल।
Fatehpur Bisnoi, Moradabad (Uttar Pradesh)
रोहिलखंड विश्नोई समाज का मुख्य पावन मंदिर व हवन केंद्र।
Ganga, Sirsa (Haryana)
सिरसा-डबवाली क्षेत्र का प्रधान विश्नोई मंदिर व सत्संग केंद्र।
Gorakhpur, Fatehabad (Haryana)
फतेहाबाद क्षेत्र का प्रमुख विश्नोई मंदिर जहाँ पावन हवन व सत्संग संपन्न होता है।
Gudamalani, Barmer (Rajasthan)
मालानी क्षेत्र का प्रमुख विश्नोई मंदिर जहाँ नियमित हवन व सत्संग आयोजित होता है।
Morjand Khari, Ganganagar (Rajasthan)
सादुलशहर क्षेत्र का पावन विश्नोई मंदिर व सामाजिक सम्मेलन स्थल।
Patli, Ganganagar (Rajasthan)
ग्राम पातली का पावन विश्नोई मंदिर जहाँ नियमित अमावस्या हवन आयोजित होता है।
Rohat, Pali (Rajasthan)
पाली जिले का प्रमुख विश्नोई मंदिर जहाँ वृहद धर्मसभा व हवन आयोजित होते हैं।
Rotu, Nagaur (Rajasthan)
खेजड़ी वृक्ष रक्षा का ऐतिहासिक स्थल; प्राचीन ओरण एवं वन्यजीव अभयारण्य धाम
Sanchore, Sanchore (Rajasthan)
सांचौर क्षेत्र का प्रमुख विश्नोई मंदिर व सामाजिक सम्मेलन केंद्र।
Jambha (Jambholav Dham), Phalodi (Rajasthan)
विश्नोई पंथ का पावन तीर्थ धाम जो पवित्र सरोवर के तट पर स्थित है।
Jambha (Jambholav Dham), Phalodi (Rajasthan)
गुरु जम्भेश्वर जी के निर्देश पर निर्मित पावन जलतीर्थ सरोवर; पुष्कर तुल्य पवित्र जल
Janglu, Bikaner (Rajasthan)
गुरु जम्भेश्वर जी का पावन साधना स्थल, उपदेश पीठ एवं ऐतिहासिक जल सरोवर
Keriya, Sanchore (Rajasthan)
घायल व अनाथ वन्यजीवों के उपचार एवं संरक्षण हेतु समर्पित सेवा आश्रम।
Khejarli Kalan, Jodhpur (Rajasthan)
1730 ई. में खेजड़ी वृक्षों की रक्षा में आत्मोत्सर्ग करने वाले 363 विश्नोई शहीदों का राष्ट्रीय पावन स्मारक।
Kuchor Aguni, Bikaner (Rajasthan)
विक्रम संवत 1481 में गोवंश रक्षार्थ वीरगति पाने वाले खेराज भोमिया जी का ऐतिहासिक मंदिर, जहां मनौती परिक्रमा, आहुति और संरक्षित देववन (ओरण) स्थित है।
Lalasar, Bikaner (Rajasthan)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का परम पावन देवलोक गमन (निर्वाण स्थल 1536 ई.)
Lathi, Jaisalmer (Rajasthan)
गोडावण एवं हरिणों की सुरक्षा व पेयजल आपूर्ति हेतु समुदाय द्वारा संचालित सेवा केंद्र।
Lodipur, Moradabad (Uttar Pradesh)
गुरु जम्भेश्वर जी के उत्तर भारत प्रवास के दौरान स्थापित पावन धाम; उत्तर प्रदेश का मुख्य तीर्थ
Lohawat, Phalodi (Rajasthan)
गुरु जम्भेश्वर भगवान की पावन साथरी व तपस्थली।
Mukam (Talwa), Bikaner (Rajasthan)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का परम पावन समाधि स्थल; बिश्नोई समाज का सर्वोच्च महातीर्थ
Nemawar, Dewas (Madhya Pradesh)
नर्मदा नदी का पावन नाभि स्थल घाट जहाँ विश्नोई श्रद्धालु पवित्र स्नान व पूजा करते हैं।
Rotu, Nagaur (Rajasthan)
काले हिरणों के संरक्षण हेतु अधिसूचित ऐतिहासिक सामुदायिक अभयारण्य।
Khejarli Kalan, Jodhpur (Rajasthan)
वह पावन ओरण जहाँ अमृता देवी व वीरांगनाओं ने वृक्षों से लिपटकर प्राणोत्सर्ग किया।
Samrathal Dhora, Bikaner (Rajasthan)
बिश्नोई पंथ की स्थापना (कार्तिक शुक्ल अष्टमी 1485 ई.), अमृतमय पाहुल संस्कार एवं 29 नियमों का उद्घोष
Ransi Gaon, Jodhpur (Rajasthan)
विश्नोई संत कवि शिरोमणि संत विल्होजी की पावन जन्म स्थली एवं स्मारक मंदिर।
Bhajan Nagar, Phalodi (Rajasthan)
ग्राम मंदिर जहाँ नियमित पाहल व भजन सत्संग का आयोजन होता है।
Bhodia Khera, Fatehabad (Haryana)
फतेहाबाद क्षेत्र का प्रमुख विश्नोई मंदिर जहाँ पावन हवन व सत्संग संपन्न होता है।
Jandwala Bishnoian, Sirsa (Haryana)
धार्मिक उत्सवों एवं हवन हेतु गांव का मुख्य मंदिर व सभा स्थल।
Moolraj, Phalodi (Rajasthan)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का पावन मंदिर जहाँ नित्य हवन-पाहल एवं प्रार्थना सभाएं होती हैं।
Neemgaon, Harda (Madhya Pradesh)
1914 में स्थापित शताब्दी मंदिर जो मध्य प्रदेश विश्नोई समाज का सर्वोच्च तीर्थ स्थल है।
Hansadesh, Phalodi (Rajasthan)
पवित्र जांभाणी साथरी एवं मंदिर जहाँ वर्ष पर्यन्त धार्मिक अनुष्ठान, हवन एवं भजन संध्याएं होती हैं।
Vishnu Nagar, Phalodi (Rajasthan)
ग्राम मंदिर जहाँ समाज द्वारा नियमित पूजा-अर्चना व सत्संग किया जाता है।
जाम्भाणी संत
जाम्भाणी संत
प्रमुख हरजस रचयिता एवं कथाकार; 17 भक्तिमय हरजस एवं आख्यानों के रचयिता
प्रमुख हरजस रचयिता; 12 भक्ति एवं अहिंसा परक पदों के रचनाकार
प्रमुख हरजस रचयिता; नैतिक सत्य एवं वैराग्य पर आधारित 9 हरजस पदों के रचयिता
जाम्भाणी संत
प्रमुख हरजस रचयिता; 6 पावन भक्ति पदों के रचनाकार
जाम्भाणी संत
प्रत्येक धार्मिक तीर्थ स्थल बिश्नोई समाज के प्रमाणित राजस्व गांव से जुड़ा हुआ है। 2011 जनगणना कोड, प्रशासनिक पदानुक्रम एवं समुदाय अभिलेखों से जुड़े गांवों का अध्ययन करें।
अकादमिक व ऐतिहासिक शुचिता के अनुसार, जनश्रुतियों अथवा द्वितीयक साहित्य में उल्लिखित वे स्थल जो वर्तमान में अभिलेखीय अनुसंधान के अधीन हैं (जैसे साठिका, ताल छापर, दूंधड़ा आदि), उन्हें प्राथमिक ऐतिहासिक साक्ष्य पूर्ण होने तक अलग श्रेणी में रखा गया है।
Sathika Sathri (Candidate Site)
आरंभिक सत्संग परंपरा से जुड़ी ऐतिहासिक साथरी (अकादमिक समीक्षाधीन)
साठिका बीकानेर जिले का ऐतिहासिक स्थल है जहां गुरु जम्भेश्वर जी के सत्संग की प्राचीन परंपरा रही है। यह स्थल शोध और समीक्षा के अंतर्गत सूचीबद्ध है।
Tal Chhapar Pasture (Candidate Site)
ऐतिहासिक कृष्णमृग चरागाह एवं आध्यात्मिक प्रवास (अकादमिक समीक्षाधीन)
चूरू का ताल छापर कृष्णमृग अभयारण्य और ओरण परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। गुरु जम्भेश्वर जी के जीव रक्षा उपदेशों से जुड़ा यह स्थल समीक्षाधीन है।
Dundhara Sathri (Candidate Site)
लूणी नदी बेसिन में स्थित ऐतिहासिक सत्संग स्थल (अकादमिक समीक्षाधीन)
जोधपुर के लूणी क्षेत्र स्थित ढूंढाड़ा गुरु महाराज के मारवाड़ प्रवास और धर्मोपदेश से जुड़ा परंपरागत स्थल है।
Pipasar Dhora (Candidate Site)
पीपासर के समीप पावन रेत का टीला (अकादमिक समीक्षाधीन)
पीपासर गांव के निकटस्थ पावन धोरा जो स्थानीय मौखिक परंपरा में साधना स्थल के रूप में मान्य है।
Khedapa Associated Shrine (Candidate Site)
संत परंपरा एवं संवाद स्थल (अकादमिक समीक्षाधीन)
संत परंपरा और जांभाणी आंदोलन के अंतर्संबंधों से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल।
बिश्नोई पंथ का धार्मिक भूगोल 1451 ईस्वी में पीपासर में गुरु जम्भेश्वर जी के प्राकट्य, 1485 ईस्वी में समराथल धोरा पर पंथ स्थापना, 1536 ईस्वी में लालासर में निर्वाण एवं 1730 ईस्वी में खेजड़ली में 363 शहीदों के अमर बलिदान से जुड़ा हुआ है। प्रत्येक पावन तीर्थ समाज के 540 वर्षों के जीवंत इतिहास का जीवंत साक्ष्य है।
इस पोर्टल पर सूचीबद्ध प्रत्येक तीर्थ स्थल चार स्तरीय साक्ष्य प्रणाली (प्रलेखित, समुदाय परंपरा, शोध विश्लेषण, समकालीन रिपोर्टिंग) के अधीन सत्यापित है। अप्रमाणित दावों या काल्पनिक आंकड़ों को पूर्णतः वर्जित रखा गया है।
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