ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व
सामुदायिक परंपराविस्तृत ऐतिहासिक विवरण
संवत 1481 फाल्गुन शुक्ल पंचमी (1424 ई.) को बहन कोडमदे के विवाह अवसर पर गो-रक्षार्थ 360 वीरों सहित वीरगति पाने वाले वीर खेराज जी मोहिल का ऐतिहासिक तीर्थ। प्राचीन खेजड़ी वृक्ष तले रानी सिंगारी पडियाल सती हुईं। परिसर में भव्य श्री गुरु जम्भेश्वर मंदिर व विशाल हवनशाला स्थित है। संरक्षक: श्री खेराज भोमिया जी मंदिर ट्रस्ट एवं श्री गुरु जम्भेश्वर मंदिर समिति, कुचोर अगूणी (नोखा, बीकानेर)।