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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
गुरु / धर्म संस्थापक 🗓 1451 CE (VS 1508) — 1536 CE (VS 1593) ✓ स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान

🌱 पावन जन्म स्थली: पीपासर (Nagaur)
🛕 समाधि धाम: मुक्तिधाम मुकाम (निज मंदिर समाधि स्थल)
🌿 गोत्र / वंश: पंवार (Panwar)

जीवन चरित्र एवं साधना दर्शन

गुरु / धर्म संस्थापक
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान (1451-1536 ई. / वि.सं. 1508-1593) विश्नोई धर्म के प्रवर्तक एवं आराध्य देव हैं। आपका प्राकट्य भाद्रपद कृष्णा अष्टमी (जन्माष्टमी) को नागौर जिले के पीपासर गांव में पंवार क्षत्रिय ठाकुर लोहटजी एवं माता हंसा देवी के घर हुआ। बाल्यकाल में मौन साधना व अद्भुत ज्ञान के उपरांत वि.सं. 1542 (1485 ई.) की कार्तिक शुक्ला अष्टमी को समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की। आपने 29 पावन नियमों एवं 120 अमृतमयी शब्दों (शबदवाणी) का दिव्य उपदेश दिया, जिसमें अहिंसा, वृक्ष एवं वन्यजीव संरक्षण, सत्य और शुचिता का अद्वितीय संदेश निहित है।

🌟 मुख्य उपदेश व जीवन मूल्य

29 नियम (पेड़-पौधों व वन्यजीवों का संरक्षण, जीव दया, नशामुक्त जीवन, शुचिता एवं विष्णु भक्ति) तथा 120 पदों की पवित्र शबदवाणी।

स्रोत एवं ऐतिहासिक साक्ष्य

The Mukam-published Shabd Vani edition identifies the 120-shabad corpus with Guru Jambheshwar Ji.

स्तर C (Level C) — समाज प्रमाणित

  • Swami Ramanand Ji Maharaj / All India Bishnoi Mahasabha. Shabd Vani (Prachin Hastlikhit Gutka), Sri Jambheshwar Mandir Trust, Mukam, 1995.

Revealed the divine 120 Shabads of Shabad Vani at Samrathal Dhora, founding the Bishnoi Panth and 29 Niyams in 1485 AD.

स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

  • Dr. Hira Lal Maheshwari. Jambhoji and His Literature (श्री जम्भोजी और उनका साहित्य), Sahitya Akademi / Rajasthani Bhasha Sahitya evam Sanskriti Akademi, Bikaner, 1972, p. pp. 45–130.

Documentary and community-tradition sources link Guru Jambheshwar Ji to canonical Panwar (पंवार) lineage.

स्तर B (Level B) — शोध समर्थित

  • Dr. Hiralal Maheshwari & Dr. Pema Ram. Bishnoi Gotra Vamshavali & Jambhani Sahitya, Bishnoi Sahitya Prakashan, 1976.

प्रमाणित साहित्य रचनाएं एवं ग्रंथ

मूल डिंगल/राजस्थानी पद, साखियां एवं छंद

1 कृतियां
ग्रंथ / इतिहास

शबदवाणी (120 शब्द)

गुरु जम्भेश्वर भगवान से परंपरागत रूप से संबद्ध 120 शब्दों का मूल संकलन। इस सूची प्रविष्टि में पद-पाठ पुनर्प्रकाशित नहीं है।

ऐतिहासिक महत्व: श्री जम्भेश्वर मंदिर ट्रस्ट, मुकाम द्वारा प्रकाशित शबदवाणी संस्करण के आधार पर सूचीबद्ध।

साहित्य स्रोत: Shabd Vani (120 Shabads)

Canonical literary work 'Shabad Vani (120 Divine Shabads)' catalogued in authoritative studies.

स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

  • Dr. Hira Lal Maheshwari. Jambhoji and His Literature (श्री जम्भोजी और उनका साहित्य), Sahitya Akademi / Rajasthani Bhasha Sahitya evam Sanskriti Akademi, Bikaner, 1972, p. pp. 45–130.

The Mukam-published Shabd Vani edition presents this as a 120-shabad corpus attributed to Guru Jambheshwar Ji.

स्तर C (Level C) — समाज प्रमाणित

  • Swami Ramanand Ji Maharaj / All India Bishnoi Mahasabha. Shabd Vani (Prachin Hastlikhit Gutka), Sri Jambheshwar Mandir Trust, Mukam, 1995.

संबद्ध पावन भूगोल एवं तीर्थ स्थल

गाँव एटलस एवं धर्म स्थल
tapasya sthal Samrathal Dhora

दीन मठ एवं पावन कांकड़ वृक्ष (समराथल धोरा)

Dharma sthapana in 1485 CE and continuous meditation.

मुक्तिधाम मुकाम (निज मंदिर समाधि स्थल)

Nij Mandir and supreme holy samadhi of Guru Jambhoji.

birthplace Peepasar

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान प्राकट्य स्थल मंदिर

Avataran and ancestral home of Lohatji Panwar.

shabad revealed Rotu

रोटू साथरी मंदिर

Sacred Kankedi tree where holy Shabads were revealed.

nirvana Lalasar

लालासर पावन निर्वाण साथरी

Nirvana sthal where Guru Jambhoji departed earthly plane.

visitation Bikaner

जांगलू

Historic Sathri and sacred pond visited by Guru Jambhoji.

tapasya sthal Bikaner

समराथल धोरा

Dharma sthapana in 1485 CE and continuous meditation.

samadhi Bikaner

मुकाम (तालवा)

Nij Mandir and supreme holy samadhi of Guru Jambhoji.

birthplace Nagaur

पीपासर

Avataran and ancestral home of Lohatji Panwar.

shabad revealed Nagaur

रोटू

Sacred Kankedi tree where holy Shabads were revealed.

nirvana Bikaner

लालासर

Nirvana sthal where Guru Jambhoji departed earthly plane.

📷 संत छायाचित्र दीर्घा (फ़ोटो गैलरी)

सत्यापित एवं समुदाय द्वारा प्रेषित ऐतिहासिक छायाचित्र

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संक्षिप्त संदर्भ विवरण

श्रेणी गुरु / धर्म संस्थापक
कालखंड 1451 CE (VS 1508) — 1536 CE (VS 1593)
जन्म स्थान Peepasar
साहित्य कृतियां 1
संबद्ध तीर्थ 5
📜

पवित्र शबदवाणी पढ़ें

गुरु जम्भेश्वर भगवान द्वारा उच्चारित 120 पावन शब्दों का संपूर्ण संग्रह, भावार्थ एवं ऑडियो श्रवण।

शबदवाणी संग्रह देखें →

अन्य पूज्य संत एवं साहित्यकार

गुरु जाम्भेश्वर भगवान
संत केशवदासजी गोदारा 16th Century AD
गोदारा गोत्र में जन्मे संत केशवदासजी (केशोजी) 17 अमर हरजस पदों के रचयिता हैं। हरजस परंपरा में उनका तीसरा स्थान है। उनकी रचनाओं में गुरु भक्ति के साथ-साथ जांभाणी पंथ के प्रारंभिक इतिहास और संतों के त्याग की प्रेरक गाथाएं मिलती हैं।
संत कल्याणजी 16th Century AD
संत कल्याणजी 12 पावन हरजस पदों के रचयिता हैं। उनके पदों में गेयता, शास्त्रीय राग-रागिनियों का प्रवाह और लोक कल्याण की उदात्त भावना दृष्टिगोचर होती है। वे गुरु वचनों और जीव रक्षा को मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य बताते हैं।
संत गोविंदजी 16th Century AD
संत गोविंदजी 9 प्रामाणिक हरजस पदों के रचनाकार हैं। उनके पदों में गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए भी निष्काम भक्ति और नैतिक पवित्रता बनाए रखने का सरल और प्रभावशाली उपदेश है।
संपूर्ण संत सूची देखें →
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