ऐतिहासिक धरोहर एवं उद्भव
Historic Bishnoi Settlementजांगलू गादी के पूज्य सन्त एवं स्थानीय वन संरक्षक
🛕 पावन तीर्थ धाम, साथरी व ऐतिहासिक स्मारक
1 तीर्थ स्थलजांगलू धाम एवं पावन सरोवर
Janglu Dham & Sacred Sarovar
बीकानेर के नोखा क्षेत्र स्थित जांगलू गुरु जम्भेश्वर जी की पावन साधना और धर्मोपदेशों से जुड़ा ऐतिहासिक धाम है। भीषण अकाल के समय गुरुदेव ने यहां प्रवचन देकर जन-कल्याण किया और जांगलू के पावन सरोवर को पवित्र किया। यह अष्टधाम परंपरा का अभिन्न और चौथा प्रमुख धाम है।
संबद्ध पूज्य संत एवं साहित्य परंपरा
इस पावन धरा से जुड़े गुरु, शिष्य एवं संत साहित्यकार
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान (1451-1536 ई. / वि.सं. 1508-1593) विश्नोई धर्म के प्रवर्तक एवं आराध्य देव हैं। आपका प्राकट्य भाद्रपद कृष्णा अष्टमी (जन्माष्टमी) को नागौर जिले के पीपासर गांव में पंवार क्षत्रिय ठाकुर लोहटजी एवं माता हंसा देवी के घर हुआ। बाल्यकाल में मौन साधना व अद्भुत ज्ञान के उपरांत वि.सं. 1542 (1485 ई.) की कार्तिक शुक्ला अष्टमी को समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की। आपने 29 पावन नियमों एवं 120 अमृतमयी शब्दों (शबदवाणी) का दिव्य उपदेश दिया, जिसमें अहिंसा, वृक्ष एवं वन्यजीव संरक्षण, सत्य और शुचिता का अद्वितीय संदेश निहित है।
आधिकारिक जनगणना व जनसांख्यिकी
Census of Indiaवन्यजीव संरक्षण, ओरण एवं पवित्र स्थल
प्राथमिक साक्ष्य एवं ऐतिहासिक संदर्भ
प्रत्येक दावे की सत्यता स्वतंत्र प्राथमिक स्रोतों से प्रमाणित है।
District Census Handbook: Bikaner
Gazetteer of the Bikanir State
वैकल्पिक नाम, राजस्व ग्राम व ढाणियां
समीपस्थ पावन अष्टधाम / तीर्थ
मुक्तिधाम मुकाम (निज मंदिर समाधि स्थल)
विश्नोई पंथ का सर्वोच्च तीर्थ जहाँ श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान की पावन समाधि स्थित है।
GPS Centroid Location 27.6120, 73.2840
Tied to Census 2011 MDDS village centroid coordinates.
Verification History
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