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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #7 • राग: Raag Asavari

शब्द 7 — शब्द 7: हिंदू होय कै हरि क्यूं ना जंप्यो

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—हिंदू होय कै हरि क्यूं ना जंप्यो, कांय दहदिशा दिल परसरायों। सोम अमावस आदित वारी, कांय काटी बनरायों। गहण गहंतै, बहण बहंतै, निर्जल प्यारस मूल बंधते, कांयरे मुरखा तैं पालंग सेज निहाल बिछाई। जादिन तेर होम न जाप न तप किरिया, जांण कै भागी कपिला गई। कूड़तणों जे करतब कीयो, नातें लाव न सायों। भूला प्राणी आल बखाणी, न जंप्यो सुर रायों। छंदे कहां तो बहुता भावै, खरतऱ को पतियायों। हिव की बेलां हिय न जायों, शंक रह्यो कंदरायों। ठाढी बेला ठार न जायों, ताती बेलां तायों। बिंबे बेलां विष्णु न जंप्यो, ताछे का चीन्हों कछु कमायों। अति आलस भोला वै भूला, न चीन्हो सुररायों। पारब्रह्म की सुध न जाणीं, तो नागे जोग न पायों।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
मनुष्य को केवल अपनी धार्मिक पहचान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने भीतर परम सत्य की खोज करनी चाहिए। केवल बाहरी पूजा, कर्मकांड, व्रत या धार्मिक दिखावा पर्याप्त नहीं है। अज्ञान, आलस्य और गलत कर्म मनुष्य को वास्तविक आध्यात्मिक लक्ष्य से दूर कर देते हैं। परम सत्य की पहचान के लिए जागरूकता, साधना और सही आचरण आवश्यक हैं।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
A person should not rely merely upon religious identity but should seek the Divine Reality within. External worship, ritual, fasting or religious appearance alone is not sufficient. Ignorance, laziness and improper actions lead one away from the true spiritual goal. Awareness, sincere practice and righteous conduct are necessary for recognizing the Supreme Reality.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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