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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #69 • राग: Raag Sarang

शब्द 69 — शब्द 69: जबरारे तैं जग डांडीलो

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्-जबरारे तैं जग डांडीलो, देह न जीती जांणो। माया जाले ले जम काले, लेणा कोण समाणो। काचै पिंडै किसी बड़ाई, भोलै भूल अयांणो। म्हां देखंता देव दाणु, सुर नर खीणा, बीच गया बेराणो। कुभंकरण महरावण होता, अबली जोध अयाणो। कोट लंका गढ बिषमा होता, कांयदा बस गया रावण राणो। नौ ग्रह रावण पाए बन्हध्या, तिस बीह सुर नर शंक भयाणो। ले जम कालें अति बुधवंतो, सीता काज लुंभाणो। भरमी बादी अति अंहकारी, करता गरब गुमानो। तेऊ तो जम काले खीणा, थिर न लाधौ थाणो। काचै पिंड अकाज अफारूं, किसो पिराणी माणो। साबण लाख मजीठ बिगूता, थोथा बाजर घाणो। दुनियां राचै गाजै बाजै, तामें कणू न दाणू। दूनियां के रंग सब कोई राचै, दीन रचै सो जाणो। लोही मांस बिकारो होयसी, मुर्ख फिरै अयाणो। मागर मणियां काच कथीरन राचो, कूड़ा दुनी डफाणो। चलन चलन्हतै, जीव जीवन्हतै, काया निवन्हती सास फुरंतै। कांयरे प्राणी विष्णु न जं यो, कीयो कन्हधै को तांणो। तिहिं ऊपर आवैला जंवर तणा दल, तास किसो सहनाणौ। ताकै शीष न ओढण पाय न पहरण, नैवा झूल झयाणो। धणक न बाण न टोप न अंगा, टाटर चुगल चयाणो। साल सुचंगी घृत सुबासो, पीवण न ठंडा पांणी। सेज न सोवण पंलग न पोढण, छात न मैड़ी माणो। न वां दइया न वां मइयां, नागड़ दूत भयाणो। काचा तोड़ नीकूचा भाखे, अघट घटैं मल माणो। धरती अरू असमान अगोचर, जा तैं जीव न देही जाणो। आवत जावत दीसै नाहीं, साचर जाय अयाणो। जंवर तंणा जमदूत दहैला, मल बेसैला मांणों। तातै कलीयर कागा रोलो, सूना रहयो अयाणो। आयसां जोयसां भणता गुणतां, वार महूर्ता पोथा थोथा। पुस्तक पढिया वेद पुराणों, भूत परेती कांय जपीजै यह पाखण्ड परमाणों। कान्हह दिशावर जेकर चालो, रतन काया ले पार पहूंचो, रहसी आवा जाणो। तांह परेरै पार गिरायें ततकै निश्चल थाणो। सो अपरंपर कांय न जंपो, ततखिण लहो इमाणो। भल मूल सींचो रे प्राणी, यूं तरवर मेलत डालूं। जइया मूल न सी यो, तो जामण मरण बिगोवो। अहनिश करणी थिर न रहिबा, न बं यो जम कालूं। कोई कोई भल मूल सींचीलो, भल तंत बूझीलो। जा जीवन की विध जाणी, जीव तड़ा कछु लाहो होसी मूवा न आवत हांणी।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
शबद संख्या 69 में गुरु जम्भेश्वर जी धार्मिक पाखंड, बाह्य कर्मकांड और मूक प्राणियों पर होने वाली क्रूरता का कड़ा विरोध करते हैं। वे स्पष्ट उपदेश देते हैं कि परमात्मा के दरबार में दया, सत्य, पवित्र आचरण और ईमानदारी ही सच्ची बंदगी है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
In Shabad #69, Sri Guru Jambheshwar Bhagwan imparts timeless spiritual wisdom. He fearlessly denounces hypocrisy, empty rituals, and cruelty against innocent beings, emphasizing that true divine devotion lies in universal compassion, truthful living, and non-violence.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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