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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #2 • राग: Raag Bhairav

शब्द 2 — शब्द 2: मोरे छाया न माया

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—मोरे छाया न माया, लोहू न मांसू, रतूँ न धातूँ। मोरे माई न बापूं, आपण आपू, रोही न रापूं, कोपूं न कलापूं, दुःख न सरापूं। लोई अलोई, व्यूंह तुलोई, ऐसा न कोई जपां भी सोई, जिहिं जंपे आवागवण न होई। मोरी आद न जाणत, महीयल धूंवा बखाणत। उरथ धाकले तसूलूं, अन्नत तो हम रचीलो, हमै सिरजीले से कोण? म्हे जोगी कै भोगी, कै अल्प अहारी, ज्ञानी कै ध्यानी, कै निज कर्म धारी। सोखी कै पोखी, कै जल बिंब धारी, दया धर्म थापले निज बाला ब्रह्मचारी।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
यह शब्द उस परम सत्य की ओर संकेत करता है जो सांसारिक माया, शरीर, रिश्तों और भौतिक पहचान से परे है। वह किसी एक सांसारिक संबंध से बंधा हुआ नहीं है। मनुष्य को बाहरी मोह, क्रोध, दुख और अहंकार से ऊपर उठना चाहिए। साधक अपने कर्म, ज्ञान, ध्यान, संयम और दया-धर्म के माध्यम से आत्मिक जीवन को विकसित करे। ब्रह्मचर्य, संयम और धर्म का आधार जीवन को शुद्ध करने वाला है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
This Shabd points toward the ultimate reality beyond worldly illusion, physical identity and ordinary relationships. The seeker is encouraged to rise above attachment, anger, suffering and ego. A spiritual aspirant should cultivate discipline through right action, knowledge, meditation, restraint and compassion. A life grounded in Dharma and self-control becomes a path toward spiritual realization.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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