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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #50 • राग: Raag Sorath

शब्द 50 — शब्द 50: तइया सांसू तइया मासूं

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—तइया सांसू तइया मासूं, तइया देह दमाई। उत्तम मध्यम क्यूं जाणीजी?, बिबरस देखो लोई। जाके बाद विराम विरांसो सांसो सरसा भोला चालै, ताकै भीतर छोट लकोई। जाके बाद विराम विरांसो सांसो सरसा भोला भागो, ताकै मूले छोट न होई। दिल दिल आप खुदायबंद जायो, सब दिल जायो सोई। जो जिंदो हज काबे जायो, थल सिर जायो सोई। नाम विष्णु के मुसकल खातै, ते काफर सैतानी। हिंदू होय कर तीरथ न्हावै, पिंड भरावै, तेपण रहया इवाणी। जोगी होय कर मूंड मुंडावै, कान चिरावै, गोरख हटड़ी धोके, तेपण रहया इवाणी। तुरकी होय हज काबो धोके, भूला मुसलमाणी। के के पुरुष अवर जागेला, थल जाग्यो निज बाणी। जिहिं कै नादे वेदे शीले शब्दे, लक्ष्मण अंत न पारूं। अंजन मांहि निरंजन आछै, सो गुरु लक्ष्मण कंवारूं।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
मनुष्य चाहे हिंदू हो, मुसलमान हो, योगी हो या किसी अन्य धार्मिक पहचान से जुड़ा हो—केवल तीर्थ-स्नान, हज, पिंडदान, सिर मुंडाना, कान छिदवाना या अन्य बाहरी धार्मिक कर्म ही अंतिम सत्य की प्राप्ति नहीं कराते। परम सत्य प्रत्येक हृदय में विद्यमान है। इसलिए बाहरी धार्मिक पहचान से आगे बढ़कर उस सत्य को अपने भीतर पहचानना आवश्यक है। गुरु इस आंतरिक सत्य की पहचान कराने वाला मार्गदर्शक है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
Whether a person is Hindu, Muslim, Yogi or follows another religious identity, external acts such as pilgrimage, ritual bathing, Hajj, funeral offerings, shaving the head or piercing the ears do not by themselves lead to ultimate realization. The Divine Reality is present within every heart. Therefore, one must move beyond external religious identity and recognize that truth within. The Guru guides the seeker toward this inner realization.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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