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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #46 • राग: Raag Sorath

शब्द 46 — शब्द 46: जिहिं जोगी के मनही मुद्रा

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—जिहिं जोगी के मनही मुद्रा, तनही कंथा पिंडै अगन थंभायो। जिहिं जोगी की सेवा कीजै, तूठो भवजल पार लंघावे। नाथ कहावे मर मर जावे, से क्यूं नाथ कहावे। नांही मोटी जीवा जूंणी, निरजत सिरजत फिर फिर पूछ्या आवै। हमहीं रावल हमहीं जोगी, हम राजा के रायों। जो ज्यूं आवै सो त्यूं थरपां, साचां सूं सत भायो। पाप न छिपां पुण्य न हारां, करां न करतब लावां बारूं। जीव तड़ै को रिजक न मेटूं, मूवा परहथ सारूं। दोरै भिस्त विचालै ऊभा, मिलिया काम सवारूं।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
सच्चे योगी के लिए योग बाहरी मुद्रा या वस्त्र नहीं, बल्कि उसकी आंतरिक अवस्था है। गुरु की सेवा और सही साधना मनुष्य को संसाररूपी भवसागर से पार जाने की दिशा देती है। सत्य का आचरण ऐसा होना चाहिए जिसमें पाप को छिपाने का प्रयास न हो, पुण्य का अहंकार न हो और जीव के जीवन-निर्वाह को नष्ट न किया जाए।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
For the true Yogi, Yoga is not merely an external posture or garment but an inner state. Service to the Guru and sincere spiritual practice provide the direction for crossing the ocean of worldly existence. Righteous conduct means neither concealing wrongdoing nor taking pride in virtue, while respecting the sustenance and life of living beings.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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