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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #5 • राग: Raag Bhairav

शब्द 5 — शब्द 5: अइया लो अपरंपर बाणी

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—अइया लो अपरंपर बाणी, म्हे जपां न जाया जीऊं। नवअवतार नमोनारायण, तेपण रूप हमारा थीयूं। जती तपी तक पीर ऋषेश्वर, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं। खेचर भूचर खेपाला परगट गुस्सा, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं। वासंग शेष गुगिंदा फूणिंदा, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं। चौसठ जोगिन बावन वीरूं, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं। जपां तो एक निरालंभ शंभू, जिहिं कै माई न पीऊं। न तन रकूं, न तन धातूं, न तन ताव न सीऊं। सर्व सिरजत, मरत बिवरजत, तासूं मूलज लेहां कीयूं। अइयालों अपरंपर बाणी, म्हे जपां न जाया जीऊं।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
यहाँ अनंत और अपरंपार सत्ता की वाणी का वर्णन है। अनेक रूपों, अवतारों, योगियों, ऋषियों और देव-परंपराओं के बीच साधक उस एक निरालंब, मूल और सर्वोच्च सत्ता की ओर संकेत करता है। वह सत्ता किसी एक शरीर, जाति, रूप या भौतिक सीमा में बंधी नहीं है। समस्त सृष्टि की उत्पत्ति और परिवर्तन उसी मूल सत्य के संदर्भ में समझे जाते हैं।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
This Shabd speaks of the infinite and boundless Divine Reality. Amid countless forms, incarnations, sages, yogis and divine traditions, the seeker points toward the one fundamental, independent and supreme reality. That reality is not confined to a particular body, form or physical limitation. The origin and transformation of creation are understood in relation to this fundamental truth.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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