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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #30 • राग: Raag Bilawal

शब्द 30 — शब्द 30: कूं ची वाला शब्द (आयो हुंकारो जीवड़ो बुलायो)

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—आयो हुंकारो जीवड़ो बुलायो, कह जीवड़ा कै करण कमायो। थरहर कंपै जीवड़ो डोलै, उत माई पीव न कोई बोलै। सुकृत साथ सगाई चालै, स्वामी! पवणा पाणी नवण करतों, चंदे सूरे शीश निवंतो, विष्णु सुरां पोह पूछ लहंतो। इहिं खोटे जन मंतर स्वामी, अहनिश तेरो नाम जपतों। निगम कमाई मांगी मांग, सुरपति साथ सुरा सू रंग। सुरपति साथ सुरां सूं मेलो, निज पोह खोज ध्याइये। भोम भली कृष्ण भी भला, बूढ़ो है जहां बाहिये। करषण करो सनेही खेती, तिसिया साख निपायिये। लुणचुण लीयो मुरा तब कीयो, कण काजे खड़ गाहिये। कणतुस झेड़ो होय नवैड़ो, गुरुमुख पवण उड़ाइये। पवणा डोले तुस डुलेलो, कपले अर्थ लगाइये। यूं क्यों भलो जे आप न जरीये, औरां अजुर जराइये। यूं क्यों भलो जे आप न फरिये, औरां अजुर फराइये।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
मनुष्य को अपने जीवन और कर्मों का विचार करना चाहिए। जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्म साथ चलते हैं। केवल बाहरी पूजा या मंत्र-जप पर्याप्त नहीं; व्यक्ति को अपने कर्म, खेती, श्रम, व्यवहार और दूसरों के प्रति अपने आचरण को भी शुद्ध करना चाहिए। अपने लिए जो उचित नहीं है, वह दूसरों के लिए भी नहीं करना चाहिए। यही आत्म-जांच और नैतिक जीवन का आधार है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
A person should reflect upon life and one's own actions. The consequences of good and bad actions accompany the individual. External worship or repetition of sacred words alone is not enough; one's work, conduct, relationships and treatment of others must also be righteous. What one would not wish for oneself should not be imposed upon others. Such self-reflection and ethical conduct form an important foundation of spiritual life.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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