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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #4 • राग: Raag Bhairav

शब्द 4 — शब्द 4: जद पवन न होता

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—जद पवन न होता, पाणी न होता, न होता धर गैंदारूं। चंदन न होता, सूर न होता, न होता गिंगदर तारूं। गऊ न गौरू माया जाल न होता, न होता हेत पियारूं। माय न बाप न बहण न भाई, साख न सैण न होता, न होता पख परवारूं। लख चौरासी जीया जूणी न होती, न होती वणीं अठारा भारूं। सप्त पाताल फूंगींद न होता, न होता सागर खारूं। अजिया सजिया जीया जूणी न होती, न होती कुड़ी भरतारूं। अर्थ न गर्थ न गर्व न होता, न होता तेजी तुरंग तुखारूं। हाट पटण बाजार न होता, न होता राज दवारूं। चाव न चहन न कोह का बांध न होता, तद होता एक निरंजन शंभू, कै होता धंधे कारूं। बात कदो की पूछै लोई, जुग छत्तीस बिचारूं। ताह परैरे अवर छत्तीसूं, पहला अंत न पारूं। म्हे तदपण होता, अब पण आछै, बल-बल होयसा, कह कद कद का करूं विचारूं।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
यह शब्द सृष्टि के अस्तित्व और उसके मूल स्वरूप पर विचार करता है। यदि वायु, जल, सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी, जीव-जंतु, परिवार और संसार की विविधता न होती तो यह दिखाई देने वाला संसार भी नहीं होता। सभी परिवर्तनशील वस्तुओं के पीछे एक निराकार और मूल सत्ता की ओर संकेत किया गया है। मनुष्य संसार की उत्पत्ति और उसकी अनंतता को पूरी तरह समझने में सीमित है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
This Shabd reflects upon existence and the origins of the manifested world. Without air, water, the sun, moon, earth, living beings, relationships and the many forms of creation, the visible world would not exist. Behind all these changing forms lies the reference to a formless and fundamental reality. Human understanding remains limited when attempting to comprehend the vastness and origins of existence.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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