Skip to main content
विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #29 • राग: Raag Bilawal

शब्द 29 — शब्द 29: इलोल सागर (गुरु कै शब्द असंख्य प्रबोधी)

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—गुरु कै शब्द असंख्य प्रबोधी, खारसमंद परीलो। खारसमंद परै परै, चोखड़ खारूं, पहला अंत न पारूं। अनंत करोड़ गुरु की दावण बिलंबी, करणी सांच तरीलो। सांझे जमों सबेरे थापण, गुरु की नाथ डरिलो। भगवीं टोपी थल शिर आयो, हेत मिलाण करी लो। अंबाराय बधाई बाजै, हृदय हरि सिंवरिलो। कृष्ण माया चोखड़ कृषाणी, जंबू दीप चरिलो। जंबूद्वीप ऐसो चर आयो, इसकंदर चेतायो। मान्यो शील हकीकत जाग्यो, हक की रोजी धायो। ऊंनथ नाथ कुफह का पोहमा आग्या, पोहका धुर पहुंचायो। मोरै धरती ध्यान बनस्पति वासो, ओजूं मंडल छायो। गीदड़ मेर पगां पै पर्वत, मनसा छोड़ तुलायो। एजुग चार छत्तीसां और छत्तीसां। आसरा बहै अंधारी, म्हे तो खड़ा बिहायो। तेतीसां की बरग बहां म्हे, बारां काजे आयो। बारां थाप घणा न ठाहर, मतांतो डीले डीले कोड़ रचायो। म्हे ऊंचे मंडल का रायो। समंद बिरोल्यो बासंग नेतो, मेर मथांगी थायो। संसा अर्जुन मारयो कारज सारयो, जद म्हे रहस दामामा बायो। फेरी सीत लई जद लंका, तद म्हे ऊंचे थायो। दस सिर का दस मस्तक छेदा, बाण भला निरतायो। होजी नाहीं, लह लह खेलत जायों। कंसा सुरसूं जुवै रमियां, सहजै नंद हरायों। कूंत कुंवारी कर्ण समानो, तिहिंका पोह पोह पड़दा छायों। पाहे लाख मजीठी पाखो, बन फल राता पींजू, पाणी के रंग धायों। तेपण चाखण चाख्या, भाखण भाख्या। जोय जोय लियो फल, फल केर रसायों। थे जोग न जोग्या भोग न भोग्या, न चीन्हों सुर रायों। कप बिन कूकस कांय पीसो, निश्चै सरी न काहों। म्हे अबधू निर पख जोगी, सहज नगर का रायों। जो ज्यूं आवै सो त्यूं थरपां, साचा सूं सत भायों। मोरै मनहीं मुद्रा, तनहीं कंथा, जोग मार्ग सहडायों। सात सायर म्हे कुरलै कीयौं, ना म्हे पीया न रह्या तिसायों। डाकण शाकण निंद्रा खुध्या, ये म्हारे तांबे कूप छिपायों। म्हारे मनहीं मुद्रा तनहीं कंथा, जोग मार्ग सह लीयो। डाकण शाकण निंद्रा खुध्या, ऐ मोरे मूल न थीयों।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
यह विस्तृत शब्द गुरु-वाणी की विशालता और साधना के गहरे मार्ग को रूपकों तथा विभिन्न कथात्मक संकेतों के माध्यम से प्रस्तुत करता है। गुरु का शब्द अनंत है और उसकी गहराई को पूरी तरह पार करना कठिन है। इसमें साधक की आंतरिक यात्रा, संसार के मोह से ऊपर उठना, योग के बाहरी प्रतीकों के बजाय भीतर की साधना, मन की मुद्रा और सहज योग जैसे भाव दिखाई देते हैं।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
This extended Shabd presents the vastness of the Guru's word and the depth of the spiritual path through rich imagery and narrative references. The Guru's word is described as immense and difficult to fully comprehend. The Shabd reflects upon the seeker's inner journey, rising above worldly attachment, and the distinction between external symbols of yoga and genuine inner practice. Inner discipline and the state of the mind become central to the spiritual path.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
🌐

संबद्ध जाम्भाणी ज्ञान जाल (Knowledge Graph Connections)

C9.9 Traversal Anchors
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

अनुक्रमणिका (All 120 Shabds)
शबद शेयर करें (Share This Sacred Shabad)
WhatsApp Facebook X (Twitter) Telegram
📡 ऑफलाइन मोड सक्रिय (Offline Mode Active) आपातकालीन नंबर →