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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #3 • राग: Raag Bhairav

शब्द 3 — शब्द 3: मोरे अंग न अलसी

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—मोरे अंग न अलसी, तेल न मलियो, ना परमल पीसियां। जीमत पीवत भोगत बिलसत दीसां नाहीं, म्हापण को आधरूं। अड़सठ तीरथ हिरदा भीतर, बाहर लोका चारूं। नांहिं मोटी जीया जूणी, एती सांस फुरंतै सारूं। बासंदर क्यूं एक भणीजे, जिहिं कै पवन पिराणों। आला सूका मेल्है नाहीं, जिहिं दिशा करै मुहाणों। पापे गुनहे वीहे नाहीं, रीस करै रीसाणों। बहुली दौरे लावण हारूं, भावै जाण मैं जाणूं। न तूं सुरनर, न तूं शंकर, न तूं राव न राणों। काचे पिंड अकाज चलावै, म्हा अधूरत दाणों। मोरे छुरी न धारूं, लोह न सारूं न हथियारूं। सूरज को रिप बिहंडा नाहीं, ताते कहां उठावत भारूं। जिहिं हाकणड़ी बलद जू हाके, न लोहै की आरूं।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
मनुष्य को केवल बाहरी तीर्थ, आडंबर और शारीरिक सजावट में सत्य नहीं खोजना चाहिए। वास्तविक तीर्थ हृदय के भीतर है। जीवन क्षणभंगुर है और शरीर नश्वर है, इसलिए आत्मिक सत्य की खोज आवश्यक है। साधक को हिंसा, क्रोध, अहंकार और बाहरी शक्ति के प्रदर्शन से दूर रहना चाहिए। जीवन का उद्देश्य केवल शरीर को चलाना या भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि भीतर के सत्य को पहचानना है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
One should not seek spiritual truth merely through external rituals, bodily adornment or pilgrimage. The true sacred place is within the heart. Life is transient and the physical body is impermanent; therefore, the seeker should search for inner truth. The aspirant should remain free from violence, anger, ego and the display of worldly power. The purpose of life is not merely to sustain the body or pursue material pleasure, but to recognize the deeper spiritual reality within.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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