Skip to main content
विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #15 • राग: Raag Sorath

शब्द 15 — शब्द 15: सुरमा लेगण झीणां शब्दूं

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—सुरमा लेगण झीणां शब्दूं, म्हे भूल न भाख्या थूंलूं। सो पति बिरछा सींच प्राणी, जिहिंका मीठा मूल समूलूं। पाते भूला मूल न खोजे, सींचै कांय कु मूलूं। विष्णु-विष्णु भण अजर जरीजे, यह जीवन का मूलूं। खोज प्राणी ऐसा बिनाणी, केवल ज्ञानी, ज्ञान गहींरूं। जिहिं कै गुणे न लाभत छेहूं, गुरु गेंवर गरवा शीतल नीरूं। मेवा ही अति मेड़ूं। हृदयै मुक्ता कमल संतोषी, टेवा ही अति तेजूं। चढ़ कर बोहितां भव जल पार लंघावे, सो गुरु खेवर खेवा खेहूं।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
मनुष्य को जीवन के मूल को खोजना चाहिए। जैसे वृक्ष को केवल पत्तों से नहीं, बल्कि उसकी जड़ों को सींचने से पोषण मिलता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक जीवन का मूल भीतर के ज्ञान और साधना में है। सच्चा गुरु उस नाविक के समान है जो संसाररूपी भवसागर को पार कराने में मार्गदर्शन करता है। संतोष, ज्ञान और गुरु की शीतल वाणी साधक के जीवन को दिशा देती है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
A person should seek the root of life. Just as a tree is nourished by watering its roots rather than merely its leaves, spiritual life must be nourished at its inner foundation through knowledge and practice. The true Guru is like a boatman who guides the seeker across the ocean of worldly existence. Contentment, wisdom and the Guru's cooling guidance provide direction to the spiritual seeker.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

अनुक्रमणिका (All 120 Shabds)
शबद शेयर करें (Share This Sacred Shabad)
WhatsApp Facebook X (Twitter) Telegram
📡 ऑफलाइन मोड सक्रिय (Offline Mode Active) आपातकालीन नंबर →