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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #27 • राग: Raag Bilawal

शब्द 27 — शब्द 27: पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं, पढ़ सुन रहिया, कछु न लहिया। नुगरा उमंग्या, काठ पखाणो, कागल पोथा ना कछु थोथा, ना कछु गाया गीऊं। किण दिशा आवै, किण दिशा जावै, माई लखे न पीऊं। इण्डे मध्ये पिंड उपना, पिंडा मध्ये बिंब उपना, किण दिस पैठा जीऊं। इण्डा मध्ये जीव उपना। सुपणे काजी, सुपणे मुल्लां, पीर ऋषेश्वर रेमस वासी, तीरथ वासी किण घट पैठा जीऊं। कंसा शब्दे कंस लुकाई, बाहर गई न रीऊं। क्षिण आवै, क्षिण बाहर जावै, रूत कर बरसत सीऊं। सोवन लंक मंदोदरी काजे, जोय-जोय भेद विभीषण दीयो।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
केवल वेद, शास्त्र और पुस्तकों को पढ़ते रहना पर्याप्त नहीं है यदि उनके ज्ञान का वास्तविक अनुभव नहीं हुआ। शरीर और जीवन के भीतर स्थित चेतना के मूल को पहचानना आवश्यक है। यह शब्द बाहरी ज्ञान और आंतरिक अनुभूति के अंतर पर विचार करता है। ज्ञान तभी सार्थक है जब वह जीवन के वास्तविक रहस्य को समझने में सहायता करे।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
Merely reading the Vedas, scriptures and books is not sufficient if their deeper truth is not experienced. One must seek to understand the source of consciousness within the body and life. This Shabd reflects upon the difference between external learning and inner realization. Knowledge becomes meaningful when it helps the seeker understand the deeper mystery of existence.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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