शब्दवाणी — 120 Sacred Shabds
सत्य, धर्म, करुणा, जीव-दया एवं पर्यावरण संरक्षण के पावन अमर उपदेश। मूल शब्दवाणी अपरिवर्तनीय सुरक्षित, हिन्दी भावार्थ एवं English translation सहित।
शब्द 71: शब्द 71: धवणा धूजै पाहण पूजै बे फरमाई खुदाई
ओ३म्-धवणा धूजै पाहण पूजै बे फरमाई खुदाई, गुरू के चेले के पाए लागै देखो लोग अन्हयायी। काठी कणजो रूपा रेहण, कापड़ मांह छिपाई। नीचा पड़ पड़ तानैं धोकें, धीरा रे हरि आई। ब्राह्मण नाऊं लादण रूड़ा, बूता नाऊं कूता। वै अपहानै पोह बत...
शबद संख्या 71 में गुरु जम्भेश्वर जी जोगियों, सिद्धों और बाह्य भेष धारियों को सच्चा योग समझाते हैं। वे सिखाते हैं कि कान छिदवाना, भभूत मलना या वन-कंदराओं में भटकना योग नहीं है, अपितु मन के विकारों को वश में करना और जीव दय...
शबद क्रमांक चयन (Shabd 1 to 120 Navigator)
शब्द 11 — शब्द 11: दिल साबित हज काबो नेड़ो (सीने सरवर)
इबादत का मूल्य केवल बाहरी कर्मकांड में नहीं, बल्कि हृदय और कर्म की शुद्धता में है।
शब्द 12 — शब्द 12: महंमद-महंमद न कर काजी
नाम-स्मरण के साथ उसके मूल आचरण और नैतिक संदेश को जीवन में उतारना आवश्यक है।
शब्द 13 — शब्द 13: कांयरे मुरखा, तैं जन्म गुमायों
जीवन क्षणभंगुर है—सत्य और गुरु के मार्ग को समय रहते पहचानना चाहिए।
शब्द 14 — शब्द 14: मोरा उपख्यान वेदूं
पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर ज्ञान को चरित्र और आचरण में उतारना आवश्यक है।
शब्द 61 — शब्द 61: कैतैं कारण किरिया चू यो,
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
शब्द 73 — शब्द 73: हरी कंकेहड़ी मंडप मैड़ी जहां
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
शब्द 85 — शब्द 85: भोम भली कृषाण भी भला,
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
शब्द 97 — शब्द 97: विष्णु विष्णु तूं भण रे प्राणी
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
शब्द 109 — शब्द 109: देखत भूली को मनमानै
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।