शब्दवाणी — 120 Sacred Shabds
सत्य, धर्म, करुणा, जीव-दया एवं पर्यावरण संरक्षण के पावन अमर उपदेश। मूल शब्दवाणी अपरिवर्तनीय सुरक्षित, हिन्दी भावार्थ एवं English translation सहित।
शब्द 72: शब्द 72: वेद कुराण कुमाया जालूं
ओ३म्-वेद कुराण कुमाया जालूं, भूला जीव कुजीव कुजाणी। बसंदर नहीं नख हीरूं, धर्म पुरूष सिरजीवै पूरूं। कलि का माया जाल फिटाकर प्राणी, गुरू की कलम कुरांण पिछांणी। दींन गुमान करैलो ठाली, यूं कण घातै घुण हांणी। साच सिदक शैतान च...
शबद संख्या 72 में गुरु जम्भेश्वर जी धार्मिक पाखंड, बाह्य कर्मकांड और मूक प्राणियों पर होने वाली क्रूरता का कड़ा विरोध करते हैं। वे स्पष्ट उपदेश देते हैं कि परमात्मा के दरबार में दया, सत्य, पवित्र आचरण और ईमानदारी ही सच्च...
शबद क्रमांक चयन (Shabd 1 to 120 Navigator)
शब्द 25 — शब्द 25: राज न भूलीलो, राजेंद्र
संसार की संपत्ति और सत्ता क्षणभंगुर हैं; सत्य की खोज ही स्थायी आध्यात्मिक दिशा है।
शब्द 26 — शब्द 26: घण तण जीम्या, को गुण नाहीं
कुल, प्रतिष्ठा और बाहरी पहचान नहीं—कर्म, चेतना और आचरण मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं।
शब्द 27 — शब्द 27: पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं
पुस्तक पढ़ना ज्ञान की शुरुआत है; वास्तविक ज्ञान आत्म-अनुभूति से पूर्ण होता है।
शब्द 28 — शब्द 28: मछली मच्छ फिरै जल भीतर
परम तत्व असीम है; उसे केवल बाहरी रूप या सीमाओं से नहीं समझा जा सकता।
शब्द 29 — शब्द 29: इलोल सागर (गुरु कै शब्द असंख्य प्रबोधी)
गुरु-वाणी की गहराई अनंत है; वास्तविक योग बाहरी प्रतीकों से अधिक आंतरिक साधना और सहज अवस्था में है।
शब्द 30 — शब्द 30: कूं ची वाला शब्द (आयो हुंकारो जीवड़ो बुलायो)
अपने कर्मों को शुद्ध करो और दूसरों के साथ वही व्यवहार करो जो अपने लिए उचित समझते हो।
शब्द 66 — शब्द 66: ऊमाज गुमाज पंज गंज यारी
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
शब्द 78 — शब्द 78: नवै पोल नवै दरवाजा
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
शब्द 90 — शब्द 90: चोईस चेड़ा कालिंग केड़ा
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
शब्द 102 — शब्द 102: विष्णु विष्णु भण अजर जरीजै,
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
शब्द 114 — शब्द 114: सुरनर तणो सन्हदेसो आयो
धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।