विश्नोई संत परंपरा एवं जांभाणी साहित्य
गुरु जम्भेश्वर भगवान के 140 हरजस संग्रह (6 प्रधान संत-कवि एवं 28 अप्रमाणित पांडुलिपि पद), शबदवाणी, जम्भसागर एवं ऐतिहासिक संत साहित्य का अकादमिक संदर्भ कोष।
हरजस परंपरा के 6 प्रमाणित मुख्य संत-कवि
डॉ. हीरालाल महेश्वरी एवं डॉ. कृष्णलाल के शोध द्वारा 140 हरजस संग्रह में से इन 6 प्रमुख कवियों के 112 पदों की प्रामाणिक पहचान पुष्ट है।
संत वील्होजी
Sant Vilhoji
संत वील्होजी जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। “वील्होजी की वाणी” में अनेक कथात्मक और पद्य रचनाएँ संकलित हैं; उपलब्ध अकादमिक अध्ययन इनके 20 हरजस आठ रागों में बताता है।
Surjanji Punia
सुरजनदास जी पूनियां
Surjanji Punia
सुरजनदास पूनियां जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। अकादमिक अध्ययन 1993 के हरजस-संग्रह में इनके 48 हरजस दस रागों में दर्ज करता है।
Sant Keshavdasji Godara
संत केशवदासजी गोदारा
Sant Keshavdasji Godara
गोदारा गोत्र में जन्मे संत केशवदासजी (केशोजी) 17 अमर हरजस पदों के रचयिता हैं। हरजस परंपरा में उनका तीसरा स्थान है। उनकी रचनाओं में गुरु भक्ति के साथ-साथ जांभाणी पंथ के प्रारंभिक इतिहास और संतों के त्याग की प्रेरक गाथाएं मिलती हैं।
Sant Kalyanji
संत कल्याणजी
Sant Kalyanji
संत कल्याणजी 12 पावन हरजस पदों के रचयिता हैं। उनके पदों में गेयता, शास्त्रीय राग-रागिनियों का प्रवाह और लोक कल्याण की उदात्त भावना दृष्टिगोचर होती है। वे गुरु वचनों और जीव रक्षा को मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य बताते हैं।
Sant Govindji
संत गोविंदजी
Sant Govindji
संत गोविंदजी 9 प्रामाणिक हरजस पदों के रचनाकार हैं। उनके पदों में गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए भी निष्काम भक्ति और नैतिक पवित्रता बनाए रखने का सरल और प्रभावशाली उपदेश है।
Sant Santoji
संत संतोजी
Sant Santoji
संत संतोजी 6 पावन हरजस पदों के रचनाकार हैं। उनके काव्य में संतोष, समभाव और पावन तीर्थों (समराथल व जांभोलाव) की महिमा का सुंदर वर्णन मिलता है। वे षट्कवियों की पावन परंपरा के छठे प्रमुख हस्ताक्षर हैं।
28 अप्रमाणित/गुमनाम पांडुलिपि हरजस (लगभग 21 अनिर्णीत कवि)
साहित्य अकादमी व शोध अध्ययनों के अनुसार, 140 हरजस संग्रह में से 112 पद उपर्युक्त 6 प्रधान कवियों के हैं। शेष 28 हरजस प्राचीन हस्तलिखित पोथियों में बिना स्पष्ट रचनाकार नाम अथवा विवादास्पद भणिताओं के साथ मिलते हैं। हमारा शोध कोष अकादमिक सत्यनिष्ठा बनाए रखते हुए काल्पनिक नाम नहीं जोड़ता, अपितु इस 28-पद समूह को अनिर्णीत पांडुलिपि धरोहर के रूप में सुरक्षित रखता है।
प्रमुख संत, इतिहासकार एवं शिष्य परंपरा
जम्भसागर के रचयिता संत साहिबरामजी, उदोजी, खमाईजी एवं विश्नोई परंपरा के अन्य तपस्वी संत।
संत खमाईजी
Sant Khamaiji
संत खमाईजी ने नीतिपरक साखियों और भजनों की रचना की जो मारवाड़ और बीकानेर के सत्संगों में लोकप्रिय हैं।
संत धीराजी
Sant Dhiraji
संत धीराजी ने धैर्य, निष्ठा और 29 नियमों की महत्ता पर प्रेरक दोहों की रचना की।
केसोजी गोदारा
Kesoji Godara
केसोजी गोदारा जाम्भाणी साहित्य के रचनाकार हैं। अकादमिक अध्ययन इन्हें संत वील्होजी के साहित्यिक परंपरा से जोड़ता है और 1993 के हरजस-संग्रह में इनके 13 हरजस दर्ज करता है।
सुरजनदास जी पूनियां
Surjanji Punia
सुरजनदास पूनियां जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। अकादमिक अध्ययन 1993 के हरजस-संग्रह में इनके 48 हरजस दस रागों में दर्ज करता है।
संत भादाजी
Sant Bhadaji
संत भादाजी जांभाणी भजन परंपरा के आदरणीय संत-कवि हैं।
संत तनुजी
Sant Tanuji
संत तनुजी ने आत्म-संयम, इंद्रिय निग्रह और दया पर आधारित दोहों की रचना की।
परमानंदजी बनियाल
Parmanandji Banial
परमानंदजी बनियाल जाम्भाणी साहित्य के रचनाकार हैं। अकादमिक अध्ययन इनके छह हरजस तीन रागों में दर्ज करता है और “परमानंद जी का पोथा” को वील्होजी की वाणी के आधार-पांडुलिपि स्रोत के रूप में पहचानता है।
संत परमानंदजी
Sant Parmanandji
संत परमानंदजी ने मुक्तिधाम मुकाम और गुरु महिमा पर शास्त्रीय डिंगल छंदों की रचना की।
तेजोजी चारण
Tejoji Charan
समुदाय-प्रकाशित जाम्भाणी साखी सूची में यह नाम कवि के रूप में दर्ज है और इस प्रविष्टि से 1 साखी जोड़ी गई है। इसे साहित्यिक attribution के रूप में लें; जीवन-वर्ष और विस्तृत जीवन-वृत्त की पुष्टि नहीं की गई है।
समसदीन जी
Samsuddin Ji
समुदाय-प्रकाशित जाम्भाणी साखी सूची में यह नाम कवि के रूप में दर्ज है और इस प्रविष्टि से 3 साखी जोड़ी गई हैं। इसे साहित्यिक attribution के रूप में लें; जीवन-वर्ष और विस्तृत जीवन-वृत्त की पुष्टि नहीं की गई है।
आंछरे जी
Aanchhre Ji
समुदाय-प्रकाशित जाम्भाणी साखी सूची में यह नाम कवि के रूप में दर्ज है और इस प्रविष्टि से 1 साखी जोड़ी गई है। इसे साहित्यिक attribution के रूप में लें; जीवन-वर्ष और विस्तृत जीवन-वृत्त की पुष्टि नहीं की गई है।
सुरजन जी (प्रारम्भिक कवि)
Surjan Ji (early poet)
समुदाय-प्रकाशित जाम्भाणी साखी सूची में यह नाम कवि के रूप में दर्ज है और इस प्रविष्टि से 1 साखी जोड़ी गई है। इसे साहित्यिक attribution के रूप में लें; जीवन-वर्ष और विस्तृत जीवन-वृत्त की पुष्टि नहीं की गई है।