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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
📜 संत परंपरा एवं हरजस साहित्य

विश्नोई संत परंपरा एवं जांभाणी साहित्य

गुरु जम्भेश्वर भगवान के 140 हरजस संग्रह (6 प्रधान संत-कवि एवं 28 अप्रमाणित पांडुलिपि पद), शबदवाणी, जम्भसागर एवं ऐतिहासिक संत साहित्य का अकादमिक संदर्भ कोष।

112 प्रमाणित हरजस
6 मुख्य संत-कवि
140 कुल हरजस संग्रह
59 संत-महापुरुष
प्रामाणिक हरजस परंपरा

हरजस परंपरा के 6 प्रमाणित मुख्य संत-कवि

डॉ. हीरालाल महेश्वरी एवं डॉ. कृष्णलाल के शोध द्वारा 140 हरजस संग्रह में से इन 6 प्रमुख कवियों के 112 पदों की प्रामाणिक पहचान पुष्ट है।

112 / 140 पद प्रमाणित
Sant Vilhoji
🎵 44 हरजस

संत वील्होजी

Sant Vilhoji

प्रधान जांभाणी संत-कवि; 44 हरजस, कथा जम्भदेव जी की एवं पावन आरती के रचयिता

संत वील्होजी जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। “वील्होजी की वाणी” में अनेक कथात्मक और पद्य रचनाएँ संकलित हैं; उपलब्ध अकादमिक अध्ययन इनके 20 हरजस आठ रागों में बताता है।

🌱 जन्म स्थली: रंसी गांव (Jodhpur)
साहित्य रचनाएं (24)
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस कथा जम्भदेव जी की (जम्भ चरित्र) +22
✓ प्रामाणिक स्रोत वाणी एवं जीवन परिचय
संत परंपरा एवं साहित्य

Surjanji Punia

🎵 24 हरजस

सुरजनदास जी पूनियां

Surjanji Punia

प्रमुख हरजस रचयिता; 24 शास्त्रीय एवं रहस्यवादी भक्ति पदों के रचनाकार

सुरजनदास पूनियां जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। अकादमिक अध्ययन 1993 के हरजस-संग्रह में इनके 48 हरजस दस रागों में दर्ज करता है।

साहित्य रचनाएं (3)
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस सुरजनजी हरजस संग्रह (24 भक्ति पद) +1
✓ प्रामाणिक स्रोत वाणी एवं जीवन परिचय
संत परंपरा एवं साहित्य

Sant Keshavdasji Godara

🎵 17 हरजस 16th Century AD — 17th Century AD

संत केशवदासजी गोदारा

Sant Keshavdasji Godara

प्रमुख हरजस रचयिता एवं कथाकार; 17 भक्तिमय हरजस एवं आख्यानों के रचयिता

गोदारा गोत्र में जन्मे संत केशवदासजी (केशोजी) 17 अमर हरजस पदों के रचयिता हैं। हरजस परंपरा में उनका तीसरा स्थान है। उनकी रचनाओं में गुरु भक्ति के साथ-साथ जांभाणी पंथ के प्रारंभिक इतिहास और संतों के त्याग की प्रेरक गाथाएं मिलती हैं।

साहित्य रचनाएं (1)
केशवदासजी हरजस संग्रह (17 भक्ति पद)
✓ प्रामाणिक स्रोत वाणी एवं जीवन परिचय
संत परंपरा एवं साहित्य

Sant Kalyanji

🎵 12 हरजस 16th Century AD — 17th Century AD

संत कल्याणजी

Sant Kalyanji

प्रमुख हरजस रचयिता; 12 भक्ति एवं अहिंसा परक पदों के रचनाकार

संत कल्याणजी 12 पावन हरजस पदों के रचयिता हैं। उनके पदों में गेयता, शास्त्रीय राग-रागिनियों का प्रवाह और लोक कल्याण की उदात्त भावना दृष्टिगोचर होती है। वे गुरु वचनों और जीव रक्षा को मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य बताते हैं।

साहित्य रचनाएं (1)
कल्याणजी हरजस संग्रह (12 भक्ति पद)
✓ प्रामाणिक स्रोत वाणी एवं जीवन परिचय
संत परंपरा एवं साहित्य

Sant Govindji

🎵 9 हरजस 16th Century AD — 17th Century AD

संत गोविंदजी

Sant Govindji

प्रमुख हरजस रचयिता; नैतिक सत्य एवं वैराग्य पर आधारित 9 हरजस पदों के रचयिता

संत गोविंदजी 9 प्रामाणिक हरजस पदों के रचनाकार हैं। उनके पदों में गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए भी निष्काम भक्ति और नैतिक पवित्रता बनाए रखने का सरल और प्रभावशाली उपदेश है।

साहित्य रचनाएं (1)
गोविंदजी हरजस संग्रह (9 भक्ति पद)
✓ प्रामाणिक स्रोत वाणी एवं जीवन परिचय
संत परंपरा एवं साहित्य

Sant Santoji

🎵 6 हरजस 16th Century AD — 17th Century AD

संत संतोजी

Sant Santoji

प्रमुख हरजस रचयिता; 6 पावन भक्ति पदों के रचनाकार

संत संतोजी 6 पावन हरजस पदों के रचनाकार हैं। उनके काव्य में संतोष, समभाव और पावन तीर्थों (समराथल व जांभोलाव) की महिमा का सुंदर वर्णन मिलता है। वे षट्कवियों की पावन परंपरा के छठे प्रमुख हस्ताक्षर हैं।

साहित्य रचनाएं (1)
संतोजी हरजस संग्रह (6 भक्ति पद)
✓ प्रामाणिक स्रोत वाणी एवं जीवन परिचय
📜 अकादमिक पांडुलिपि स्तर Dr. Hira Lal Maheshwari (1972) & Dr. Krishna Lal Bishnoi

28 अप्रमाणित/गुमनाम पांडुलिपि हरजस (लगभग 21 अनिर्णीत कवि)

साहित्य अकादमी व शोध अध्ययनों के अनुसार, 140 हरजस संग्रह में से 112 पद उपर्युक्त 6 प्रधान कवियों के हैं। शेष 28 हरजस प्राचीन हस्तलिखित पोथियों में बिना स्पष्ट रचनाकार नाम अथवा विवादास्पद भणिताओं के साथ मिलते हैं। हमारा शोध कोष अकादमिक सत्यनिष्ठा बनाए रखते हुए काल्पनिक नाम नहीं जोड़ता, अपितु इस 28-पद समूह को अनिर्णीत पांडुलिपि धरोहर के रूप में सुरक्षित रखता है।

✓ कुल हरजस: 140 पद
✓ 6 नाम-युक्त कवि: 112 पद
✓ पांडुलिपि शेष: 28 पद (21 गुमनाम कवि)
🏛️ 28 / 140 पांडुलिपि हरजस शोध जारी • अनिर्णीत

प्रमुख संत, इतिहासकार एवं शिष्य परंपरा

जम्भसागर के रचयिता संत साहिबरामजी, उदोजी, खमाईजी एवं विश्नोई परंपरा के अन्य तपस्वी संत।

59 प्रविष्टियां
संत / तपस्वी 16th–17th Century AD — 17th Century AD

संत खमाईजी

Sant Khamaiji

साखीकार एवं भक्ति पदों के रचनाकार

संत खमाईजी ने नीतिपरक साखियों और भजनों की रचना की जो मारवाड़ और बीकानेर के सत्संगों में लोकप्रिय हैं।

संत / तपस्वी 17th Century AD — 17th Century AD

संत धीराजी

Sant Dhiraji

साखी एवं आध्यात्मिक दोहों के रचनाकार

संत धीराजी ने धैर्य, निष्ठा और 29 नियमों की महत्ता पर प्रेरक दोहों की रचना की।

साहित्यिक योगदानकर्ता

केसोजी गोदारा

Kesoji Godara

केसोजी गोदारा जाम्भाणी साहित्य के रचनाकार हैं। अकादमिक अध्ययन इन्हें संत वील्होजी के साहित्यिक परंपरा से जोड़ता है और 1993 के हरजस-संग्रह में इनके 13 हरजस दर्ज करता है।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (1)
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस
संत / तपस्वी

सुरजनदास जी पूनियां

Surjanji Punia

प्रमुख हरजस रचयिता; 24 शास्त्रीय एवं रहस्यवादी भक्ति पदों के रचनाकार

सुरजनदास पूनियां जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। अकादमिक अध्ययन 1993 के हरजस-संग्रह में इनके 48 हरजस दस रागों में दर्ज करता है।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (3)
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस सुरजनजी हरजस संग्रह (24 भक्ति पद) +1
संत / तपस्वी 17th Century AD — 17th Century AD

संत भादाजी

Sant Bhadaji

भक्ति पद एवं भजन रचयिता

संत भादाजी जांभाणी भजन परंपरा के आदरणीय संत-कवि हैं।

संत / तपस्वी 17th Century AD — 17th Century AD

संत तनुजी

Sant Tanuji

वैराग्य एवं अहिंसा के संत-कवि

संत तनुजी ने आत्म-संयम, इंद्रिय निग्रह और दया पर आधारित दोहों की रचना की।

साहित्यिक योगदानकर्ता

परमानंदजी बनियाल

Parmanandji Banial

परमानंदजी बनियाल जाम्भाणी साहित्य के रचनाकार हैं। अकादमिक अध्ययन इनके छह हरजस तीन रागों में दर्ज करता है और “परमानंद जी का पोथा” को वील्होजी की वाणी के आधार-पांडुलिपि स्रोत के रूप में पहचानता है।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (1)
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस
संत साहित्यकार / इतिहासकार 17th–18th Century AD — 18th Century AD

संत परमानंदजी

Sant Parmanandji

डिंगल विद्वान एवं शास्त्रीय संत-कवि

संत परमानंदजी ने मुक्तिधाम मुकाम और गुरु महिमा पर शास्त्रीय डिंगल छंदों की रचना की।

साहित्यिक योगदानकर्ता

तेजोजी चारण

Tejoji Charan

समुदाय-प्रकाशित जाम्भाणी साखी सूची में यह नाम कवि के रूप में दर्ज है और इस प्रविष्टि से 1 साखी जोड़ी गई है। इसे साहित्यिक attribution के रूप में लें; जीवन-वर्ष और विस्तृत जीवन-वृत्त की पुष्टि नहीं की गई है।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (1)
तेजोजी चारण की साखियां (साखी भावार्थ प्रकाश)
साहित्यिक योगदानकर्ता

समसदीन जी

Samsuddin Ji

समुदाय-प्रकाशित जाम्भाणी साखी सूची में यह नाम कवि के रूप में दर्ज है और इस प्रविष्टि से 3 साखी जोड़ी गई हैं। इसे साहित्यिक attribution के रूप में लें; जीवन-वर्ष और विस्तृत जीवन-वृत्त की पुष्टि नहीं की गई है।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (1)
समसदीन जी की साखियां (साखी भावार्थ प्रकाश)
साहित्यिक योगदानकर्ता

आंछरे जी

Aanchhre Ji

समुदाय-प्रकाशित जाम्भाणी साखी सूची में यह नाम कवि के रूप में दर्ज है और इस प्रविष्टि से 1 साखी जोड़ी गई है। इसे साहित्यिक attribution के रूप में लें; जीवन-वर्ष और विस्तृत जीवन-वृत्त की पुष्टि नहीं की गई है।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (1)
आंछरे जी की साखियां (साखी भावार्थ प्रकाश)
साहित्यिक योगदानकर्ता

सुरजन जी (प्रारम्भिक कवि)

Surjan Ji (early poet)

समुदाय-प्रकाशित जाम्भाणी साखी सूची में यह नाम कवि के रूप में दर्ज है और इस प्रविष्टि से 1 साखी जोड़ी गई है। इसे साहित्यिक attribution के रूप में लें; जीवन-वर्ष और विस्तृत जीवन-वृत्त की पुष्टि नहीं की गई है।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (1)
सुरजन जी (प्रारम्भिक कवि) की साखियां (साखी भावार्थ प्रकाश)
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