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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
📜 संत परंपरा एवं हरजस साहित्य

विश्नोई संत परंपरा एवं जांभाणी साहित्य

गुरु जम्भेश्वर भगवान के 140 हरजस संग्रह (6 प्रधान संत-कवि एवं 28 अप्रमाणित पांडुलिपि पद), शबदवाणी, जम्भसागर एवं ऐतिहासिक संत साहित्य का अकादमिक संदर्भ कोष।

112 प्रमाणित हरजस
6 मुख्य संत-कवि
140 कुल हरजस संग्रह
59 संत-महापुरुष

खोज एवं फ़िल्टर परिणाम

जम्भसागर के रचयिता संत साहिबरामजी, उदोजी, खमाईजी एवं विश्नोई परंपरा के अन्य तपस्वी संत।

6 प्रविष्टियां
संत / तपस्वी 16th Century AD — 16th Century AD

संत ऊदोजी

Sant Udoji

आरंभिक तपस्वी संत एवं जांभाणी परंपरा के रचनाकार

संत ऊदोजी जांभाणी पंथ के आरंभिक तपस्वी संतों में प्रमुख हैं। उनके भजन और उपदेश प्रारंभिक हस्तलिखित पोथियों में सुरक्षित हैं।

संत / तपस्वी 16th–17th Century AD — 17th Century AD

संत खमाईजी

Sant Khamaiji

साखीकार एवं भक्ति पदों के रचनाकार

संत खमाईजी ने नीतिपरक साखियों और भजनों की रचना की जो मारवाड़ और बीकानेर के सत्संगों में लोकप्रिय हैं।

संत / तपस्वी 17th Century AD — 17th Century AD

संत धीराजी

Sant Dhiraji

साखी एवं आध्यात्मिक दोहों के रचनाकार

संत धीराजी ने धैर्य, निष्ठा और 29 नियमों की महत्ता पर प्रेरक दोहों की रचना की।

संत / तपस्वी

सुरजनदास जी पूनियां

Surjanji Punia

प्रमुख हरजस रचयिता; 24 शास्त्रीय एवं रहस्यवादी भक्ति पदों के रचनाकार

सुरजनदास पूनियां जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। अकादमिक अध्ययन 1993 के हरजस-संग्रह में इनके 48 हरजस दस रागों में दर्ज करता है।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (3)
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस सुरजनजी हरजस संग्रह (24 भक्ति पद) +1
संत / तपस्वी 17th Century AD — 17th Century AD

संत भादाजी

Sant Bhadaji

भक्ति पद एवं भजन रचयिता

संत भादाजी जांभाणी भजन परंपरा के आदरणीय संत-कवि हैं।

संत / तपस्वी 17th Century AD — 17th Century AD

संत तनुजी

Sant Tanuji

वैराग्य एवं अहिंसा के संत-कवि

संत तनुजी ने आत्म-संयम, इंद्रिय निग्रह और दया पर आधारित दोहों की रचना की।

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