विश्नोई संत परंपरा एवं जांभाणी साहित्य
गुरु जम्भेश्वर भगवान के 140 हरजस संग्रह (6 प्रधान संत-कवि एवं 28 अप्रमाणित पांडुलिपि पद), शबदवाणी, जम्भसागर एवं ऐतिहासिक संत साहित्य का अकादमिक संदर्भ कोष।
खोज एवं फ़िल्टर परिणाम
जम्भसागर के रचयिता संत साहिबरामजी, उदोजी, खमाईजी एवं विश्नोई परंपरा के अन्य तपस्वी संत।
संत ऊदोजी
Sant Udoji
संत ऊदोजी जांभाणी पंथ के आरंभिक तपस्वी संतों में प्रमुख हैं। उनके भजन और उपदेश प्रारंभिक हस्तलिखित पोथियों में सुरक्षित हैं।
संत खमाईजी
Sant Khamaiji
संत खमाईजी ने नीतिपरक साखियों और भजनों की रचना की जो मारवाड़ और बीकानेर के सत्संगों में लोकप्रिय हैं।
संत धीराजी
Sant Dhiraji
संत धीराजी ने धैर्य, निष्ठा और 29 नियमों की महत्ता पर प्रेरक दोहों की रचना की।
सुरजनदास जी पूनियां
Surjanji Punia
सुरजनदास पूनियां जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। अकादमिक अध्ययन 1993 के हरजस-संग्रह में इनके 48 हरजस दस रागों में दर्ज करता है।
संत भादाजी
Sant Bhadaji
संत भादाजी जांभाणी भजन परंपरा के आदरणीय संत-कवि हैं।
संत तनुजी
Sant Tanuji
संत तनुजी ने आत्म-संयम, इंद्रिय निग्रह और दया पर आधारित दोहों की रचना की।