Skip to main content
विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
📜 संत परंपरा एवं हरजस साहित्य

विश्नोई संत परंपरा एवं जांभाणी साहित्य

गुरु जम्भेश्वर भगवान के 140 हरजस संग्रह (6 प्रधान संत-कवि एवं 28 अप्रमाणित पांडुलिपि पद), शबदवाणी, जम्भसागर एवं ऐतिहासिक संत साहित्य का अकादमिक संदर्भ कोष।

112 प्रमाणित हरजस
6 मुख्य संत-कवि
140 कुल हरजस संग्रह
59 संत-महापुरुष

खोज एवं फ़िल्टर परिणाम

जम्भसागर के रचयिता संत साहिबरामजी, उदोजी, खमाईजी एवं विश्नोई परंपरा के अन्य तपस्वी संत।

2 प्रविष्टियां
गुरु / धर्म संस्थापक

गुरु जाम्भेश्वर भगवान

Guru Jambheshwar Bhagwan

गुरु / धर्म संस्थापक 1451 CE (VS 1508) — 1536 CE (VS 1593)

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान

Guru Jambheshwar Ji

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान (1451-1536 ई. / वि.सं. 1508-1593) विश्नोई धर्म के प्रवर्तक एवं आराध्य देव हैं। आपका प्राकट्य भाद्रपद कृष्णा अष्टमी (जन्माष्टमी) को नागौर जिले के पीपासर गांव में पंवार क्षत्रिय ठाकुर लोहटजी एवं माता हंसा देवी के घर हुआ। बाल्यकाल में मौन साधना व अद्भुत ज्ञान के उपरांत वि.सं. 1542 (1485 ई.) की कार्तिक शुक्ला अष्टमी को समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की। आपने 29 पावन नियमों एवं 120 अमृतमयी शब्दों (शबदवाणी) का दिव्य उपदेश दिया, जिसमें अहिंसा, वृक्ष एवं वन्यजीव संरक्षण, सत्य और शुचिता का अद्वितीय संदेश निहित है।

🌱 जन्म स्थली: पीपासर (Nagaur)
🛕 समाधि धाम: मुक्तिधाम मुकाम (निज मंदिर समाधि स्थल)
प्रमुख साहित्य रचनाएं (1)
शबदवाणी (120 शब्द)
📡 ऑफलाइन मोड सक्रिय (Offline Mode Active) आपातकालीन नंबर →