विश्नोई संत परंपरा एवं जांभाणी साहित्य
गुरु जम्भेश्वर भगवान के 140 हरजस संग्रह (6 प्रधान संत-कवि एवं 28 अप्रमाणित पांडुलिपि पद), शबदवाणी, जम्भसागर एवं ऐतिहासिक संत साहित्य का अकादमिक संदर्भ कोष।
खोज एवं फ़िल्टर परिणाम
जम्भसागर के रचयिता संत साहिबरामजी, उदोजी, खमाईजी एवं विश्नोई परंपरा के अन्य तपस्वी संत।
स्वामी गोकुलदासजी
Swami Gokuldasji
स्वामी गोकुलदासजी (1885-1968 ई.) विश्नोई समाज के मूर्धन्य इतिहासकार, शोधकर्ता एवं तपस्वी संत थे। आपने कई दशकों तक पूरे देश के विश्नोई गांवों, तीर्थों और राजा-महाराजाओं के ताम्रपत्रों का गहन अध्ययन कर 'विश्नोई धर्म प्रकाश' तथा 'विश्नोई इतिहास' जैसे अमर ऐतिहासिक संदर्भ ग्रंथों की रचना की।
संत साहिबरामजी
Sant Sahibramji
संत साहिबरामजी जांभाणी साहित्य के अग्रगण्य महाकवि और इतिहासकार हैं। उनका अमर ग्रंथ "जम्भ सागर" गुरु जम्भेश्वर भगवान के प्राकट्य से लेकर निर्वाण तक के सम्पूर्ण पावन चरित्र, देशाटन, समकालीन शासकों से संवाद और पंथ के विस्तार का सबसे प्रामाणिक पद्यमय आख्यान है।
संत परमानंदजी
Sant Parmanandji
संत परमानंदजी ने मुक्तिधाम मुकाम और गुरु महिमा पर शास्त्रीय डिंगल छंदों की रचना की।