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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
📜 संत परंपरा एवं हरजस साहित्य

विश्नोई संत परंपरा एवं जांभाणी साहित्य

गुरु जम्भेश्वर भगवान के 140 हरजस संग्रह (6 प्रधान संत-कवि एवं 28 अप्रमाणित पांडुलिपि पद), शबदवाणी, जम्भसागर एवं ऐतिहासिक संत साहित्य का अकादमिक संदर्भ कोष।

112 प्रमाणित हरजस
6 मुख्य संत-कवि
140 कुल हरजस संग्रह
59 संत-महापुरुष

खोज एवं फ़िल्टर परिणाम

जम्भसागर के रचयिता संत साहिबरामजी, उदोजी, खमाईजी एवं विश्नोई परंपरा के अन्य तपस्वी संत।

3 प्रविष्टियां
संत साहित्यकार / इतिहासकार c. 1885 CE — 1968 CE

स्वामी गोकुलदासजी

Swami Gokuldasji

स्वामी गोकुलदासजी (1885-1968 ई.) विश्नोई समाज के मूर्धन्य इतिहासकार, शोधकर्ता एवं तपस्वी संत थे। आपने कई दशकों तक पूरे देश के विश्नोई गांवों, तीर्थों और राजा-महाराजाओं के ताम्रपत्रों का गहन अध्ययन कर 'विश्नोई धर्म प्रकाश' तथा 'विश्नोई इतिहास' जैसे अमर ऐतिहासिक संदर्भ ग्रंथों की रचना की।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (2)
विश्नोई इतिहास (प्रामाणिक महाग्रंथ) विश्नोई धर्म प्रकाश
संत साहित्यकार / इतिहासकार Late 18th Century — Early 19th Century AD

संत साहिबरामजी

Sant Sahibramji

महान इतिहासकार व महाकवि; "जम्भ सागर" एवं विस्तृत जीवन चरित्र के रचयिता

संत साहिबरामजी जांभाणी साहित्य के अग्रगण्य महाकवि और इतिहासकार हैं। उनका अमर ग्रंथ "जम्भ सागर" गुरु जम्भेश्वर भगवान के प्राकट्य से लेकर निर्वाण तक के सम्पूर्ण पावन चरित्र, देशाटन, समकालीन शासकों से संवाद और पंथ के विस्तार का सबसे प्रामाणिक पद्यमय आख्यान है।

प्रमुख साहित्य रचनाएं (1)
श्री जम्भ सागर (विस्तृत पद्य महाकाव्य)
संत साहित्यकार / इतिहासकार 17th–18th Century AD — 18th Century AD

संत परमानंदजी

Sant Parmanandji

डिंगल विद्वान एवं शास्त्रीय संत-कवि

संत परमानंदजी ने मुक्तिधाम मुकाम और गुरु महिमा पर शास्त्रीय डिंगल छंदों की रचना की।

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