Skip to main content
विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
संत / तपस्वी 🗓 16th Century AD — 16th Century AD ✓ स्तर B (Level B) — शोध समर्थित

संत ऊदोजी

आरंभिक तपस्वी संत एवं जांभाणी परंपरा के रचनाकार

जीवन चरित्र एवं साधना दर्शन

संत / तपस्वी
संत ऊदोजी जांभाणी पंथ के आरंभिक तपस्वी संतों में प्रमुख हैं। उनके भजन और उपदेश प्रारंभिक हस्तलिखित पोथियों में सुरक्षित हैं।

🌟 मुख्य उपदेश व जीवन मूल्य

तपस्या, वन संरक्षण और कठोर सात्विक जीवन।

स्रोत एवं ऐतिहासिक साक्ष्य

Credited in the 1993 critical edition (Parmanand Ji Ka Potha) with 13 devotional Harjas across 6 musical ragas.

स्तर B (Level B) — शोध समर्थित

  • Dr. Krishna Lal Bishnoi (ed.). Bishnoi Santon Ke Harjas (बिश्नोई संतों के हरजस - परमानंद जी का पोथा), Guru Jambheshwar Shodh Sansthan, Bikaner, 1993, p. Introduction, pp. 9–18.

📷 संत छायाचित्र दीर्घा (फ़ोटो गैलरी)

सत्यापित एवं समुदाय द्वारा प्रेषित ऐतिहासिक छायाचित्र

वर्तमान में कोई अतिरिक्त छायाचित्र उपलब्ध नहीं है। आप प्रथम छायाचित्र भेज सकते हैं।

संक्षिप्त संदर्भ विवरण

श्रेणी संत / तपस्वी
कालखंड 16th Century AD — 16th Century AD
साहित्य कृतियां 0
संबद्ध तीर्थ 0
📜

पवित्र शबदवाणी पढ़ें

गुरु जम्भेश्वर भगवान द्वारा उच्चारित 120 पावन शब्दों का संपूर्ण संग्रह, भावार्थ एवं ऑडियो श्रवण।

शबदवाणी संग्रह देखें →

अन्य पूज्य संत एवं साहित्यकार

गुरु जाम्भेश्वर भगवान
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान 1451 CE (VS 1508)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान (1451-1536 ई. / वि.सं. 1508-1593) विश्नोई धर्म के प्रवर्तक एवं आराध्य देव हैं। आपका प्राकट्य भाद्रपद कृष्णा अष्टमी (जन्माष्टमी) को नागौर जिले के पीपासर गांव में पंवार क्षत्रिय ठाकुर लोहटजी एवं माता हंसा देवी के घर हुआ। बाल्यकाल में मौन साधना व अद्भुत ज्ञान के उपरांत वि.सं. 1542 (1485 ई.) की कार्तिक शुक्ला अष्टमी को समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की। आपने 29 पावन नियमों एवं 120 अमृतमयी शब्दों (शबदवाणी) का दिव्य उपदेश दिया, जिसमें अहिंसा, वृक्ष एवं वन्यजीव संरक्षण, सत्य और शुचिता का अद्वितीय संदेश निहित है।
संत केशवदासजी गोदारा 16th Century AD
गोदारा गोत्र में जन्मे संत केशवदासजी (केशोजी) 17 अमर हरजस पदों के रचयिता हैं। हरजस परंपरा में उनका तीसरा स्थान है। उनकी रचनाओं में गुरु भक्ति के साथ-साथ जांभाणी पंथ के प्रारंभिक इतिहास और संतों के त्याग की प्रेरक गाथाएं मिलती हैं।
संत कल्याणजी 16th Century AD
संत कल्याणजी 12 पावन हरजस पदों के रचयिता हैं। उनके पदों में गेयता, शास्त्रीय राग-रागिनियों का प्रवाह और लोक कल्याण की उदात्त भावना दृष्टिगोचर होती है। वे गुरु वचनों और जीव रक्षा को मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य बताते हैं।
संपूर्ण संत सूची देखें →
📡 ऑफलाइन मोड सक्रिय (Offline Mode Active) आपातकालीन नंबर →