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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
📖 प्रामाणिक जाम्भाणी साहित्य एवं हस्तलिखित ग्रंथ

जाम्भाणी साहित्य, ग्रंथ एवं संत-काव्य संग्रह

श्री जम्भोजी की शब्दवाणी, संत साहिबरामजी कृत श्री जम्भसागर, संत विल्होजी कृत हरजस एवं पांच शताब्दियों के प्रामाणिक पांडुलिपि साक्ष्यों का डिजिटल शोध अभिलेखागार।

80 ग्रंथ व रचनाएं
6 पांडुलिपि साक्ष्य
5 शोध संस्करण
52 रचनाकार संत

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पांडुलिपियों एवं प्रकाशित ग्रंथों का प्रामाणिक संदर्भ

8 रचनाएं
भजन / पद

बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस

✍️ रचयिता: ऊदोजी नैणा

परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।

महत्व: The thesis lists Harjas under these ragas: Khambhavachi, Gauri, Kafi, Ramkali, Kedara, Ghumar. It does not state a separate count in the cited passage.
भजन / पद

बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस

✍️ रचयिता: आलमजी

परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।

महत्व: 12 Harjas; ragas listed in the thesis: Suhab, Dhanashri, Khambhavachi, Nat, Sorath, Malhar, Gauri.
भजन / पद

बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस

✍️ रचयिता: संत वील्होजी

परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।

महत्व: 20 Harjas; ragas listed in the thesis: Gauri, Asa, Bhairava, Bilavala, Ramkali, Malhar, Dhanashri, Sorath.
भजन / पद

बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस

✍️ रचयिता: केसोजी गोदारा

परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।

महत्व: 13 Harjas; ragas listed in the thesis: Maru, Bhairava, Dhanashri, Malhar, Bilavala, Gauri, Hanso, Suhab, Kedara.
भजन / पद

बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस

परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।

महत्व: 48 Harjas; ragas listed in the thesis: Bilavala, Malhar, Asa, Maru, Sorath, Dhanashri, Bhairava, Gauri, Kedara, Khambhavachi.
भजन / पद

बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस

परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।

महत्व: 6 Harjas; ragas listed in the thesis: Khambhavachi, Sarang, Dhanashri.
भजन / पद

वील्होजी के हरजस

✍️ रचयिता: संत वील्होजी

वील्होजी की वाणी के संबंध में अकादमिक अध्ययन इसे इस प्रकार बताता है: 20 harjas arranged under eight ragas।

महत्व: 20 harjas arranged under eight ragas। मूल पाठ के लिए उद्धृत संस्करण देखें।
भजन / पद

कवित्त प्रसंग के

✍️ रचयिता: संत वील्होजी

वील्होजी की वाणी के संबंध में अकादमिक अध्ययन इसे इस प्रकार बताता है: Miscellaneous kavittas in the source collection।

महत्व: Miscellaneous kavittas in the source collection। मूल पाठ के लिए उद्धृत संस्करण देखें।
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