जाम्भाणी साहित्य, ग्रंथ एवं संत-काव्य संग्रह
श्री जम्भोजी की शब्दवाणी, संत साहिबरामजी कृत श्री जम्भसागर, संत विल्होजी कृत हरजस एवं पांच शताब्दियों के प्रामाणिक पांडुलिपि साक्ष्यों का डिजिटल शोध अभिलेखागार।
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पांडुलिपियों एवं प्रकाशित ग्रंथों का प्रामाणिक संदर्भ
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस
परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस
परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस
परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस
परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस
परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।
बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस
परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।
वील्होजी के हरजस
वील्होजी की वाणी के संबंध में अकादमिक अध्ययन इसे इस प्रकार बताता है: 20 harjas arranged under eight ragas।
कवित्त प्रसंग के
वील्होजी की वाणी के संबंध में अकादमिक अध्ययन इसे इस प्रकार बताता है: Miscellaneous kavittas in the source collection।