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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
साहित्यिक योगदानकर्ता ✓ स्तर B (Level B) — शोध समर्थित

ऊदोजी नैणा

जीवन चरित्र एवं साधना दर्शन

साहित्यिक योगदानकर्ता
ऊदोजी नैणा को जाम्भाणी साहित्य के कवि और “बिश्नोई सन्तों के हरजस” पर शोध में उल्लिखित रचनाकार के रूप में दर्ज किया गया है। उपलब्ध स्रोत उनके विस्तृत जीवन-वृत्त की पुष्टि नहीं करता।

🌟 मुख्य उपदेश व जीवन मूल्य

साहित्यिक उल्लेख और रचना-संबंधी जानकारी स्रोत सहित दी गई है; अपुष्ट जीवन-वर्ष और पद-पाठ शामिल नहीं हैं।

स्रोत एवं ऐतिहासिक साक्ष्य

Udoji Naina is listed as a Jambhani literary contributor in the 1993 Harjas corpus described by Ahmed (2007).

स्तर B (Level B) — शोध समर्थित

  • Shamsheed Ahmed. Socio-Religious Trends as Reflected in Nirgun Bhakti Literature During 16th and 17th Centuries, Centre of Advanced Study, Department of History, Aligarh Muslim University, 2007. स्रोत देखें

The community poet index separately lists Udoji Ading and attributes 9 sakhis; its relationship to the academic-corpus name is unresolved.

स्तर C (Level C) — समाज प्रमाणित

  • Guru Jambheshwar Bhagwan (community literature archive). Sakhi Bhavarth Prakash — Poet Index, Guru Jambheshwar Bhagwan website. स्रोत देखें

प्रमाणित साहित्य रचनाएं एवं ग्रंथ

मूल डिंगल/राजस्थानी पद, साखियां एवं छंद

2 कृतियां
भजन / पद

बिश्नोई संतों के हरजस (1993) में हरजस

परमानंद जी का पोथा पर आधारित 1993 के कृष्णलाल बिश्नोई संपादित संकलन में दर्ज रचनात्मक attribution।

ऐतिहासिक महत्व: The thesis lists Harjas under these ragas: Khambhavachi, Gauri, Kafi, Ramkali, Kedara, Ghumar. It does not state a separate count in the cited passage.
साखी

ऊदोजी नैणा की साखियां (साखी भावार्थ प्रकाश)

उद्धृत समुदाय सूची इस कवि के नाम 14 साखी दर्ज करती है। यह सूची का attribution है, स्वतंत्र आलोचनात्मक संस्करण की गणना नहीं।

ऐतिहासिक महत्व: केवल सूचीगत attribution; पद-पाठ यहां पुनर्प्रकाशित नहीं है।

साहित्य स्रोत: Harjas in Bishnoi Santon Ke Harjas (1993)

The thesis lists Harjas under these ragas: Khambhavachi, Gauri, Kafi, Ramkali, Kedara, Ghumar. It does not state a separate count in the cited passage.

स्तर B (Level B) — शोध समर्थित

  • Shamsheed Ahmed. Socio-Religious Trends as Reflected in Nirgun Bhakti Literature During 16th and 17th Centuries, Centre of Advanced Study, Department of History, Aligarh Muslim University, 2007. स्रोत देखें

साहित्य स्रोत: Sakhis of Udoji Naina (Sakhi Bhavarth Prakash)

The cited community index attributes 14 sakhi entries to this poet.

स्तर C (Level C) — समाज प्रमाणित

  • Guru Jambheshwar Bhagwan (community literature archive). Sakhi Bhavarth Prakash — Poet Index, Guru Jambheshwar Bhagwan website. स्रोत देखें

📷 संत छायाचित्र दीर्घा (फ़ोटो गैलरी)

सत्यापित एवं समुदाय द्वारा प्रेषित ऐतिहासिक छायाचित्र

वर्तमान में कोई अतिरिक्त छायाचित्र उपलब्ध नहीं है। आप प्रथम छायाचित्र भेज सकते हैं।

संक्षिप्त संदर्भ विवरण

श्रेणी साहित्यिक योगदानकर्ता
कालखंड — Present
साहित्य कृतियां 2
संबद्ध तीर्थ 0
📜

पवित्र शबदवाणी पढ़ें

गुरु जम्भेश्वर भगवान द्वारा उच्चारित 120 पावन शब्दों का संपूर्ण संग्रह, भावार्थ एवं ऑडियो श्रवण।

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अन्य पूज्य संत एवं साहित्यकार

गुरु जाम्भेश्वर भगवान
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान 1451 CE (VS 1508)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान (1451-1536 ई. / वि.सं. 1508-1593) विश्नोई धर्म के प्रवर्तक एवं आराध्य देव हैं। आपका प्राकट्य भाद्रपद कृष्णा अष्टमी (जन्माष्टमी) को नागौर जिले के पीपासर गांव में पंवार क्षत्रिय ठाकुर लोहटजी एवं माता हंसा देवी के घर हुआ। बाल्यकाल में मौन साधना व अद्भुत ज्ञान के उपरांत वि.सं. 1542 (1485 ई.) की कार्तिक शुक्ला अष्टमी को समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की। आपने 29 पावन नियमों एवं 120 अमृतमयी शब्दों (शबदवाणी) का दिव्य उपदेश दिया, जिसमें अहिंसा, वृक्ष एवं वन्यजीव संरक्षण, सत्य और शुचिता का अद्वितीय संदेश निहित है।
संत केशवदासजी गोदारा 16th Century AD
गोदारा गोत्र में जन्मे संत केशवदासजी (केशोजी) 17 अमर हरजस पदों के रचयिता हैं। हरजस परंपरा में उनका तीसरा स्थान है। उनकी रचनाओं में गुरु भक्ति के साथ-साथ जांभाणी पंथ के प्रारंभिक इतिहास और संतों के त्याग की प्रेरक गाथाएं मिलती हैं।
संत कल्याणजी 16th Century AD
संत कल्याणजी 12 पावन हरजस पदों के रचयिता हैं। उनके पदों में गेयता, शास्त्रीय राग-रागिनियों का प्रवाह और लोक कल्याण की उदात्त भावना दृष्टिगोचर होती है। वे गुरु वचनों और जीव रक्षा को मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य बताते हैं।
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