ऐतिहासिक धरोहर एवं उद्भव
Bishnoi-Founded Settlementप्रथम पाहल ग्रहण करने वाले 29 प्रमुख शिष्य एवं संत
🛕 पावन तीर्थ धाम, साथरी व ऐतिहासिक स्मारक
1 तीर्थ स्थलदीन मठ एवं पावन कांकड़ वृक्ष (समराथल धोरा)
Samrathal Deen Math & Sacred Kankad Tree
विश्नोई धर्म का पावन उद्गम स्थल जहाँ गुरुदेव ने 1485 ई. में पाहल बनाकर 29 नियमों का उपदेश दिया।
संबद्ध पूज्य संत एवं साहित्य परंपरा
इस पावन धरा से जुड़े गुरु, शिष्य एवं संत साहित्यकार
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान (1451-1536 ई. / वि.सं. 1508-1593) विश्नोई धर्म के प्रवर्तक एवं आराध्य देव हैं। आपका प्राकट्य भाद्रपद कृष्णा अष्टमी (जन्माष्टमी) को नागौर जिले के पीपासर गांव में पंवार क्षत्रिय ठाकुर लोहटजी एवं माता हंसा देवी के घर हुआ। बाल्यकाल में मौन साधना व अद्भुत ज्ञान के उपरांत वि.सं. 1542 (1485 ई.) की कार्तिक शुक्ला अष्टमी को समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की। आपने 29 पावन नियमों एवं 120 अमृतमयी शब्दों (शबदवाणी) का दिव्य उपदेश दिया, जिसमें अहिंसा, वृक्ष एवं वन्यजीव संरक्षण, सत्य और शुचिता का अद्वितीय संदेश निहित है।
आधिकारिक जनगणना व जनसांख्यिकी
Census of Indiaवन्यजीव संरक्षण, ओरण एवं पवित्र स्थल
प्राथमिक साक्ष्य एवं ऐतिहासिक संदर्भ
प्रत्येक दावे की सत्यता स्वतंत्र प्राथमिक स्रोतों से प्रमाणित है।
Rajasthan District Gazetteers: Bikaner
Ecological Traditions of Rajasthan
वैकल्पिक नाम, राजस्व ग्राम व ढाणियां
समीपस्थ पावन अष्टधाम / तीर्थ
दीन मठ एवं पावन कांकड़ वृक्ष (समराथल धोरा)
विश्नोई धर्म का पावन उद्गम स्थल जहाँ गुरुदेव ने 1485 ई. में पाहल बनाकर 29 नियमों का उपदेश दिया।
GPS Centroid Location 27.5451, 73.3210
Tied to Census 2011 MDDS village centroid coordinates.
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