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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
संत साहित्यकार / इतिहासकार 🗓 Late 18th Century — Early 19th Century AD ✓ स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

संत साहिबरामजी

महान इतिहासकार व महाकवि; "जम्भ सागर" एवं विस्तृत जीवन चरित्र के रचयिता

जीवन चरित्र एवं साधना दर्शन

संत साहित्यकार / इतिहासकार
संत साहिबरामजी जांभाणी साहित्य के अग्रगण्य महाकवि और इतिहासकार हैं। उनका अमर ग्रंथ "जम्भ सागर" गुरु जम्भेश्वर भगवान के प्राकट्य से लेकर निर्वाण तक के सम्पूर्ण पावन चरित्र, देशाटन, समकालीन शासकों से संवाद और पंथ के विस्तार का सबसे प्रामाणिक पद्यमय आख्यान है।

🌟 मुख्य उपदेश व जीवन मूल्य

जांभाणी इतिहास का संरक्षण, गुरु सिद्धांतों का आख्यान एवं भक्ति का प्रसार।

स्रोत एवं ऐतिहासिक साक्ष्य

Authored the monumental historical Dingal epic Sri Jambha Sagar (c. 1805 AD) detailing the life and mission of Guru Jambhoji.

स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

  • Sant Sahibramji (संत साहिबरामजी). Sri Jambha Sagar & Jambha Charitra (श्री जम्भ सागर एवं जम्भ चरित्र), Rajasthan Oriental Research Institute (RORI) Archives, 1805.

प्रमाणित साहित्य रचनाएं एवं ग्रंथ

मूल डिंगल/राजस्थानी पद, साखियां एवं छंद

1 कृतियां
कथा / चरित्र Early 19th Century AD • Dingal / Rajasthani

श्री जम्भ सागर (विस्तृत पद्य महाकाव्य)

"प्रथम सुमिर श्री गुरु चरण, जम्भेश्वर सुख रास। सागर सम गुण जिनह के, साहिब कहै प्रकास॥"

— मूल पाठ / पद

गुरु जम्भेश्वर भगवान के सम्पूर्ण जीवन और पंथ इतिहास पर संत साहिबरामजी द्वारा रचित अमर महाग्रंथ।

ऐतिहासिक महत्व: 19वीं शताब्दी का डिंगल पद्य महाकाव्य (1805 ई.), जिसमें गुरु जम्भेश्वर जी के सम्पूर्ण जीवन, देशाटन, समकालीन राजाओं से संवाद और पंथ इतिहास का विस्तृत विवरण है।

साहित्य स्रोत: Sri Jambha Sagar (Complete Verse Epic)

Canonical poetic chronicle Sri Jambha Sagar documented in Rajasthan Oriental Research Institute (RORI) archives.

स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

  • Sant Sahibramji (संत साहिबरामजी). Sri Jambha Sagar & Jambha Charitra (श्री जम्भ सागर एवं जम्भ चरित्र), Rajasthan Oriental Research Institute (RORI) Archives, 1805.

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संक्षिप्त संदर्भ विवरण

श्रेणी संत साहित्यकार / इतिहासकार
कालखंड Late 18th Century — Early 19th Century AD
साहित्य कृतियां 1
संबद्ध तीर्थ 0
📜

पवित्र शबदवाणी पढ़ें

गुरु जम्भेश्वर भगवान द्वारा उच्चारित 120 पावन शब्दों का संपूर्ण संग्रह, भावार्थ एवं ऑडियो श्रवण।

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अन्य पूज्य संत एवं साहित्यकार

गुरु जाम्भेश्वर भगवान
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान 1451 CE (VS 1508)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान (1451-1536 ई. / वि.सं. 1508-1593) विश्नोई धर्म के प्रवर्तक एवं आराध्य देव हैं। आपका प्राकट्य भाद्रपद कृष्णा अष्टमी (जन्माष्टमी) को नागौर जिले के पीपासर गांव में पंवार क्षत्रिय ठाकुर लोहटजी एवं माता हंसा देवी के घर हुआ। बाल्यकाल में मौन साधना व अद्भुत ज्ञान के उपरांत वि.सं. 1542 (1485 ई.) की कार्तिक शुक्ला अष्टमी को समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की। आपने 29 पावन नियमों एवं 120 अमृतमयी शब्दों (शबदवाणी) का दिव्य उपदेश दिया, जिसमें अहिंसा, वृक्ष एवं वन्यजीव संरक्षण, सत्य और शुचिता का अद्वितीय संदेश निहित है।
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संत कल्याणजी 16th Century AD
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