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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
संत / तपस्वी 🗓 16th–17th Century AD — 17th Century AD ✓ स्तर C (Level C) — समाज प्रमाणित

संत खमाईजी

साखीकार एवं भक्ति पदों के रचनाकार

जीवन चरित्र एवं साधना दर्शन

संत / तपस्वी
संत खमाईजी ने नीतिपरक साखियों और भजनों की रचना की जो मारवाड़ और बीकानेर के सत्संगों में लोकप्रिय हैं।

🌟 मुख्य उपदेश व जीवन मूल्य

जीव दया, नम्रता और सत्य संभाषण।

स्रोत एवं ऐतिहासिक साक्ष्य

Devotional poet of moral sakhis and didactic couplets preserved in traditional community satsang collections.

स्तर C (Level C) — समाज प्रमाणित

  • Akhil Bharatiya Bishnoi Mahasabha & Mukam Mandir Trust. Jambhani Sant Parampara evam Satsang Vani (सामुदायिक सत्संग संग्रह), Sri Jambheshwar Mandir Trust, Mukam, 1985.

📷 संत छायाचित्र दीर्घा (फ़ोटो गैलरी)

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संक्षिप्त संदर्भ विवरण

श्रेणी संत / तपस्वी
कालखंड 16th–17th Century AD — 17th Century AD
साहित्य कृतियां 0
संबद्ध तीर्थ 0
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पवित्र शबदवाणी पढ़ें

गुरु जम्भेश्वर भगवान द्वारा उच्चारित 120 पावन शब्दों का संपूर्ण संग्रह, भावार्थ एवं ऑडियो श्रवण।

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अन्य पूज्य संत एवं साहित्यकार

गुरु जाम्भेश्वर भगवान
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान 1451 CE (VS 1508)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान (1451-1536 ई. / वि.सं. 1508-1593) विश्नोई धर्म के प्रवर्तक एवं आराध्य देव हैं। आपका प्राकट्य भाद्रपद कृष्णा अष्टमी (जन्माष्टमी) को नागौर जिले के पीपासर गांव में पंवार क्षत्रिय ठाकुर लोहटजी एवं माता हंसा देवी के घर हुआ। बाल्यकाल में मौन साधना व अद्भुत ज्ञान के उपरांत वि.सं. 1542 (1485 ई.) की कार्तिक शुक्ला अष्टमी को समराथल धोरे पर पाहल बनाकर विश्नोई धर्म की स्थापना की। आपने 29 पावन नियमों एवं 120 अमृतमयी शब्दों (शबदवाणी) का दिव्य उपदेश दिया, जिसमें अहिंसा, वृक्ष एवं वन्यजीव संरक्षण, सत्य और शुचिता का अद्वितीय संदेश निहित है।
संत केशवदासजी गोदारा 16th Century AD
गोदारा गोत्र में जन्मे संत केशवदासजी (केशोजी) 17 अमर हरजस पदों के रचयिता हैं। हरजस परंपरा में उनका तीसरा स्थान है। उनकी रचनाओं में गुरु भक्ति के साथ-साथ जांभाणी पंथ के प्रारंभिक इतिहास और संतों के त्याग की प्रेरक गाथाएं मिलती हैं।
संत कल्याणजी 16th Century AD
संत कल्याणजी 12 पावन हरजस पदों के रचयिता हैं। उनके पदों में गेयता, शास्त्रीय राग-रागिनियों का प्रवाह और लोक कल्याण की उदात्त भावना दृष्टिगोचर होती है। वे गुरु वचनों और जीव रक्षा को मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य बताते हैं।
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