सुरजनजी हरजस संग्रह (24 भक्ति पद)
ग्रंथ परिचय एवं मूल पाठ
16th Century AD"चेत रे नर चेत सवेरे, गुरु जम्भ शरण सुख पावे रे। माया का भरम तज प्यारे, नाम सिमर भव तर जावे रे॥"
🏛️ ऐतिहासिक व साहित्यिक महत्व
24 चिंतनशील हरजस पद, जिनमें वैराग्य, नाम सिमरन और पाहुल संस्कार की महिमा का विशद वर्णन है।
ग्रंथ साक्ष्य एवं शोध संदर्भ
Canonical literary work 'Surjanji Harjas Sangrah (24 Devotional Hymns)' catalogued by Dr. Hira Lal Maheshwari (1972).
स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित
- Dr. Hira Lal Maheshwari. Jambhoji and His Literature (श्री जम्भोजी और उनका साहित्य), Sahitya Akademi / Rajasthani Bhasha Sahitya evam Sanskriti Akademi, Bikaner, 1972, p. pp. 45–130.
ग्रंथ संदर्भ विवरण
सुरजनदास जी पूनियां
सुरजनदास पूनियां जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। अकादमिक अध्ययन 1993 के हरजस-संग्रह में इनके 48 हरजस दस रागों में दर्ज करता है।