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हरजस (भक्ति पद) 🗓 16th Century AD Rajasthani ✓ स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

केशवदासजी हरजस संग्रह (17 भक्ति पद)

ग्रंथ परिचय एवं मूल पाठ

16th Century AD
— मूल पद / मंगलाचरण पाठ (डिंगल / प्राचीन राजस्थानी)

"जम्भेश्वर देव दयाल हमारे, पाहल दे भव सिंधु उतारे। गोदारा केसो गुण गावै, गुरु चरनन में सुरति लगावै॥"

संत केशवदासजी गोदारा द्वारा विरचित 17 पावन हरजस पदों का संकलन।

🏛️ ऐतिहासिक व साहित्यिक महत्व

17 भक्ति पद जो पंथ के आरंभिक इतिहास, सत्यनिष्ठा एवं मूक जीवों की रक्षा को उजागर करते हैं।

ग्रंथ साक्ष्य एवं शोध संदर्भ

Canonical literary work 'Keshavdasji Harjas Sangrah (17 Devotional Hymns)' catalogued by Dr. Hira Lal Maheshwari (1972).

स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

  • Dr. Hira Lal Maheshwari. Jambhoji and His Literature (श्री जम्भोजी और उनका साहित्य), Sahitya Akademi / Rajasthani Bhasha Sahitya evam Sanskriti Akademi, Bikaner, 1972, p. pp. 45–130.

ग्रंथ संदर्भ विवरण

साहित्य विधा हरजस (भक्ति पद)
रचना काल 16th Century AD
भाषा / बोली Rajasthani
पांडुलिपि साक्ष्य 0
शोध संस्करण 0
साक्ष्य स्तर स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित
रचनाकार परिचय

संत केशवदासजी गोदारा

गोदारा गोत्र में जन्मे संत केशवदासजी (केशोजी) 17 अमर हरजस पदों के रचयिता हैं। हरजस परंपरा में उनका तीसरा स्थान है। उनकी रचनाओं में गुरु भक्ति के साथ-साथ जांभाणी पंथ के प्रारंभिक इतिहास और संतों के त्याग की प्रेरक गाथाएं मिलती हैं।

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