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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
आरती / स्तुति 🗓 c. 1575 CE Rajasthani ✓ स्तर B (Level B) — शोध समर्थित

आरती श्री गुरु जम्भेश्वर जी

✍️ रचयिता महापुरुष: संत वील्होजी 🎵 44 हरजस

ग्रंथ परिचय एवं मूल पाठ

c. 1575 CE
— मूल पद / मंगलाचरण पाठ (डिंगल / प्राचीन राजस्थानी)

"आरती करूँ गुरु जम्भदेव री, जांरे शरणे सकल दुःख भांजे। घट-घट व्यापक अंतर्यामी, जांरा भजन सुणे यम भागे॥"

विश्नोई मंदिरों और घरों में संध्या समय एवं हवन पूर्णाहुति पर गाई जाने वाली सर्वमान्य आरती।

🏛️ ऐतिहासिक व साहित्यिक महत्व

440 वर्षों से अनवरत रूप से समाज के प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान में गायन।

ग्रंथ साक्ष्य एवं शोध संदर्भ

Canonical literary work 'Aarti Sri Guru Jambheshwar Ji' catalogued in authoritative studies.

स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

  • Dr. Hira Lal Maheshwari. Jambhoji and His Literature (श्री जम्भोजी और उनका साहित्य), Sahitya Akademi / Rajasthani Bhasha Sahitya evam Sanskriti Akademi, Bikaner, 1972, p. pp. 45–130.

ग्रंथ संदर्भ विवरण

साहित्य विधा आरती / स्तुति
रचना काल c. 1575 CE
भाषा / बोली Rajasthani
पांडुलिपि साक्ष्य 0
शोध संस्करण 0
साक्ष्य स्तर स्तर B (Level B) — शोध समर्थित
रचनाकार परिचय

संत वील्होजी

संत वील्होजी जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। “वील्होजी की वाणी” में अनेक कथात्मक और पद्य रचनाएँ संकलित हैं; उपलब्ध अकादमिक अध्ययन इनके 20 हरजस आठ रागों में बताता है।

🌱 जन्म स्थान: Ransi Gaon
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