आरती श्री गुरु जम्भेश्वर जी
ग्रंथ परिचय एवं मूल पाठ
c. 1575 CE"आरती करूँ गुरु जम्भदेव री, जांरे शरणे सकल दुःख भांजे। घट-घट व्यापक अंतर्यामी, जांरा भजन सुणे यम भागे॥"
🏛️ ऐतिहासिक व साहित्यिक महत्व
440 वर्षों से अनवरत रूप से समाज के प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान में गायन।
ग्रंथ साक्ष्य एवं शोध संदर्भ
Canonical literary work 'Aarti Sri Guru Jambheshwar Ji' catalogued in authoritative studies.
स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित
- Dr. Hira Lal Maheshwari. Jambhoji and His Literature (श्री जम्भोजी और उनका साहित्य), Sahitya Akademi / Rajasthani Bhasha Sahitya evam Sanskriti Akademi, Bikaner, 1972, p. pp. 45–130.
ग्रंथ संदर्भ विवरण
संत वील्होजी
संत वील्होजी जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। “वील्होजी की वाणी” में अनेक कथात्मक और पद्य रचनाएँ संकलित हैं; उपलब्ध अकादमिक अध्ययन इनके 20 हरजस आठ रागों में बताता है।