कथा जम्भदेव जी की (जम्भ चरित्र)
ग्रंथ परिचय एवं मूल पाठ
c. 1580 CE"संवत पंद्रह सौ बयालीस, कार्तिक सुदी आठम बुधवार। समराथल पर थंभ रोपियो, विश्नोई पंथ कियो विस्तार॥"
🏛️ ऐतिहासिक व साहित्यिक महत्व
विश्नोई धर्म के स्थापना वर्ष एवं प्रारंभिक इतिहास की सबसे प्रामाणिक काव्यमयी साक्ष्य कृति।
📜 ऐतिहासिक पांडुलिपि साक्ष्य एवं अभिलेखागार
प्राचीन हस्तलिखित पोथियों, गुटकों एवं अभिलेखीय प्रतियों का प्रामाणिक विवरण
Jambha Charitra - RORI Jodhpur Codex
⏳ V.S. 1685 / c. 1628 CE
Ransi Gaon Prachin Pothi
⏳ V.S. 1715 / c. 1658 CE
ग्रंथ साक्ष्य एवं शोध संदर्भ
Canonical literary work 'Katha Jamba Deva Ji Ki (Jambha Charitra)' catalogued in authoritative studies.
स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित
- Dr. Hira Lal Maheshwari. Jambhoji and His Literature (श्री जम्भोजी और उनका साहित्य), Sahitya Akademi / Rajasthani Bhasha Sahitya evam Sanskriti Akademi, Bikaner, 1972, p. pp. 45–130.
ग्रंथ संदर्भ विवरण
संत वील्होजी
संत वील्होजी जाम्भाणी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। “वील्होजी की वाणी” में अनेक कथात्मक और पद्य रचनाएँ संकलित हैं; उपलब्ध अकादमिक अध्ययन इनके 20 हरजस आठ रागों में बताता है।