पंचांग कैलेण्डर • आज का पंचांग
प्रामाणिक वैदिक सूर्य-सिद्धांत, तिथि, नक्षत्र, चौघड़िया एवं बिश्नोई समाज के पावन पर्व, मुकाम मेला तथा अमावस्या मुहूर्त (चढ़ेगी-उतरेगी)।
फ़रवरी 2026
अमावस्या मुहूर्त: कब चढ़ेगी एवं कब उतरेगी
चुनी गई तिथि: 17 फ़रवरी 2026 (मंगलवार)
तिथि: फाल्गुन कृष्ण पक्ष अमावस्या • नक्षत्र: धनिष्ठा • योग: परिघ • करण: नाग
महा मुकाम फाल्गुन वार्षिक मेला (महापर्व)
Pilgrims are advised to bring woollen shawls for evening havan. Free community bhojnalaya is open.
अमावस्या मुहूर्त: कब चढ़ेगी एवं कब उतरेगी
सूक्ष्म खगोलीय सूर्य-चन्द्र गति अनुसार तिथि प्रवेश, मोक्ष एवं बिश्नोई धर्म के उनतीस नियमों अनुसार उपवास, पाहल व हवन का समय।
अमावस्या
कृष्ण पक्ष समाप्ति: सायं 05:31 बजे तकधनिष्ठा
स्वामी: मंगल चरण: 2 (रात्रि 09:12 बजे तक)परिघ
अशुभ योग पूर्वाह्न (सुबह) 12:11 बजे तकनाग
द्वितीय करण स्थिरमंगलवार
Tuesday स्वामिग्रह: मंगलशुभ मुहूर्त (Auspicious Windows)
अशुभ एवं त्याज्य काल (राहुकाल आदि)
चौघड़िया मुहूर्त (Choghadiya Timings)
वर्ष 2026 के प्रमुख बिश्नोई पर्व व अमावस्या तिथियां
समस्त 12 अमावस्या, मुकाम धाम मेले, जाम्भोजी जन्मोत्सव, खेजड़ली बलिदान दिवस व पाहल स्थापना दिवस की प्रामाणिक सूची।
माघ मास की पावन अमावस्या
गुरु जाम्भोजी के उनतीस नियमों अनुसार संपूर्ण समाज का उपवास, खेती व व्यापारिक कार्य विराम, पाहल व सात्विक जीवन का पावन दिन।
मुकाम फाल्गुन वार्षिक मेला (महापर्व)
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान की पावन समाधि मुकाम धाम (नोखा, बीकानेर) का सर्वोच्च वार्षिक अंतरराष्ट्रीय मेला। लाखों श्रद्धालुओं द्वारा घी-नारियल का विशाल हवन एवं पाहल दीक्षा।
समराथल धोरा होली महोत्सव
समराथल धोरा व मुकाम धाम में पावन फाल्गुन पूर्णिमा दर्शन।
रोटू धाम मेला (नागौर)
उनतीस नियमों अनुसार उपवास, श्री जम्भेश्वर हवन, पाहल एवं जीवदया का संकल्प दिवस।
वैशाख मास की पावन अमावस्या
गुरु जाम्भोजी के उनतीस नियमों अनुसार संपूर्ण समाज का उपवास, खेती व व्यापारिक कार्य विराम, पाहल व सात्विक जीवन का पावन दिन।
ज्येष्ठ मास की पावन अमावस्या
गुरु जाम्भोजी के उनतीस नियमों अनुसार संपूर्ण समाज का उपवास, खेती व व्यापारिक कार्य विराम, पाहल व सात्विक जीवन का पावन दिन।
सोमवती अमावस्या (महापुण्य व्रत)
सोमवार को पड़ने वाली पावन अमावस्या। विश्नोई धर्म के 5वें नियम अनुसार उपवास, हवन एवं जीवदया का विशेष पुण्यकाल।
आषाढ़ मास की पावन अमावस्या
गुरु जाम्भोजी के उनतीस नियमों अनुसार संपूर्ण समाज का उपवास, खेती व व्यापारिक कार्य विराम, पाहल व सात्विक जीवन का पावन दिन।
श्रावण मास की पावन अमावस्या
गुरु जाम्भोजी के उनतीस नियमों अनुसार संपूर्ण समाज का उपवास, खेती व व्यापारिक कार्य विराम, पाहल व सात्विक जीवन का पावन दिन।
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान प्राकट्य/जन्मोत्सव
संवत 1508 भादवा वदी अष्टमी की अर्धरात्रि को पीपासर धाम में भगवान जाम्भोजी का अवतार हुआ। विश्व भर में हर्षोल्लास व महा-आरती का दिन।
भाद्रपद मास की पावन अमावस्या
गुरु जाम्भोजी के उनतीस नियमों अनुसार संपूर्ण समाज का उपवास, खेती व व्यापारिक कार्य विराम, पाहल व सात्विक जीवन का पावन दिन।
खेजड़ली शहीदी दिवस (राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस)
संवत 1787 (1730 ई.) को अमृता देवी विश्नोई सहित 363 वीरों-वीरांगनाओं ने हरे वृक्षों की रक्षा हेतु शीश कटवाए। विश्व का पहला पर्यावरण बलिदान।
मुकाम आश्विन (आसोज) मेला
मुकाम धाम में आयोजित होने वाला पावन आश्विन मेला। श्री जाम्भाणी समाधि स्थल पर दर्शन एवं हवन।
सोमवती अमावस्या (महापुण्य व्रत)
सोमवार को पड़ने वाली पावन अमावस्या। विश्नोई धर्म के 5वें नियम अनुसार उपवास, हवन एवं जीवदया का विशेष पुण्यकाल।
विश्नोई धर्म स्थापना एवं पाहल दिवस (समराथल धोरा)
संवत 1542 (1485 ई.) को समराथल धोरा पर गुरु जाम्भोजी महाराज ने पाहल बनाकर 29 नियमों का उपदेश देकर विश्नोई पंथ की नींव रखी।
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान निर्वाण दिवस (लालासर साथरी)
संवत 1593 में लालासर साथरी में भगवान जाम्भोजी का महाप्रयाण। लालासर साथरी एवं मुकाम धाम में विशेष श्रद्धांजलि सभा व हवन।
मार्गशीर्ष मास की पावन अमावस्या
गुरु जाम्भोजी के उनतीस नियमों अनुसार संपूर्ण समाज का उपवास, खेती व व्यापारिक कार्य विराम, पाहल व सात्विक जीवन का पावन दिन।
अमावस्या मुहूर्त: कब चढ़ेगी एवं कब उतरेगी
सूक्ष्म खगोलीय सूर्य-चन्द्र गति अनुसार तिथि प्रवेश, मोक्ष एवं बिश्नोई धर्म के उनतीस नियमों अनुसार उपवास, पाहल व हवन का समय।
नियम 5: अमावस्या का व्रत रखणा, साखी राखो सुहागणी
पर्यावरणीय संतुलन, पशु-विश्राम, आत्म-शुद्धि एवं पावन पाहल-हवन की अमर परंपरा।
"अमावस्या का व्रत रखणा, साखी राखो सुहागणी।"
भगवान श्री जम्भेश्वर जी ने संवत 1542 में समराथल धोरा (बीकानेर) पर बिश्नोई पंथ की स्थापना करते समय इस नियम को अनिवार्य किया। अमावस्या के दिन धरती माता और हल-बैल जोतने वाले समस्त पशुधन को पूर्ण विश्राम दिया जाता है। इस दिन खेत जोतना, फसल काटना, कुआं चलाना अथवा किसी भी मूक जीव से काम लेना पाप माना गया है।
1. पाहल एवं हवन संस्कार
अमावस्या की प्रातः काल सूर्योदय बेला में शुद्ध घी, खोपरे व हवन सामग्री से अग्नि में आहुति दी जाती है तथा शब्दवाणी के 121 शब्दों से अभिमंत्रित पाहल ग्रहण किया जाता है।
2. पशु विश्राम व पर्यावरण दया
कृषि व हल जोतने पर पूर्ण रोक रहती है ताकि धरती व बैलों को एक दिन का प्राकृतिक अवकाश मिले। यह आधुनिक इकोलॉजी और पर्यावरण संरक्षण का विश्व-प्रथम वैज्ञानिक विधान है।
3. उपवास एवं सात्विक ध्यान
पूरे दिन अन्न-जल का सात्विक व्रत, ईश्वर स्मरण, जाम्भाणी साखियों का पठन और गौशालाओं व वन्यजीवों को चारा-पानी देकर पुण्य लाभ अर्जित किया जाता है।