बिश्नोई समाज की संस्थाएँ
अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा, टाइगर फोर्स, गौशालाएं एवं शैक्षणिक न्यास
बिश्नोई समाज की सत्यापित संस्थाओं, वन्यजीव संरक्षण समूहों, पंजीकृत गौशालाओं, शैक्षणिक न्यासों और सामाजिक-धार्मिक निकायों की जानकारी।
सत्यापित संस्थाएँ
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विश्नोई टाइगर फोर्स
जोधपुर स्थित पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण का युवा स्वयंसेवी संगठन। पश्चिमी राजस्थान में हिरणों एवं चिंकारा के शिकार को रोकने के लिए त्वरित एक्शन टीम और निगरानी नेटवर्क संचालित करता है।
गुरु जम्भेश्वर छात्रावास एवं शिक्षा समिति, हिसar
हिसार स्थित विश्वविद्यालयों (GJUST, HAU, LUVAS) में अध्ययनरत बिश्नोई समाज के छात्र-छात्राओं हेतु आवासीय, शैक्षणिक एवं करियर मार्गदर्शन सुविधा उपलब्ध कराने वाली संस्था।
गुरु जम्भेश्वर संस्थान / बिश्नोई भवन, नई दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में समाज का प्रमुख केंद्र व भवन। यहाँ यूपीएससी/सिविल सेवा के छात्रों के लिए अध्ययन कक्ष तथा एम्स आदि में उपचार हेतु आने वाले रोगियों व परिजनों हेतु सुलभ आवासीय सुविधा उपलब्ध है।
गुरु जम्भेश्वर सेवा समिति एवं बिश्नोई धर्मशाला, सूरत
गुजरात के प्रमुख कपड़ा व औद्योगिक नगर सूरत में निवासरत विश्नोई समाज की प्रमुख संस्था, जो सामुदायिक भवन, धर्मशाला एवं जनकल्याणकारी सेवा कार्यों का संचालन करती है।
गुरु जम्भेश्वर शोध संस्थान, बीकानेर
जाम्भाणी साहित्य, मध्यकालीन राजस्थानी पांडुलिपियों, 120 शबदवाणी एवं संत साहित्य के पाठ-आलोचनात्मक सम्पादन व संरक्षण का अग्रणी अकादमिक शोध संस्थान।
गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार
हरियाणा विधानसभा के अधिनियम संख्या 17 (1995) द्वारा स्थापित प्रतिष्ठित राज्य विश्वविद्यालय, जिसका नामकरण गुरु जम्भेश्वर भगवान के सम्मान में किया गया। यहाँ गुरु जम्भेश्वर धार्मिक अध्ययन शोध पीठ स्थापित है।
जांगलू धाम मंदिर समिति
अष्ट धामों में से एक जांगलू धाम का प्रबंध मंडल, जहाँ गुरु जम्भेश्वर भगवान ने तपस्या की तथा ऐतिहासिक जलाशय व साथरी को पावन किया था।
खेजड़ली शहीद स्मारक समिति
खेजड़ली के पावन अमर बलिदानी स्थल की व्यवस्थापक समिति, जहाँ संवत 1787 (1730 ई.) में अमृता देवी विश्नोई के नेतृत्व में 363 शहीदों ने खेजड़ी वृक्षों की रक्षा में शीश अर्पित किए थे।
मुकाम धाम गौशाला एवं जीव दया ट्रस्ट
मुकाम धाम स्थित विशाल आदर्श गौशाला, जहाँ हजारों देशी राठी व थारपारकर गोवंश का संरक्षण, संवर्धन एवं निःशुल्क चिकित्सा सेवा की जाती है।