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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
ग्रंथ / इतिहास 🗓 c. 1935 CE Hindi ✓ स्तर B (Level B) — शोध समर्थित

विश्नोई धर्म प्रकाश

✍️ रचयिता महापुरुष: स्वामी गोकुलदासजी

ग्रंथ परिचय एवं मूल पाठ

c. 1935 CE
— मूल पद / मंगलाचरण पाठ (डिंगल / प्राचीन राजस्थानी)

"धर्म की रक्षा सदाचार, प्रकृति की सेवा और सत्य के पालन से होती है। यही गुरु जम्भेश्वर जी के 29 नियमों का शाश्वत संदेश है।"

विश्नोई धर्म के सिद्धांतों, पाहल विधि, नित्य कर्म एवं पूजा पद्धति का समग्र मार्गदर्शक ग्रंथ।

🏛️ ऐतिहासिक व साहित्यिक महत्व

समस्त विश्नोई मंदिरों व धामों में पूजा-पद्धति और मर्यादा का मान्य स्रोत।

ग्रंथ साक्ष्य एवं शोध संदर्भ

Canonical literary work 'Bishnoi Dharm Prakash' catalogued in authoritative studies.

स्तर A (Level A) — पूर्णतः प्रमाणित

  • Swami Gokuldasji (स्वामी गोकुलदासजी). Bishnoi Itihas (विश्नोई इतिहास), Guru Jambheshwar Dharmarth Trust, Mukam, 1940.

ग्रंथ संदर्भ विवरण

साहित्य विधा ग्रंथ / इतिहास
रचना काल c. 1935 CE
भाषा / बोली Hindi
पांडुलिपि साक्ष्य 0
शोध संस्करण 0
साक्ष्य स्तर स्तर B (Level B) — शोध समर्थित
रचनाकार परिचय

स्वामी गोकुलदासजी

स्वामी गोकुलदासजी (1885-1968 ई.) विश्नोई समाज के मूर्धन्य इतिहासकार, शोधकर्ता एवं तपस्वी संत थे। आपने कई दशकों तक पूरे देश के विश्नोई गांवों, तीर्थों और राजा-महाराजाओं के ताम्रपत्रों का गहन अध्ययन कर 'विश्नोई धर्म प्रकाश' तथा 'विश्नोई इतिहास' जैसे अमर ऐतिहासिक संदर्भ ग्रंथों की रचना की।

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