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Q-SHABD-061-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 61 ('शब्द 61: कैतैं कारण किरिया चू यो,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Sorath
B Raag Ramkali
C Raag Bilawal
D Raag Bhairav
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 61 (शब्द 61: कैतैं कारण किरिया चू यो,) विशुद्ध रूप से Raag Ramkali में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-कैतैं कारण किरिया चूक्यो, कैतैं सूरज सामो थूक्यो। कैतैं...'

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Q-SHABD-062-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 62 ('शब्द 62: नामै कारण किरिया चू यो,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Bhairav
B Raag Sarang
C Raag Kedara
D Raag Dhanasri
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 62 (शब्द 62: नामै कारण किरिया चू यो,) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-नामै कारण किरिया चूक्यो, नामै सूरज साम्हो थूक्यो। नामै ...'

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Q-SHABD-063-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 63 ('शब्द 63: आतर पातर राही रूक्मण') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Asavari
B Raag Sorath
C Raag Dhanasri
D Raag Gauri
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 63 (शब्द 63: आतर पातर राही रूक्मण) विशुद्ध रूप से Raag Asavari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-आतर पातर राही रूक्मण मेल्हा मंदिर भोयो, गढ़ सोवन तेपण मे...'

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Q-SHABD-064-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 64 ('शब्द 64: मैं कर भूला मांड पिराणी,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Sorath
B Raag Bilawal
C Raag Dhanasri
D Raag Kedara
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 64 (शब्द 64: मैं कर भूला मांड पिराणी,) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-मैं कर भूला मांड पिराणी, काचै कन्ध अगाजूं। काचा कंध गले...'

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Q-SHABD-065-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 65 ('शब्द 65: तउवा जाग जु गोरख जाज्ज्या,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Maru
B Raag Ramkali
C Raag Gauri
D Raag Bhairav
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 65 (शब्द 65: तउवा जाग जु गोरख जाज्ज्या,) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-तउवा जाग जु गोरख जाग्या, निरह निरंजन निरह निरालंब। जुग ...'

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Q-SHABD-066-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 66 ('शब्द 66: ऊमाज गुमाज पंज गंज यारी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Todi
B Raag Dhanasri
C Raag Sarang
D Raag Bilawal
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 66 (शब्द 66: ऊमाज गुमाज पंज गंज यारी) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-ऊमाज गुमाज पंज गंज यारी, रहिया कुपहीया शैतान की यारी। श...'

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Q-SHABD-067-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 67 ('शब्द 67 (शुक्ल हंस): श्री गढ़ आल मोत पुर') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Todi
B Raag Maru
C Raag Sarang
D Raag Kalyan
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 67 (शब्द 67 (शुक्ल हंस): श्री गढ़ आल मोत पुर) विशुद्ध रूप से Raag Kalyan में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-श्री गढ़ आल मोत पुर पाटण भुंय नागोरी, म्हे ऊंडे नीरे अवत...'

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Q-SHABD-068-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 68 ('शब्द 68: वै कंवराई अनन्त बधाई') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Dhanasri
B Raag Sorath
C Raag Todi
D Raag Maru
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 68 (शब्द 68: वै कंवराई अनन्त बधाई) विशुद्ध रूप से Raag Maru में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-वै कंवराई अनन्त बधाई, वै कंवराई सुरग बधाई, यह कंवराई खे...'

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Q-SHABD-069-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 69 ('शब्द 69: जबरारे तैं जग डांडीलो') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Dhanasri
B Raag Sarang
C Raag Todi
D Raag Bhairav
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 69 (शब्द 69: जबरारे तैं जग डांडीलो) विशुद्ध रूप से Raag Sarang में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-जबरारे तैं जग डांडीलो, देह न जीती जांणो। माया जाले ले ज...'

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Q-SHABD-070-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 70 ('शब्द 70: हक हलालूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Bhairav
B Raag Kedara
C Raag Kalyan
D Raag Gauri
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 70 (शब्द 70: हक हलालूं) विशुद्ध रूप से Raag Kalyan में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-हक हलालूं, हक साच कृष्णों, सुकृत अहल्यो न जाई। भल बाहील...'

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Q-SHABD-071-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 71 ('शब्द 71: धवणा धूजै पाहण पूजै बे फरमाई खुदाई') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Gauri
B Raag Bilawal
C Raag Kedara
D Raag Bhairav
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 71 (शब्द 71: धवणा धूजै पाहण पूजै बे फरमाई खुदाई) विशुद्ध रूप से Raag Kedara में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-धवणा धूजै पाहण पूजै बे फरमाई खुदाई, गुरू के चेले के पाए...'

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Q-SHABD-072-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 72 ('शब्द 72: वेद कुराण कुमाया जालूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Todi
B Raag Maru
C Raag Dhanasri
D Raag Gauri
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 72 (शब्द 72: वेद कुराण कुमाया जालूं) विशुद्ध रूप से Raag Todi में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-वेद कुराण कुमाया जालूं, भूला जीव कुजीव कुजाणी। बसंदर नह...'

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Q-SHABD-073-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 73 ('शब्द 73: हरी कंकेहड़ी मंडप मैड़ी जहां') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Kedara
B Raag Ramkali
C Raag Bilawal
D Raag Bhairav
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 73 (शब्द 73: हरी कंकेहड़ी मंडप मैड़ी जहां) विशुद्ध रूप से Raag Ramkali में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-हरी कंकेहड़ी मंडप मैड़ी जहां हमारा बासा। चार चक नव दीप थर...'

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Q-SHABD-074-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 74 ('शब्द 74: कड़वा मीठा भोजन भख ले,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Bhairav
B Raag Kedara
C Raag Asavari
D Raag Sorath
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 74 (शब्द 74: कड़वा मीठा भोजन भख ले,) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-कड़वा मीठा भोजन भख ले, भखकर देखत खीरूं। धर आखरड़ी साथर सो...'

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Q-SHABD-075-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 75 ('शब्द 75: जोगी रे तू जुगत पिछांणी,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Sorath
B Raag Asavari
C Raag Bilawal
D Raag Kedara
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 75 (शब्द 75: जोगी रे तू जुगत पिछांणी,) विशुद्ध रूप से Raag Asavari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-जोगी रे तू जुगत पिछांणी, काजी रे तू कलम गऊ बिणासो कांहे...'

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Q-SHABD-076-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 76 ('शब्द 76: तन मन धोइये संजम हुइये,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Todi
B Raag Asavari
C Raag Sorath
D Raag Dhanasri
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 76 (शब्द 76: तन मन धोइये संजम हुइये,) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-तन मन धोइये संजम हुइये, हरष न खोइये। यूं यूं दुनिया करै...'

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Q-SHABD-077-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 77 ('शब्द 77: भूला लो भल भूला लो,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Bhairav
B Raag Bilawal
C Raag Dhanasri
D Raag Gauri
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 77 (शब्द 77: भूला लो भल भूला लो,) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-भूला लो भल भूला लो, भूला भूल न भूलूं। जिहिं ठूंठडीये पा...'

कठिनाई: medium
Q-SHABD-078-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 78 ('शब्द 78: नवै पोल नवै दरवाजा') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Bilawal
B Raag Kedara
C Raag Gauri
D Raag Ramkali
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 78 (शब्द 78: नवै पोल नवै दरवाजा) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-नवै पोल नवै दरवाजा, अहूठ कोड़ रूं राय जड़ी। कांयरे सींचो ...'

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Q-SHABD-079-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 79 ('शब्द 79: बारा पोल नवै दरसाजी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Dhanasri
B Raag Sorath
C Raag Asavari
D Raag Ramkali
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 79 (शब्द 79: बारा पोल नवै दरसाजी) विशुद्ध रूप से Raag Dhanasri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-बारा पोल नवै दरसाजी, राय अथरगढ थीरूं। इस गढ कोई थिर न र...'

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Q-SHABD-080-A • राग व मूल पाठ 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री शब्द वाणी का पावन पद 80 ('शब्द 80: जे म्हां सूता रैण बिहावै,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?

A Raag Bilawal
B Raag Todi
C Raag Maru
D Raag Gauri
💡 विस्तृत व्याख्या:

श्री शब्द वाणी का पद संख्या 80 (शब्द 80: जे म्हां सूता रैण बिहावै,) विशुद्ध रूप से Raag Maru में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-जे म्हां सूता रैण बिहावै, तो बरतै बिम्बा बारूं। चन्हद भ...'

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