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श्री शब्द वाणी का पावन पद 41 ('शब्द 41: सुण राजेंद्र, सुण जोगेंद्र') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 41 (शब्द 41: सुण राजेंद्र, सुण जोगेंद्र) विशुद्ध रूप से Raag Kedara में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—सुण राजेंद्र, सुण जोगेंद्र, सुण शेषिंद्र, सुण सोफिंद्र,...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 42 ('शब्द 42: आयसा काहे काजे खेह भकरूड़े') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 42 (शब्द 42: आयसा काहे काजे खेह भकरूड़े) विशुद्ध रूप से Raag Kedara में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—आयसा काहे काजे खेह भकरूड़े, सेवो भूत मसानां। घड़े, ऊंढे...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 43 ('शब्द 43: ज्यूं राज गयो राजिंदर झूरे') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 43 (शब्द 43: ज्यूं राज गयो राजिंदर झूरे) विशुद्ध रूप से Raag Kedara में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—ज्यूं राज गयो राजिंदर झूरे, खोज गयो नै खोजी। लाख मूंई ग...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 44 ('शब्द 44: खरतर झोली खरतर कंथा') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 44 (शब्द 44: खरतर झोली खरतर कंथा) विशुद्ध रूप से Raag Kedara में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—खरतर झोली खरतर कंथा, कांध सहे दुःख भारूं। जोग तणी थे खब...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 45 ('शब्द 45: दोय मन दोय दिल सिंधी न कंथा') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 45 (शब्द 45: दोय मन दोय दिल सिंधी न कंथा) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'साच कहो रे भाई संतो, साचे साच समाइ। झूठा जग बहु भटकि मुवा, स...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 46 ('शब्द 46: जिहिं जोगी के मनही मुद्रा') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 46 (शब्द 46: जिहिं जोगी के मनही मुद्रा) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—जिहिं जोगी के मनही मुद्रा, तनही कंथा पिंडै अगन थंभायो। ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 47 ('शब्द 47: काया कंथा मन जो गूंठो') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 47 (शब्द 47: काया कंथा मन जो गूंठो) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—काया कंथा मन जो गूंठो, सींगी सांस उसासूं। मन मृग राखलै ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 48 ('शब्द 48: लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 48 (शब्द 48: लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां, म्हारे साधां पड़े विरासूं। ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 49 ('शब्द 49: अवधू अजरा जार ले, अमरा राख ले') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 49 (शब्द 49: अवधू अजरा जार ले, अमरा राख ले) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—अवधू अजरा जार ले, अमरा राख ले। राख ले विष्णु की धारणा, ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 50 ('शब्द 50: तइया सांसू तइया मासूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 50 (शब्द 50: तइया सांसू तइया मासूं) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—तइया सांसू तइया मासूं, तइया देह दमाई। उत्तम मध्यम क्यूं...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 51 ('शब्द 51: सस पाताले भुयं अंतर अंतर राखिलौ') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 51 (शब्द 51: सस पाताले भुयं अंतर अंतर राखिलौ) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—सस पाताले भुयं अंतर अंतर राखिलौ, म्हे अटला अटळूं। अल्ला...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 52 ('शब्द 52: मोह मंडप थाप थाप ले') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 52 (शब्द 52: मोह मंडप थाप थाप ले) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—मोह मंडप थाप थाप ले, राख राखले, अधरा धरूं आदेश बेसूं। त...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 53 ('शब्द 53: गुरु हीरा बिणजै लेहम लेहूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 53 (शब्द 53: गुरु हीरा बिणजै लेहम लेहूं) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—गुरु हीरा बिणजै लेहम लेहूं, गुरु नै दोष न देणा। पवणा पा...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 54 ('शब्द 54: अरुण विघाणीं रे रवि भाणै') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 54 (शब्द 54: अरुण विघाणीं रे रवि भाणै) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—अरुण विघाणीं रे रवि भाणै देव दिवाणै, विष्णु पुराणों। बि...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 55 ('शब्द 55: घटिये कै खोज फिरंता') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 55 (शब्द 55: घटिये कै खोज फिरंता) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—घटिये कै खोज फिरंता, सुण सेवता, खोज हस्ती को पायो। लूंक...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 56 ('शब्द 56: कुपाथ कूं दान जु दीयो') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 56 (शब्द 56: कुपाथ कूं दान जु दीयो) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—कुपाथ कूं दान जु दीयो, जाणै ऐण अंधेरी चोर जु लीयो। चोर ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 57 ('शब्द 57: अति बल दानो सब ज्ञानी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 57 (शब्द 57: अति बल दानो सब ज्ञानी) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—अति बल दानो सब ज्ञानी, गऊ कोट जे तीरथ दानो, बहुत करै अच...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 58 ('शब्द 58: तउवा माण दुर्योधन माण्या') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 58 (शब्द 58: तउवा माण दुर्योधन माण्या) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—तउवा माण दुर्योधन माण्या, अवर भी माणत मांग। तउवा दान जु...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 59 ('शब्द 59: पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं (काल चक्र)') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 59 (शब्द 59: पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं (काल चक्र)) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—पढ़ कागल वेदूं शास्त्र शब्दूं, भूला भूले झंख्या आलूं। अ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 60 ('शब्द 60: हस्ती चढ़ंता गेंवर गुड़ंता') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 60 (शब्द 60: हस्ती चढ़ंता गेंवर गुड़ंता) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—हस्ती चढ़ंता गेंवर गुड़ंता, राज सभा रस भोगूं। जा दिन जम...'