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श्री शब्द वाणी का पावन पद 21 ('शब्द 21: जिहिं कै सार असारूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 21 (शब्द 21: जिहिं कै सार असारूं) विशुद्ध रूप से Raag Asa में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—जिहिं कै सार असारूं, पार अपारूं। थाध अथाधूं, उमग्या समा...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 22 ('शब्द 22: लो लो रे राजिंदर रायों') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 22 (शब्द 22: लो लो रे राजिंदर रायों) विशुद्ध रूप से Raag Dhanasari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—लो लो रे राजिंदर रायों, बाजै बाव सुवायों, आभै अमी झुराय...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 23 ('शब्द 23: साहिल्या हुआ मरण भय भागा') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 23 (शब्द 23: साहिल्या हुआ मरण भय भागा) विशुद्ध रूप से Raag Dhanasari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—साहिल्या हुआ मरण भय भागा, गाफिल मरणो धणा डरे। सतगुरु मि...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 24 ('शब्द 24: आसण बैसण कूड़ कपटण') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 24 (शब्द 24: आसण बैसण कूड़ कपटण) विशुद्ध रूप से Raag Dhanasari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—आसण बैसण कूड़ कपटण, कोई कोई चीन्हत वोजू बाटे। वोजू बाटे...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 25 ('शब्द 25: राज न भूलीलो, राजेंद्र') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 25 (शब्द 25: राज न भूलीलो, राजेंद्र) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—राज न भूलीलो, राजेंद्र, दुनी न बंधै मेरूं। पवणा झोले बी...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 26 ('शब्द 26: घण तण जीम्या, को गुण नाहीं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 26 (शब्द 26: घण तण जीम्या, को गुण नाहीं) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—घण तण जीम्या, को गुण नाहीं, मल भरिया भंडारूं। आगे पीछे ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 27 ('शब्द 27: पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 27 (शब्द 27: पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं, पढ़ सुन रहिया, कछु न लह...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 28 ('शब्द 28: मछली मच्छ फिरै जल भीतर') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 28 (शब्द 28: मछली मच्छ फिरै जल भीतर) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—मछली मच्छ फिरै जल भीतर, तिहिं का माथ न जोयबा। परम तत है...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 29 ('शब्द 29: इलोल सागर (गुरु कै शब्द असंख्य प्रबोधी)') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 29 (शब्द 29: इलोल सागर (गुरु कै शब्द असंख्य प्रबोधी)) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—गुरु कै शब्द असंख्य प्रबोधी, खारसमंद परीलो। खारसमंद परै...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 30 ('शब्द 30: कूं ची वाला शब्द (आयो हुंकारो जीवड़ो बुलायो)') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 30 (शब्द 30: कूं ची वाला शब्द (आयो हुंकारो जीवड़ो बुलायो)) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—आयो हुंकारो जीवड़ो बुलायो, कह जीवड़ा कै करण कमायो। थरहर...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 31 ('शब्द 31: भल मूल सींचो रे प्राणी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 31 (शब्द 31: भल मूल सींचो रे प्राणी) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—भल मूल सींचो रे प्राणी, ज्यूं का भल बुद्धि पावै। जामण म...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 32 ('शब्द 32: कोड़ गऊ जे तीरथ दानौं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 32 (शब्द 32: कोड़ गऊ जे तीरथ दानौं) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—कोड़ गऊ जे तीरथ दानौं, पंच लाख तुरंगम दानौं। कण कंचन पा...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 33 ('शब्द 33: कवण न हुआ कवण न होयसी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 33 (शब्द 33: कवण न हुआ कवण न होयसी) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—कवण न हुआ कवण न होयसी, किण न सहयो दुख भारूं। कवण न गइया...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 34 ('शब्द 34: फुंरंग फुंहारे कृष्णी माया') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 34 (शब्द 34: फुंरंग फुंहारे कृष्णी माया) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—फुंरंग फुंहारे कृष्णी माया, घण बरसंतां सरवर नीरे। तिरी ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 35 ('शब्द 35: बल बल भणत व्यासूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 35 (शब्द 35: बल बल भणत व्यासूं) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—बल बल भणत व्यासूं। नाना अगम न आसूं। नाना उदक उदासूं। बल...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 36 ('शब्द 36: काजी कथै कुराणूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 36 (शब्द 36: काजी कथै कुराणूं) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—काजी कथै कुराणूं, न चीन्हों फरमाणूं। काफर थूल भयाणूं, ज...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 37 ('शब्द 37: लोहा लंग लुहारूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 37 (शब्द 37: लोहा लंग लुहारूं) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—लोहा लंग लुहारूं, ठाठां घड़ै ठठारूं, उत्तम कर्म कुंहारू...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 38 ('शब्द 38: रेरे पिंड स पिंडूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 38 (शब्द 38: रेरे पिंड स पिंडूं) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—रेरे पिंड स पिंडूं, निरधन जीव क्यूं खंडूं। ताछै खंड बिछ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 39 ('शब्द 39: उत्तम संग सुसंगूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 39 (शब्द 39: उत्तम संग सुसंगूं) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—उत्तम संग सुसंगूं, उत्तम रंग सुरंगूं। उत्तम लंग सुलंगूं...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 40 ('शब्द 40: सस पाताले तिहूं त्रिलोके') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 40 (शब्द 40: सस पाताले तिहूं त्रिलोके) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—सस पाताले तिहूं त्रिलोके, चवदा भवने गगन गहीरे। बाहर भीत...'