भाषा:
PRACTICE QUESTION VAULT

सार्वभौमिक प्रश्न बैंक व विगत वर्ष प्रश्न

RPSC, REET, UPSC एवं बिश्नोई विद्वत शोध पीठ द्वारा सत्यापित प्रश्नों का अभ्यास करें। प्रत्येक प्रश्न के साथ विस्तृत उत्तर व विधिक संदर्भ उपलब्ध है।

✓ ३०० प्रामाणिक प्रश्न उपलब्ध (कुल: 300 प्रश्न)
Q-SHABD-081-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 81 ('शब्द 81: भल पांखडी पाखंड मंडा') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
B केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
C जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
D धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 81 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 81 में गुरु जम्भेश्वर जी मानव जीवन की नश्वरता और सत्कर्मों की महत्ता का बोध कराते हैं। वे प्राणी को सचेत करते हैं कि व्यर्थ के अहंकार को त्यागकर सत्य, शील, संतोष और परमार्थ के मार्ग पर चलें।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-082-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 82 ('शब्द 82: अलख-अलख तू अलख न लखणा,') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
B बिना गुरु मार्गदर्शन के केवल किताबी ज्ञान पर निर्भर रहना
C जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
D शरीर को व्यर्थ कष्ट देना और आत्म-कल्याण की उपेक्षा करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 82 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 82 में गुरु जम्भेश्वर जी मानव जीवन की नश्वरता और सत्कर्मों की महत्ता का बोध कराते हैं। वे प्राणी को सचेत करते हैं कि व्यर्थ के अहंकार को त्यागकर सत्य, शील, संतोष और परमार्थ के मार्ग पर चलें।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-083-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 83 ('शब्द 83: जो नर घोड़ै चढै पाग न बांधै') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A बिना गुरु मार्गदर्शन के केवल किताबी ज्ञान पर निर्भर रहना
B धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
C जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
D सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 83 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 83 में गुरु जम्भेश्वर जी सृष्टि के मूल तत्वों—जल, वायु, पृथ्वी, वनस्पति और मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण का पावन संदेश देते हैं। प्रकृति परमात्मा का ही स्वरूप है, अतः उसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का सर्वोपरि धर्म है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-084-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 84 ('शब्द 84: मूंड मुंडायो मन न मुंडायो,') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A शरीर को व्यर्थ कष्ट देना और आत्म-कल्याण की उपेक्षा करना
B सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
C धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
D जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 84 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 84 में गुरु जम्भेश्वर जी सद्गुरु की अनन्य महिमा और मार्गदर्शन की अनिवार्यता प्रकट करते हैं। गुरु-मुख से प्रकट होने वाला ज्ञान ही अज्ञान के अंधकार को मिटाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-085-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 85 ('शब्द 85: भोम भली कृषाण भी भला,') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
B शरीर को व्यर्थ कष्ट देना और आत्म-कल्याण की उपेक्षा करना
C जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
D धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 85 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 85 में गुरु जम्भेश्वर जी धार्मिक पाखंड, बाह्य कर्मकांड और मूक प्राणियों पर होने वाली क्रूरता का कड़ा विरोध करते हैं। वे स्पष्ट उपदेश देते हैं कि परमात्मा के दरबार में दया, सत्य, पवित्र आचरण और ईमानदारी ही सच्ची बंदगी है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-086-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 86 ('शब्द 86: जुग जागो जुग जाग पिरांणी,') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
B जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
C केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
D शरीर को व्यर्थ कष्ट देना और आत्म-कल्याण की उपेक्षा करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 86 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 86 में गुरु जम्भेश्वर जी सृष्टि के मूल तत्वों—जल, वायु, पृथ्वी, वनस्पति और मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण का पावन संदेश देते हैं। प्रकृति परमात्मा का ही स्वरूप है, अतः उसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का सर्वोपरि धर्म है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-087-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 87 ('शब्द 87: जिंह का उमज्ज्या समाघूं') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
B धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
C सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
D जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 87 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 87 में गुरु जम्भेश्वर जी मानव जीवन की नश्वरता और सत्कर्मों की महत्ता का बोध कराते हैं। वे प्राणी को सचेत करते हैं कि व्यर्थ के अहंकार को त्यागकर सत्य, शील, संतोष और परमार्थ के मार्ग पर चलें।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-088-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 88 ('शब्द 88: गोरख लो') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
B बिना गुरु मार्गदर्शन के केवल किताबी ज्ञान पर निर्भर रहना
C जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
D केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 88 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 88 में गुरु जम्भेश्वर जी जोगियों, सिद्धों और बाह्य भेष धारियों को सच्चा योग समझाते हैं। वे सिखाते हैं कि कान छिदवाना, भभूत मलना या वन-कंदराओं में भटकना योग नहीं है, अपितु मन के विकारों को वश में करना और जीव दया पालना ही सच्चा योग है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-089-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 89 ('शब्द 89: उरधक चन्हदा') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
B जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
C शरीर को व्यर्थ कष्ट देना और आत्म-कल्याण की उपेक्षा करना
D धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 89 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 89 में गुरु जम्भेश्वर जी धार्मिक पाखंड, बाह्य कर्मकांड और मूक प्राणियों पर होने वाली क्रूरता का कड़ा विरोध करते हैं। वे स्पष्ट उपदेश देते हैं कि परमात्मा के दरबार में दया, सत्य, पवित्र आचरण और ईमानदारी ही सच्ची बंदगी है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-090-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 90 ('शब्द 90: चोईस चेड़ा कालिंग केड़ा') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
B केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
C शरीर को व्यर्थ कष्ट देना और आत्म-कल्याण की उपेक्षा करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 90 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 90 में गुरु जम्भेश्वर जी सृष्टि के मूल तत्वों—जल, वायु, पृथ्वी, वनस्पति और मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण का पावन संदेश देते हैं। प्रकृति परमात्मा का ही स्वरूप है, अतः उसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का सर्वोपरि धर्म है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-091-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 91 ('शब्द 91: छंदे मंदे बालक बुद्धे') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
B धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
C जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
D सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 91 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 91 में गुरु जम्भेश्वर जी सद्गुरु की अनन्य महिमा और मार्गदर्शन की अनिवार्यता प्रकट करते हैं। गुरु-मुख से प्रकट होने वाला ज्ञान ही अज्ञान के अंधकार को मिटाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-092-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 92 ('शब्द 92: काया कोट पवन कुट वाली,') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
B बिना गुरु मार्गदर्शन के केवल किताबी ज्ञान पर निर्भर रहना
C जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
D सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 92 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 92 में गुरु जम्भेश्वर जी जोगियों, सिद्धों और बाह्य भेष धारियों को सच्चा योग समझाते हैं। वे सिखाते हैं कि कान छिदवाना, भभूत मलना या वन-कंदराओं में भटकना योग नहीं है, अपितु मन के विकारों को वश में करना और जीव दया पालना ही सच्चा योग है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-093-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 93 ('शब्द 93: आद शब्द अनाहद बांणी') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
B जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
C धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
D केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 93 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 93 में गुरु जम्भेश्वर जी सृष्टि के मूल तत्वों—जल, वायु, पृथ्वी, वनस्पति और मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण का पावन संदेश देते हैं। प्रकृति परमात्मा का ही स्वरूप है, अतः उसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का सर्वोपरि धर्म है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-094-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 94 ('शब्द 94: सहस्त्र नाम सांई भल शिंभु,') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
B धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
C जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
D केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 94 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 94 में गुरु जम्भेश्वर जी धार्मिक पाखंड, बाह्य कर्मकांड और मूक प्राणियों पर होने वाली क्रूरता का कड़ा विरोध करते हैं। वे स्पष्ट उपदेश देते हैं कि परमात्मा के दरबार में दया, सत्य, पवित्र आचरण और ईमानदारी ही सच्ची बंदगी है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-095-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 95 ('शब्द 95: बाद बिवाद फिटाकर प्राणी') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
B सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
C धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
D जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 95 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 95 में गुरु जम्भेश्वर जी जोगियों, सिद्धों और बाह्य भेष धारियों को सच्चा योग समझाते हैं। वे सिखाते हैं कि कान छिदवाना, भभूत मलना या वन-कंदराओं में भटकना योग नहीं है, अपितु मन के विकारों को वश में करना और जीव दया पालना ही सच्चा योग है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-096-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 96 ('शब्द 96: सुण गुणवंता') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
B जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
C बिना गुरु मार्गदर्शन के केवल किताबी ज्ञान पर निर्भर रहना
D धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 96 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 96 में गुरु जम्भेश्वर जी जोगियों, सिद्धों और बाह्य भेष धारियों को सच्चा योग समझाते हैं। वे सिखाते हैं कि कान छिदवाना, भभूत मलना या वन-कंदराओं में भटकना योग नहीं है, अपितु मन के विकारों को वश में करना और जीव दया पालना ही सच्चा योग है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-097-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 97 ('शब्द 97: विष्णु विष्णु तूं भण रे प्राणी') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
B सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
C धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
D बिना गुरु मार्गदर्शन के केवल किताबी ज्ञान पर निर्भर रहना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 97 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 97 में गुरु जम्भेश्वर जी अविनाशी परमात्मा विष्णु के अनन्य सुमिरन का संदेश देते हैं। वे मानव को सचेत करते हैं कि सांसारिक भ्रम और मोह-माया नश्वर हैं; केवल प्रभु का नाम और सदाचार ही भवसागर पार कराने वाले हैं।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-098-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 98 ('शब्द 98: जिहि गुरू कै खिणही ताऊं,') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
B जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
C जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
D बिना गुरु मार्गदर्शन के केवल किताबी ज्ञान पर निर्भर रहना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 98 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 98 में गुरु जम्भेश्वर जी सृष्टि के मूल तत्वों—जल, वायु, पृथ्वी, वनस्पति और मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण का पावन संदेश देते हैं। प्रकृति परमात्मा का ही स्वरूप है, अतः उसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का सर्वोपरि धर्म है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-099-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 99 ('शब्द 99: साच सही म्हे कूड़ न कहिबा') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
B केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
C जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक संकीर्णता का पोषण करना
D सांसारिक धन-संपत्ति एवं सांसारिक यश का संचय करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 99 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 99 में गुरु जम्भेश्वर जी सृष्टि के मूल तत्वों—जल, वायु, पृथ्वी, वनस्पति और मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण का पावन संदेश देते हैं। प्रकृति परमात्मा का ही स्वरूप है, अतः उसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का सर्वोपरि धर्म है।

कठिनाई: medium
Q-SHABD-100-B • दार्शनिक भावार्थ व उपदेश 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उद्घोषित शब्द संख्या 100 ('शब्द 100: अर्थूं गर्थूं साहण थाटूं') का प्रमुख आध्यात्मिक उपदेश अथवा केंद्रीय भाव क्या है?

A शरीर को व्यर्थ कष्ट देना और आत्म-कल्याण की उपेक्षा करना
B जीवों के प्रति कठोरता एवं प्राकृतिक नियमों की उपेक्षा करना
C धर्म केवल बाहरी आडंबर नहीं; सच्चा आचरण, जीव-दया और आत्म-साधना ही परमात्मा की सच्ची प्राप्ति है।
D केवल बाह्य धार्मिक आडंबरों एवं कर्मकांडों का विस्तार करना
💡 विस्तृत व्याख्या:

शब्द संख्या 100 का मुख्य दार्शनिक संदेश: शबद संख्या 100 में गुरु जम्भेश्वर जी मानव जीवन की नश्वरता और सत्कर्मों की महत्ता का बोध कराते हैं। वे प्राणी को सचेत करते हैं कि व्यर्थ के अहंकार को त्यागकर सत्य, शील, संतोष और परमार्थ के मार्ग पर चलें।

कठिनाई: medium