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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #97 • राग: Raag Ramkali

शब्द 97 — शब्द 97: विष्णु विष्णु तूं भण रे प्राणी

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्-विष्णु विष्णु तूं भण रे प्राणी, जो मन मानै रे भाई। दिनका भूला रात न चेता, कांय पड़ा सूता, आस किसी मन थाई। तेरी कुड़ काची लगवाड़ घणो छै, कुशल किसी मन भाई। हिरदै नाम विष्णु को जंपो, हाथे करो टवाई। हरि पर हर की आण न मानी, भूला भूल जपी महमाई। पाहन प्रीत फिटाकर प्राणी, गुरू बिन मुक्ति न जाई। पंच क्रोड़ी ले प्रहलाद उतरियो, जिन खर तर करी कमाई। सात क्रोड़ी ले राजा हरिचंद उतरियो, तारादे रोहिताश हरिचन्हद हाटोहाट बिकाई। नव क्रोड़ी राव युधिष्ठर ले उतरियो, धन धन कुन्हती माई। बारा क्रोड़ी समाहन आयो, प्रहलादा सूं वाचा कवल जु थाई। किसकी नारी वस्तु पियारी, किसका भाई। भूली दुनिया मर मर जावै, ना चीन्हो सुरराई। पाहण नाऊं लोहा सक्ता, नुगरा चीन्हत काई।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
शबद संख्या 97 में गुरु जम्भेश्वर जी अविनाशी परमात्मा विष्णु के अनन्य सुमिरन का संदेश देते हैं। वे मानव को सचेत करते हैं कि सांसारिक भ्रम और मोह-माया नश्वर हैं; केवल प्रभु का नाम और सदाचार ही भवसागर पार कराने वाले हैं।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
In Shabad #97, Sri Guru Jambheshwar Bhagwan imparts timeless spiritual wisdom. He inspires ceaseless remembrance of the Supreme Lord Vishnu, reminding the soul that worldly entanglements are fleeting and only spiritual truth liberates from worldly suffering.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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