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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #94 • राग: Raag Kalyan

शब्द 94 — शब्द 94: सहस्त्र नाम सांई भल शिंभु,

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्-सहस्त्र नाम सांई भल शिंभु, म्हे उपना आद मुरारी। जद मैं रहयो निरालंभ हो कर, उतपति धंधू कारी। ना मेरै मायन ना मेरै बापन, मैं अपनी काया आप संवारी। जुग छतीसों शून्हयहि बरत्या सतजुग माहीं सिरजी सारी। ब्रह्मा इन्हद्र सकल जग थरप्या, दीन्हही करामात केती वारी। चन्हद सूर दोय साक्षी थरप्या, पवन पवनेश्वर पवन अधारी। तदम्हे रूप कीयो मैनावतीयो, सत्यव्रत को ज्ञान उचारी। तदम्हे रूप र यो कामठीयो, तेतीसो की कोड़ हंकारी। जब मैं रूप धरयो बाराहि, पृथिवी दाढ़ चढ़ाई सारी। नरसिंह रूप धर हिरण्यकश्यप मारयो, प्रहलादो रहियो शरण हमारी। बावन होय बलिराज चितायो, तीन पैंड कीवीं धरसारी। परशुराम होय क्षत्रियपन साध्यो, गर्भ न छूट्यो नारी। च्ची राम शिर मुकुट बंधायो, सीता के अहंकारी। कन्हड़ होय कर बंसी बजाई गऊ चराई, धरती छेदी, काली ना यो, असुर मार किया क्षयकारी। बुद्ध रूप गयासुर मारयो, काफर मार किया बेगारी। पंथ चलायो राह दिखायो, नौवर विजय हुई हमारी। शेष जंभराय आप अपरंपर, अबल दिन से कहियो। जांभा गोरख गुरू अपारा। काजी मुल्ला पढ़िया पंडित, निंदा करै गवारा। दोजख छोड़ भिस्त जे चाहो, तो कहिया करो हमारा। इन्हद्रपुरी बैकुण्ठे बासो, तो पावो मोक्षहि द्वारा।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
शबद संख्या 94 में गुरु जम्भेश्वर जी धार्मिक पाखंड, बाह्य कर्मकांड और मूक प्राणियों पर होने वाली क्रूरता का कड़ा विरोध करते हैं। वे स्पष्ट उपदेश देते हैं कि परमात्मा के दरबार में दया, सत्य, पवित्र आचरण और ईमानदारी ही सच्ची बंदगी है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
In Shabad #94, Sri Guru Jambheshwar Bhagwan imparts timeless spiritual wisdom. He fearlessly denounces hypocrisy, empty rituals, and cruelty against innocent beings, emphasizing that true divine devotion lies in universal compassion, truthful living, and non-violence.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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