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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #9 • राग: Raag Asavari

शब्द 9 — शब्द 9: दिल साबित हज काबो नेड़ो

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—दिल साबित हज काबो नेड़ो, क्या उलंबग पुकारो। भाई नाऊं बलद पियारो, ताकै गले करद क्यूं सारो। बिन चीन्हैं खुदाय बिबरजत, केहा मुसलमानो। काफर मुकर होयकर राह गुमायो, जोय जोय गाफल करै धिंगाणों। ज्यू थे पश्चिम दिशा उलंबग पुकारो, भलजे यों चीन्हों रहमानों। तो रूख चलते पिंड पड़ते, आवै भिस्त बिमाणों। चढ़ चढ़ भींते मड़ी मसिते, क्या उलंबग पुकारो। कांहे काजे गऊ बिनासो, तो करीम गऊ क्यूं चारी। काहीं लीयूं दूध दहींयू, काहीं लीयूं धीऊं महीयू, काहीं लीयूं हाडू मांसूं, काहीं लीयूं रतूं रुहियूं। सुपणे काजी सुपणे मुल्लां, यामैं कौण भया मुरदारूं। जीवा ऊपर जोर करीजै, अंतकाल होयसी भारूं।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
परमात्मा को केवल किसी बाहरी तीर्थ, दिशा या धार्मिक स्थान में खोजने के बजाय हृदय में पहचानना चाहिए। यदि मनुष्य ईश्वर को पहचानने का दावा करता है, तो उसे जीवों पर हिंसा नहीं करनी चाहिए। जीवित प्राणियों पर बलपूर्वक अत्याचार करके धार्मिकता का दावा करना आत्मविरोधी है। करुणा और अहिंसा के बिना धार्मिक कर्मकांड अधूरे हैं।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
The Divine should not be sought merely through an external pilgrimage, direction or sacred place; the seeker should recognize the Divine within the heart. If one claims to know God, one should not commit violence against living beings. Claiming religious righteousness while using force against living creatures is contradictory. Without compassion and non-violence, external religious practices remain incomplete.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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